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मरीज के बेड पर पांव रखने वाले अफसर की 'दूसरी' तस्वीरें

वे तस्वीरें जो सोशल मीडिया पर वायरल नहीं हुईं.

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फोटो - thelallantop
छत्तीसगढ़ में ट्रेनी IAS अफसर जगदीश सोनकर, जिनकी तस्वीर बीते दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई, ने माफ़ी मांगी है. याद दिला दें ये वही तस्वीर है जिसमें इन्होंने मरीज़ से बात करते हुए अस्पताल के पलंग पर पांव रखा हुआ था. जगदीश सोनकर बलरामपुर के रामानुजगंज सब-डिवीज़नल मजिस्ट्रेट हैं. इनके पास मेडिकल डिग्री है. अस्पताल में इंस्पेक्शन और मरीजों से बातचीत करने गए. वहीं उनसे मरीज के बेड पर पांव रखने वाली ये गलती हुई. 3 मई को तस्वीर खूब वायरल हुई. फेसबुक से लेकर ट्विटर तक. लोगों ने लिखा कि तस्वीर वायरल होने के बाद भी जगदीश ने किसी तरह की शर्म नहीं दिखाई. IAS का फुल फॉर्म बदलते हुए ट्विटर पर ट्रेंड चल पड़ा #IndianArrogantServices. https://twitter.com/Moi_Asomiya/status/728044985937858560 https://twitter.com/bhartiyabhakt/status/727859768962899969 https://twitter.com/IASassociation/status/727700803084025856 7 मई को फेसबुक पर ये लिखा जगदीश सोनकर ने:
मैं ये पोस्ट अपनी उस तस्वीर के जवाब में लिख रहा हूं जो सोशल मीडिया और अखबारों में चल रही है. मैं माफ़ी मांगना चाहता हूं. हालांकि ये हरकत जानबूझ कर की हुई नहीं थी. लेकिन कोई भी बात इस हरकत को सही नहीं ठहरा सकती. मैं जानता हूं मेरी इस हरकत ने सरकारी अफसरों की छवि को चोट पहुंचाई है. मैं उन सब से भी माफ़ी मांगता हूं. मैं उनका शुक्रगुजार हूं जो ऐसे समय में में मेरे साथ खड़े रहे, मेरे दोस्त, मेरा परिवार, मेरे साथ काम करने वाले और मीडिया के कुछ लोग. मैं उनका भी शुक्रगुजार हूं जिन्होंने मेरी तस्वीर देखकर मुझे जज नहीं किया. मैं आप सभी को भरोसा दिलाता हूं कि जो मूल्य हम सरकारी अफसरों को सिखाए जाते हैं उन पर टिका रहूंगा. ज़िन्दगी में बेहतर काम करूंगा. जिनको इस तस्वीर से चोट पहुंची है उनसे माफ़ी मांगता हूं. मैं सोशल मीडिया पर एक्टिव नहीं हूं. इसलिए जवाब देर से दे रहा हूं. जगदीश सोनकर.
सोशल मीडिया में निगेटिव चीजें जल्दी फैलती हैं. और भी कई तस्वीरें थी जगदीश सोनकर की. जो उनके अस्पताल दौरे के समय खींची गई थीं. लेकिन वायरल उनमें से सिर्फ एक तस्वीर हुई. अगर आपको याद हो, एक 'बेवड़े' पुलिस वाले का मेट्रो में बनाया वीडियो भी खूब वायरल हुआ था. इतना, कि पुलिस वाले को सस्पेंड कर दिया गया. बाद में मालूम चला की पुलिस वाला असल में दिमागी पैरालिसिस से जूझ रहा था. और दारू पी कर नहीं, चक्कर खा कर गिरा था. ये 'भीड़ के न्याय' का वर्चुअल रूप है. जो एक तस्वीर देख कर ही अपना फैसला सुना देती है. बलरामपुर के डीएम एलेक्स पॉल मेनन ने अपने जूनियर जगदीश सोनकर के सपोर्ट में ये ट्वीट किए: https://twitter.com/alexpaulmenon/status/727973048251342848 https://twitter.com/alexpaulmenon/status/727972919435890688 https://twitter.com/alexpaulmenon/status/727972709930405888 पढ़िए: 'मैं बेवड़ा नहीं था, आपने गलत समझा सर'

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