राजीव सक्सेना राजीव समशेर बहादुर सक्सेना इनका पूरा नाम है. ट्रेनिंग से अकाउंटेंट हैं और पेशे से कारोबारी. दुबई के पाम जुमेराह में रहते हैं. ये समंदर में बना वही प्रोजेक्ट है, जो आसमान से खजूर के पेड़ की तरह दिखता है. 30 जनवरी, 2019 की सुबह राजीव को दुबई पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. राजीव के खिलाफ गैर ज़मानती वॉरंट निकला हुआ था.

सरकारी गवाह बनने के बावजूद भी अगर राजीव सक्सेना दोषी पाए जाते हैं, तो सज़ा ज़रूर होगी.
राजीव पर इस घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है इसीलिए केस प्रवर्तन निदेशालय (ED) के हवाले आया. राजीव सक्सेना की पत्नी, शिवानी भी इस मामले में आरोपी हैं. एक बार उनकी गिरफ्तारी भी हो चुकी है. उन्हें 2017 में चेन्नई एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया था. हालांकि आजकल बेल पर बाहर हैं.
ED का मानना है कि राजीव, उनकी पत्नी और दुबई की दो कंपनियां – ‘MS UHY Saxsena’ और ‘MS Matrix Holdings’ तक घोटाले का पैसा पहुंचा, जिससे प्रॉपर्टी खरीदी गई. ED राजीव को मॉरीशिस की उस ‘Interstellar Technologies’ के मालिकों में से एक मानती है, जिसे कंसल्टेंसी फीस के नाम पर गबन का पैसा दिया गया है.
क्या है अगुस्ता वेस्टलैंड घोटाला? वो, जिसका इस्तेमाल भाजपा रफाएल के जवाब के तौर पर करती है. वैसे इस कंपनी को अगस्ता वेस्टलैंड भी कहा जाता है. इसी कंपनी से 12 वीवीआईपी हेलिकॉप्टर खरीदने के सौदे में मनमोहन सिंह की यूपीए– 2 सरकार ने हाथ जला लिए थे. इस पर तड़का ये कि अगुस्ता वेस्टलैंड की पेरेंट कंपनी फिनमिकैनिका इटली बेस्ड है. हेलिकॉप्टर खरीदने का मन बतौर प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने बनाया था. लेकिन सौदा तय हुआ 2010 में मनमोहन सिंह के समय में. कुल कीमत थी तकरीबन 3600 करोड़ रुपए. ये हेलिकॉप्टर वायुसेना को मिलते और राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और दूसरे वीवीआईपी लोगों की सवारी के लिए काम आते. सब ठीक-ठाक चल रहा था. भारत ने 1620 करोड़ रुपए चुका दिए थे और 3 हेलिकॉप्टर हिंदुस्तान आ गए थे.

ये डील हुई थी यूपीए के टाइम में. लेकिन बातचीत शुरू हो गई थी अटल सरकार के दौर में. अब दोनों पार्टियां एक-दूसरे पर कीचड़ उछाल रही हैं.
फिर 24 फरवरी, 2012 को इंडियन एक्सप्रेस ने एक खबर छापी. खबर थी कि इटली में फिनमिकैनिका के खिलाफ पिछले एक साल से चल रही छानबीन में एक खुलासा हुआ है. खुलासा था कि अगुस्ता वेस्टलैंड ने भारत के साथ हुए सौदे में तकरीबन लगभग 423 करोड़ रुपए की घूस दी है. ये घूस फिनमिकैनिका के मालिक गिसिप ओर्सी ने गीडो राल्फ हैश्के नाम के एक दलाल के ज़रिए वायुसेना प्रमुख त्यागी को दी. त्यागी को ये रकम उनके चचेरे भाई के ज़रिए मिली. ये घूस का एक रूट था. ज़्यादातर पैसा शेल कंपनियों के ज़रिए दिया गया. ये कंपनियां सिर्फ कागज़ पर होती हैं.
घोटाले में हुई कथित दलाली में सबसे बड़ा नाम था क्रिस्चियन मिशेल का. इसने सीबीआई को प्रस्ताव दिया था कि उसे सज़ा न देने का वादा किया जाए तो वो सब सच बोल देगा. पिछले दिनों मिशेल की बहन ने इल्ज़ाम लगाया कि क्रिस्चियन पर सीबीआई ने दबाव डाला कि एक बार सोनिया गांधी का नाम ले दे. हेलिकॉप्टर अगुस्ता इसलिए बेच पाया था कि शर्त में उड़ान की उंचाई 6000 मीटर से घटाकर 4500 मीटर की गई. कांग्रेस कहती है वाजपेयी के जमाने में शर्त बदल दी गई थी. भाजपा कहती है कांग्रेस ने शर्त बदली.

अगस्ता की खरीद में घोटाले की बात 2012 में ही शुरू हो गई थी.
इटली में चले मुकदमे में ओर्सी यानी अगुस्ता वेस्टलैंड के मालिक को इंटरनैशनल क्राइम का दोषी नहीं पाया गया. लेकिन अनियमितता के मामले में सज़ा हुई है. भारत में मामला चल रहा है. हाल ही में सीबीआई ने एक और चार्जशीट दाखिल की है जिसमें वायुसेना प्रमुख रहे त्यागी का नाम था. भारत ने 3 हेलिकॉप्टर पालम में तिरपाल से ढंक रखे हैं और अगुस्ता वेस्टलैंड को दिए पैसे बैंक गारंटी सहित वापिस ले लिए हैं.
राजीव सक्सेना के सरकारी गवाह बनने से केस पर क्या असर होगा?
सक्सेना ने कोर्ट में बयान दिया कि-
मैंने काफी सोच विचार करने के बाद गवाह बनने का फैसला किया है. साथ ही सरकारी गवाह बनने के लिए किसी ने मुझ पर दबाव भी नहीं डाला है. मैं अपनी गवाही निष्पक्ष तरीके से देना चाहता हूं.इससे पहले सक्सेना ने कहा था कि उसे पैसे के सारे लेन-देन की पूरी जानकारी है. और अगर मौका दिया जाता है तो सब आरोपियों की पोल-पट्टी खोल देगा. उम्मीद की जा रही है कि सक्सेना की गवाही से पूर्व एयर चीफ त्यागी और बाकी आरोपियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. एक जानकारी और दे देते हैं. राजीव सक्सेना को बीमारी के आधार पर 25 फरवरी, 2019 को कोर्ट से नियमित जमानत भी दी जा चुकी है.
























