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'केदारनाथ में 100 किलो के RSS नेता से मिला था, उनका नौकर'... राहुल गांधी ने क्या किस्सा सुनाया?

किस्सा सुनाने से पहले राहुल ने कहा भी, 'ये बात शायद नहीं बोलनी चाहिए, थोड़ी कंट्रोवर्शियल हो जाएगी.'

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महाराष्ट्र में जनसभा को संबोधित करते राहुल गांधी और साल 2015 में उनकी केदारनाथ यात्रा की तस्वीर (फोटो: ट्विटर/ @INCIndia)

कांग्रेस की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ (Bharat Jodo Yatra) महाराष्ट्र पहुंच गई है. यात्रा का नेतृत्व कर रहे राहुल गांधी गुरुवार, 10 नवंबर को नांदेड़ में थे. इस दौरान एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने 'RSS के 100 किलो के नेता का' जिक्र किया. बयान वायरल होने के बाद से चर्चा में है.

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कौन था 100 किलो का RSS नेता?

पता नहीं. राहुल गांधी ने सिर्फ किस्सा सुनाया. RSS नेता का नाम नहीं बताया. कहा कि 2015 की केदारनाथ यात्रा के दौरान वो इस RSS नेता से मिले थे, जिसका वजन ‘100 किलो’ था. ये किस्सा सुनाने से पहले राहुल ने पहले लोगों से पूछा कि उन्हें ये बात बोलनी चाहिए या नहीं. उन्होंने कहा कि ये बात थोड़ी विवादास्पद हो जाएगी. फिर उन्होंने वो बात बता ही दी. बोले, 

‘हम अंदर जा रहे थे. और उनके साइड में एक नौकर था. नौकर के सिर पर बड़ी सी टोकरी थी. उसमें फल थे. मैंने कहा, सर ये क्या है? (नेता) कहते हैं, मैं फल शिव जी के चरणों पर डालने के लिए लाया हूं. मैंने सोचा, आप नहीं लाए हैं. आपका नौकर लाया है.’

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राहुल ने ‘RSS नेता’ के वजन पर जोर देते हुए बताया कि वो हेलिकॉप्टर से केदारनाथ आए थे और उन्होंने शिवजी से सेहत मांगी थी. अगर वो नेता खुद केदारनाथ पैदल आ जाते तो सेहत मिल जाती. आगे राहुल ने कहा,

‘मैं केदारनाथ पैदल गया था, बहुत अच्छा लगा था.’

राहुल गांधी ने बताया कि उन्होंने पहले ही मन बना लिया था कि वे केदारनाथ पैदल जाएंगे. उन्होंने कहा,

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‘मैंने सोचा कि अगर मैं शिव के मंदिर में जा रहा हूं. सबसे बड़े तपस्वी के घर, तो हेलिकॉप्टर में जाने का कोई मतलब ही नहीं है. मतलब मैं तपस्वी के घर जा रहा हूं और मैं 15 किमी तपस्या नहीं कर सकता क्या? मैं पैदल गया. वहां पर बहुत अच्छा लगा. बड़ी ठंड थी. 16-17 किमी (का रास्ता) है. पता लगता है कि केदारनाथ जा रहे हैं.’

राहुल गांधी के मुताबिक उन्होंने शिव से कुछ नहीं मांगा. बोले, ‘मैं गया, मैंने हाथ जोड़ा. शिवजी का धन्यवाद किया कि आपने मुझे रास्ता दिखाया है. ये फर्क है RSS में और कांग्रेस पार्टी में, ये फर्क है गांधी जी में और सावरकर जी में. हम कहते नहीं हैं. हम कर देते हैं.’

वीडियो: राहुल गांधी बोलते हुए बार-बार अपना माइक क्यों बंद करने लगे

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