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NHRC अध्यक्ष की नियुक्ति पर राहुल गांधी और खरगे की आपत्ति, बोले- 'बात नहीं सुनी गई...'

पूर्व न्यायाधीश Justice V. Ramasubramanian को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है.

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राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे. (PTI)

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश वी. रामसुब्रमण्यम (V. Ramasubramanian) को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) का अध्यक्ष नियुक्त किए जाने पर कांग्रेस ने सवाल खड़ा कर दिया है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा नियुक्ति के अगले ही दिन पार्टी ने एक असहमति नोट जारी किया और कहा कि चयन प्रक्रिया में "मौलिक रूप से गलतियां" थीं.

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विपक्ष के नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने चयन समिति से अध्यक्ष और सदस्यों के नामों पर अपनी असहमति दर्ज की है. चयन समिति की बैठक 18 दिसंबर को हुई थी. दोनों नेताओं ने असहमति नोट में कहा

"यह एक पहले से तय व्यवस्था थी जिसमें अब तक चली आ रही आपसी परामर्श और आम सहमति की परंपरा को नजरअंदाज किया गया. जो खासतौर पर ऐसे मामलों में आवश्यक है. यह नियुक्ति निष्पक्षता के सिद्धांतों को कमजोर करती है, जो चयन समिति की विश्वसनीयता के लिए महत्वपूर्ण हैं. विचार-विमर्श को बढ़ावा देने और सामूहिक निर्णय सुनिश्चित करने के बजाय, समिति ने नामों को अंतिम रूप देने के लिए अपने संख्यात्मक बहुमत का इस्तेमाल किया. बैठक के दौरान उठाई गई वैध चिंताओं और नज़रिये की अनदेखी की गई."

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कांग्रेस नेताओं ने NHRC के अध्यक्ष पद के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रोहिंटन फली नरीमन और न्यायमूर्ति केएम जोसेफ के नाम प्रस्तावित किए थे. उन्होंने कहा-

"अल्पसंख्यक पारसी समुदाय के प्रतिष्ठित न्यायविद न्यायमूर्ति रोहिंटन फली नरीमन अपनी बौद्धिक गहराई और संवैधानिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के लिए जाने जाते हैं. उनके शामिल होने से भारत के बहुलवादी समाज का प्रतिनिधित्व करने के लिए NHRC के समर्पण के बारे में एक अच्छा संदेश जाएगा. इसी तरह, अल्पसंख्यक ईसाई समुदाय से आने वाले सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति कुट्टियिल मैथ्यू जोसेफ ने लगातार ऐसे फैसले दिए हैं जो व्यक्तिगत स्वतंत्रता और हाशिए पर पड़े समूहों की सुरक्षा पर जोर देते हैं. वह इस महत्वपूर्ण पद के लिए एक आदर्श उम्मीदवार हैं."

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि NHRC सदस्यों के पदों के लिए उन्होंने उड़ीसा उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस मुरलीधर और राजस्थान एवं त्रिपुरा उच्च न्यायालयों के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अकील अब्दुल हामिद कुरैशी के नामों की भी सिफारिश की थी.

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राहुल गांधी और खरगे ने अपनी आपत्ति में कहा कि-

"हालांकि योग्यता निस्संदेह प्राथमिक मानदंड है लेकिन राष्ट्र की क्षेत्रीय, जातिगत, सामुदायिक और धार्मिक विविधता को दर्शाने वाला संतुलन बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है. यह संतुलन सुनिश्चित करता है कि NHRC समाज के सभी वर्गों के अनुभवों के प्रति संवेदनशील, समावेशी दृष्टिकोण से काम करे. इस महत्वपूर्ण सिद्धांत की उपेक्षा करके, समिति इस प्रतिष्ठित संस्था में जनता के विश्वास को खत्म करने का जोखिम उठा रही है."

कौन हैं रामासुब्रमण्यम?

पूर्व न्यायाधीश जस्टिस अरुण कुमार मिश्रा का कार्यकाल 1 जून, 2024 को खत्म हो गया था. उसके बाद से NHRC के अध्यक्ष का पद खाली पड़ा था. अब राष्ट्रपति इस पद पर पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रामासुब्रमण्यम की नियुक्ति की है. रामासुब्रमण्यम 2019 से 2023 तक देश की सर्वोच्च अदालत में न्यायाधीश की भूमिका में थे. इससे पहले वो हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट में बतौर मुख्य न्यायाधीश भी सेवाएं दे चुके थे. बतौर जज उनकी पहली नियुक्ति 2006 में मद्रास हाई कोर्ट में हुई थी. अपने सुप्रीम कोर्ट के कार्यकाल के दौरान रामासुब्रमण्यम नोटबंदी, क्रिप्टोकरेंसी जैसे अहम फैसलों का हिस्सा रहे हैं.

रामासुब्रमण्यम की नियुक्ति जिस पद पर हुए हुई है उसी के लिए पिछले दिनों पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ का नाम मीडिया में खूब उछला था. जिसके बाद उन्होंने खुद ही खंडन करते हुए इन्हें अफवाह करार दिया था.

वीडियो: पूर्व CJI चंद्रचूड़ को मोदी सरकार क्या बड़ा पद देने जा रही, सच्चाई क्या है?

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