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शहीद की मां-पत्नी ने बालाकोट के सबूत मांगे, क्या वीके सिंह उन्हें अगली बार जहाज पर बांधकर भेजेंगे?

शहीद राम की मां और पत्नी ने क्या कहा...

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दाईं तरफ शहीद राम की मां और बाईं तरफ पत्नी (फोटो साभार: ऑडनारी)
14 फरवरी को पुलवामा में शहीद हुए एक और जवान की मां और पत्नी ने बालाकोट हमले का सबूत मांगा है. शहीद राम वकील की पत्नी हैं गीता देवी. उनका कहना है कि केंद्र सरकार को इस अटैक में मारे गए आतंकियो की संख्या बताने के लिए कुछ सबूत देना चाहिए. मां अमित श्री का कहना है, 'मेरा बेटा तो चला ही गया लेकिन हमें एक-दो लाश तो दिखा ही दे आतंकवादियों की.' राम वकील की बहन रामरक्षा का भी कुछ ऐसा ही कहना है. उन्होंने कहा कि बालाकोट में क्या कुछ हुआ, लोगों को ये पता होना चाहिए. टाइम्स ऑफ इंडिया में अनुजा जायसवाल की बायलाइन से ये खबर छपी है. इन्होंने शहीद राम वकील के परिवार से बात की. राम वकील मैनपुरी के रहने वाले थे. एक महीने की छुट्टियां घर पर बिताने के बाद 11 फरवरी को वो वापस ड्यूटी जॉइन करने कश्मीर पहुंचे थे. 14 फरवरी को जब CRPF का काफिला जम्मू से श्रीनगर जा रहा था, तो रास्ते में उनके ऊपर आतंकी हमला हुआ. इसमें जो 40 जवान मारे गए, उनमें एक राम वकील भी था. टाइम्स से बात करते हुए उनकी बहन रामरक्षा ने कहा-
अगर ये दावा किया जा रहा है कि 300 से ज्यादा लोग मारे गए, तो कुछ सबूत दिया जाना चाहिए. हम कैसे भरोसा करें कि हमला हुआ और आतंकवादी मारे गए? ये दावे झूठे भी हो सकते हैं.
शहीद राम वकील की मां अमितश्री का कहना है-
अगर सरकार ये दावा कर रही है कि उन्होंने शहीद हुए सैनिकों का बदला ले लिया है, तो उन्हें इसका सबूत भी देना चाहिए.
राम वकील की पत्नी गीता का कहना है कि उनके पति मार्च में घर आने का वादा करके ड्यूटी गए थे. उन्हें इटावा में घर बनवाने का काम शुरू करना था. अब वो रहे नहीं. गीता का कहना है कि अब उन्हें अकेले ही अपने तीन बेटों की परवरिश करनी होगी. इससे पहले शहीद प्रदीप कुमार की पत्नी सरमिष्ठा देवी ने भी बालाकोट अटैक का प्रूव मांगा था. प्रदीप भी पुलवामा अटैक में शहीद हुए थे. उनकी पत्नी का कहना था कि सरकार बालाकोट में हवाई हमला करने से जुड़े जो दावे कर रही है, उससे संतुष्ट नहीं हैं वो. भाजपा अध्यक्ष अमित शाह मरने वाले आतंकियों की संख्या 250 बता चुके हैं. लेकिन सरकार कोई गिनती बताने से इनकार कर रही है. राजनाथ सिंह ये कह चुके हैं कि इसका सबूत मांगने वालों को बालाकोट जाकर गिनती करनी चाहिए. वीके सिंह ने कहा है, 'अगली बार जब भारत कुछ करे, तो मुझे लगता है कि विपक्षी जो ये प्रश्न उठाते हैं, उनको हवाई जहाज के नीचे बांध के ले जाएं. जब बम चले तो वहां से देख लें टारगेट. उसके बाद उनको वहीं पर उतार दें. उसके बाद वो गिन लें और वापस आ जाएं.' क्या ये नेता एक शहीद की पत्नी को भी बालाकोट भेजना चाहेंगे?
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