राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कोलकाता ट्रेनी डॉक्टर के बलात्कार और हत्या की कड़ी निंदा की है. ‘निराशा’ और ‘भय’ व्यक्त किया. सख़्ती से कहा, ‘बस अब बहुत हो गया!’ राष्ट्रपति के मुताबिक़, महिलाओं के ख़िलाफ़ इस तरह के जघन्य अपराधों को रोकने के लिए सामाजिक सुधार की तत्काल ज़रूरत है. ये इस मामले पर राष्ट्रपति की पहली सार्वजनिक टिप्पणी है.
कोलकाता रेप और मर्डर केस पर पहली बार बोलीं राष्ट्रपति - 'बस, अब बहुत हो गया!'
राष्ट्रपति ने एक इंटरव्यू में कहा कि एक ‘घृणित मानसिकता’ अक्सर महिलाओं को कमतर देखती है. कम शक्तिशाली, कम सक्षम और कम बुद्धिमान.


उन्होंने न्यूज़ एजेंसी PTI के साथ इंटरव्यू में इस केस से जुड़े विरोध प्रदर्शनों के लिए अपना समर्थन व्यक्त किया और ‘त्वरित न्याय’ की अपील की. महिलाओं के प्रति सामाजिक नज़रिए को बदलने और जीवन के सभी क्षेत्रों में उनकी सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने की बात की. उन्होंने कहा,
“जब छात्र, डॉक्टर और नागरिक हाल ही में हुए अपराध के जवाब में कोलकाता में विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, तब अपराधी अन्य जगहों पर खुलेआम घूम रहे थे… कोई भी सभ्य समाज बेटियों और बहनों पर इस तरह के अत्याचार की अनुमति नहीं दे सकता.”
पाठक जानते ही हैं कि 9 अगस्त को कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में एक 31 साल की एक ट्रेनी डॉक्टर का बलात्कार किया गया और उनकी हत्या कर दी गई. इस अपराध ने पूरे राज्य, पूरे देश में लोगों में आक्रोश पैदा कर दिया और आरोपियों के लिए त्वरित कार्रवाई और मौत की सज़ा की मांग की.
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राष्ट्रपति ने इस बात की आलोचना की, कि निर्भया केस के 12 साल बाद भी देस में अनगिनत बलात्कार के मामले दर्ज हुए और हम बार-बार इन घटनाओं को भूल जाते हैं. उन्होंने कहा,
“ये भूलने की सामूहिक बीमारी घृणित है. महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराधों को याद रखने और संबोधित करने के तरीक़े में स्थायी बदलाव की ज़रूरत है.”
राष्ट्रपति ने कहा कि एक ‘घृणित मानसिकता’ अक्सर महिलाओं को कमतर देखती है. कम शक्तिशाली, कम सक्षम और कम बुद्धिमान. इसी की तर्ज़ पर उन्होंने समाज से ईमानदार और निष्पक्ष आत्मनिरीक्षण करने को कहा और महिलाओं के साथ अपने बर्ताव के बारे में ख़ुद से मुश्किल सवाल पूछने के लिए कहा.
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