8 नवंबर को 500-1000 के नोट बैन करने का ऐलान हुआ. तब से जितने जन-धन अकाउंट्स हैं, उनमें 21 हजार करोड़ रुपये जमा किए जा चुके हैं. पिछले 13 दिनों में जन धन खातों में जमा होने वाले कैश की बाढ़ आ गई है और ये आंकड़ा 21 हजार करोड़ के पार चला गया है. फाइनेंस मिनिस्ट्री के सूत्रों ने बुधवार को ये खबर दी.
दिलचस्प तथ्य है कि सबसे ज्यादा पैसा पश्चिम बंगाल के जन-धन खातों में जमा किया गया, जहां की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी नोटबंदी का पुरजोर विरोध कर रही हैं. दूसरे नंबर पर कर्नाटक रहा. वहां कांग्रेस की सरकार है.
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, कैश निकाले जाने के बाद भी अभी अकाउंट्स में 66,636 करोड़ रुपया बचा हुआ है. 9 नवंबर को ये बैलेंस 45,636 करोड़ था. केंद्र सरकार ने 28 अगस्त 2014 को जन-धन योजना की शुरुआत की थी. इसके तहत देश में कुल 24 करोड़ नए बैंक खाते खोले गए थे, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को बैंक से जोड़ा जा सके.
जन-धन खातों में अचानक हुई पैसों की बारिश कुछ संदिग्ध भी है. आशंका है कि बहुत सारे खातों का इस्तेमाल काले धन को सफेद करने के लिए किया गया है. इससे पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली भी कह चुके हैं कि सरकार जीरो बैलेंस वाले जन-धन खातों में अचानक जमा हुई मोटी रकम पर नजर रखे हुए है.
वित्त मंत्रालय ने पहले भी चेताया था कि जो लोग काले धन को सफेद बनाने के लिए दूसरों के अकाउंट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, वो कानूनी कार्रवाई के लिए तैयार रहें. मंत्रालय ने कहा था, 'अगर ये साबित हो जाता है कि आपके अकाउंट में किसी और का पैसा जमा किया गया है तो ये हरकतें इनकम टैक्स के विचाराधीन बनाई जा सकती हैं.'
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