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राजस्थान: रेप का शिकार हुई बच्ची के लिए भावुक जज ने पढ़ी कविता, 'ओ मेरी नन्ही...'

जज की पढ़ी कविता सोशल मीडिया पर वायरल है. आरोपी को उम्रकैद की सजा हुई है.

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प्रतीकात्मक तस्वीर Unsplash.com से साभार है.

पिछले साल राजस्थान (Rajasthan) के कोटा में एक मदरसे में 6 साल की बच्ची से रेप का मामला सामने आया था. आरोप लगा था मदरसे के मौलवी अब्दुल रहीम पर. इस मामले की सुनवाई पॉक्सो कोर्ट (POCSO) में चल रही थी. मंगलवार 10 मई को इस केस पर कोर्ट का फैसला आ गया. उसने आरोपी अब्दुल रहीम को उम्रकैद की सजा सुनाई है. दिलचस्प बात ये रही कि फैसला सुनाते वक्त जज इमोशनल हो गए और उन्होंने रेप पीड़िता के लिए एक कविता भी पढ़ी.

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फैसले में क्या कहा?

आजतक से जुड़े संजय वर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस दीपक दुबे ने आरोपी मौलवी को आखिरी सांस तक उम्रकैद की सजा सुनाते हुए कहा,

"आरोपी ने धार्मिक शिक्षक जैसे पद पर रहते हुए 6 साल की मासूम को अपनी हवस का शिकार बनाया. उसने न केवल धार्मिक गुरुओं के प्रति आम लोगों की भावनाओं को गंभीर रूप से आहत किया है, बल्कि मासूम पीड़िता के दिमाग पर भी अपने घिनौनी हरकत से ऐसी छाप छोड़ी है जिसे शायद वो जिंदगी भर नहीं भुला पाएगी."

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जज ने पढ़ी कविता

फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश दीपक दुबे काफी भावुक भी हो गए. उन्होंने पीड़िता के लिए कुछ पंक्तियां कहीं जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हैं. पंक्तियां हैं,

'ओ मेरी नन्ही मासूम परी रानी तुम खुश हो जाओ
तुम्हें रूलाने वाले दुष्ट राक्षस को हमने जिंदगी की आखिरी सांस तक के लिए सलाखों के पीछे भेज दिया है
अब तुम इस धरती पर निडर होकर अपने सपनों के खुले आसमान में पंख लगाकर उड़ सकती हो
तुम सदा हंसती रहो, चहकती रहो, बस यही प्रयास है हमारा'

मामला क्या है?

नवंबर 2021 की घटना है. कोटा के दीगोद थाने में 6 साल की बच्ची के साथ मदरसे में बलात्कार होने की शिकायत दर्ज कराई गई थी. FIR के मुताबिक शिकायतकर्ता की बेटी मदरसे में उर्दू पढ़ने जाती थी. एक दिन मदरसे से लौटने के बाद वो काफी रो रही थी. जब परिजनों ने कारण पूछा तो उसने बताया कि उर्दू पढ़ाने वाले मौलवी अब्दुल रहीम ने उसे कमरे में ले जाकर उसके साथ गलत काम किया है. शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की.

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पीड़िता के बयानों के आधार पर पुलिस ने मौलवी को गिरफ्तार कर लिया. उसका पोटेंसी टेस्ट और डीएनए टेस्ट कराया गया. इसमें उसका डीएनए पीड़िता के शरीर से मिले सैंपल से मैच हुआ था. बच्ची की तरफ से केस लड़ रहे विशेष सरकारी वकील ललित शर्मा ने बताया कि कोर्ट में करीब साढ़े 4 महीने तक ट्रायल चला. पुलिस ने कोर्ट में 13 गवाह और 23 दस्तावेज पेश किए. सभी सबूतों के आधार पर आरोपी को न्यायालय ने दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है.

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