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पुलिस ने चालान काटने को रोका और गोली मार दी, पूरी कंट्री में बवाल मचा है

लाइव वीडियो में आदमी मर गया. देह के रंग ने जान ले ली, प्रोटेस्ट हुआ तो बदले में चार पुलिस वाले मार डाले गए.

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फोटो - thelallantop
सुबह फेसबुक खोला. पहली ही पोस्ट दिखी. 13639409_1248396508565386_1658837826_o कैसे किसी का रंग 'काला' होना हमारे लिए मजाक का विषय होता है.
इस बात के लगभग 24 घंटे पहले 32 साल के फिलांडो कैस्टाइल को अमेरिका में गोली मार दी गई. फाल्कन हाइट्स की एक सड़क पर. ये जगह अमेरिका के मिनेसोटा में है. गोली मारी एक पुलिसवाले ने. सड़क पर जांच के लिए रोकने के दौरान. पुलिसवाले ने फिलांडो को रोका. क्योंकि उसकी कार की पिछली लाईट टूटी हुई थी. लाइसेंस दिखाने को कहा. फिलांडो ने उन्हें बताया कि उसके पास लाइसेंसी फायर आर्म है. उसके बाद वो जेब से आईडी निकालने के लिए हाथ बढ़ा रहा था. पुलिस वाले ने सोचा वो बंदूक निकाल रहा है. और उसे गोली मार दी.
पुलिसवाले ने एक नहीं चार फायर किए. उस वक़्त कार में फिलांडो के साथ उसकी गर्लफ्रेंड थी. गर्लफ्रेंड की चार साल की बच्ची भी पिछली सीट पर थी. गोली लगने के ठीक बाद उसकी गर्लफ्रेंड लैविश रेनॉल्ड्स फेसबुक पर लाइव हो गईं. पुलिस अफसर फिलांडो पर बंदूक ताने हुआ था. लैविश से ऐसा सुलूक किया जा रहा था. मानो उनने कितना बड़ा अपराध कर दिया है. लाइव वीडियो के दौरान ही लैविश के बगल में कराहते फिलांडो की जान चली गई.
पुलिसवाले ने उसे गोली क्यों मारी? क्या वो किसी तरह का खतरा था? स्कूल में काम करता था. फिलांडो जे.जे. मांटेसरी स्‍कूल में कैफे‍टेरिया सुपरवाइजर था. जाहिर है. कोई गर्लफ्रेंड और बच्ची को कार में बिठाकर पुलिसवालों पर गोली तो नहीं ही चलाता. पर उसे गोली मार दी गई क्योंकि उसका रंग काला था. वहां 'ब्लैक' लोगों पर शक किया जाता है. जैसे आपके यहां किसी की दाढ़ी देखकर शक किया जाता है. आरोप लगे कि अगर सिर्फ उसकी देह का रंग सफेद होता तो उसके साथ ये कभी नहीं होता. ये कोई पहला मामला नहीं था. फिलांडो 2016 में पुलिस के हाथों मारे जाने वाला 123वां आदमी है. इन 123 लोगों में एक चीज कॉमन थी. उनकी देह का रंग.
इस सबके बाद मिनेसोटा के गवर्नर के घर के बाहर भीड़ इकट्ठी हुई. नो जस्टिस, नो पीस के नारे लगे. मार्क जकरबर्ग तक ये बात पहुंची. उन्होंने फेसबुक पर अपडेट किया. ये कामना की. कि ऐसा वीडियो फिर दुनिया को फेसबुक पर कभी न देखना पड़ जाए. 13639921_1248479558557081_174609813_o अभी लोग इस बात से संभल ही रहे थे जब लूसियाना में अल्टन स्टर्लिंग को दो पुलिस वालों ने गोली मार दी थी. एक स्टोर के बाहर उसे जमीन पर गिराया और इसके पास बंदूक है कहकर गोली मार दी. https://youtu.be/pkGgamy8L7Y पास के दुकानदार ने बताया कि अल्टन के पास भक्ले  बंदूक थी लेकिन पुलिस वाले पहले से ही बहुत अग्रेसिव थे. हालांकि अल्टन के पास बंदूक थी लेकिन न उसने बाहर निकाली. न उसे छुआ. न पुलिस वालों पर हमला किया.
आंकड़ों के हिसाब से अमेरिका की जनसंख्या में 13% अश्वेत हैं. पुलिस के हाथों मारे जाने वालों में अश्वेतों का प्रतिशत 31 है. 100 में से 39 प्रतिशत अश्वेत तब मार दिए गए जब पुलिस से मारे जाने के दौरान उनने पुलिस पर हमला नहीं किया था.
9 अगस्त 2014 को माइकल ब्राउन को पुलिस की गोली से मारे जाने के बाद भी सारे अमेरिका में बहस शुरू हो गई थी. बहस पुलिस की हिंसा की, रंगभेद और न्याय की. चीजें बिगड़ती कैसे हैं. पुलिस की शूटिंग के खिलाफ प्रोटेस्ट चल रहे थे. हिंसा हुई और चार पुलिसवाले मारे गए. हम क्या कर सकते हैं? अगली बार किसी का सिर्फ रंग के चलते मजाक बनाएं तो याद रखिए. आप भी उस भेदभाव और हिंसा के शुरुआती बीज बो रहे हैं. जहां आप किसी को रंग के कारण अपने से नीचा समझते हैं. दुनिया ग्लोबल विलेज हुई पड़ी है. ग्लोबल एक्सपोजर बढ़ रहा है. और ऐसी सोच आने वाले समय में किस तरह की हिंसा का कारण बन सकती है. ज़रा सा मगज का इस्तेमाल कर समझा जा सकता है.

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