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पतंजलि पर ठुका करोड़ों का जुर्माना, एलोपैथी वाले बयान पर भी कोर्ट की लास्ट वॉर्निंग

Patanjali Case: बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि Patanjali ने उसके एक आदेश का उल्लंघन किया है. इधर, दिल्ली हाई कोर्ट ने भी पतंजलि से कुछ दावों को वापस लेने के लिए कहा है.

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Patanjali के प्रमोटर Ramdev. (फाइल फोटो: इंडिया टुडे)

योग गुरु रामदेव की पतंजलि आयुर्वेद पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने 29 जुलाई को एक अंतरिम आदेश का उल्लंघन करने के लिए साढ़े 4 करोड़ रुपये का जुर्माना (Patanjali Fined) लगाया है. इस अंतरिम आदेश में पतंजलि आयुर्वेद को अपने कपूर वाले उत्पाद ना बेचने के लिए कहा गया था. यह पूरा मामला मंगलम ऑर्गेनिक्स के साथ चल रहे ट्रेडमार्क उल्लंघन से जुड़ा है. बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस आर आई चागला ने मंगलम ऑर्गेनिक्स की अंतरिम याचिका पर यह आदेश दिया.

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इससे पहले, कोर्ट ने पिछले साल अगस्त में पतंजलि को अपने कपूर से जुड़े उत्पाद बेचने पर अंतरिम रोक लगाई थी. इस बीच मंगलम आर्गेनिक्स ने कोर्ट में एक अंतरिम याचिका दायर की. इसमें कहा गया कि पतंजलि ने कोर्ट के आदेश का उल्लंघन किया है.

इधर, एक एफिडेविट में पतंजलि ने कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी और भविष्य में कोर्ट के आदेश का पालन करने की बात कही. पतंजलि की तरफ से कोर्ट को बताया गया 24 जून को आदेश पारित होने तक विक्रेताओं को 49 लाख रुपये के प्रोडक्ट्स सप्लाई किए जा चुके थे. यह भी कहा गया कि विक्रेताओं के पास अभी भी 25 लाख रुपये के प्रोडक्ट्स हैं और उनकी बिक्री पर रोक लगा दी गई है.

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इधर, मंगलम ऑर्गेनिक्स की तरफ से कहा गया कि पतंजलि ने अपने कपूर से जुड़े उत्पाद 24 जून के बाद भी बेचे. यहां तक कि 8 जुलाई तक पतंजलि की वेबसाइट पर इन उत्पादों को बिक्री के लिए लिस्ट किया गया था. मंगलम ऑर्गेनिक्स की तरफ से कहा गया कि पतंजलि ने जानबूझकर अपने एफिडेविट में ये जानकारी नहीं दी.

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इससे पहले, इस मामले में 8 जुलाई को सुनवाई हुई थी. कोर्ट ने कहा था कि पतंजलि ने उसके आदेश की अवमानना की है जिसके लिए कंपनी को 50 लाख रुपये जमा करने होंगे. इसके बाद, अब जब 29 जुलाई को इस मामले की सुनवाई हुई तब कोर्ट ने पतंजलि से 4 करोड़ रुपये और जमा करने को कहा.

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इस बीच एक दूसरे मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने पतंजलि से अपने उन दावों को वापस लेने के लिए कहा है, जिनमें कहा गया था कि एलोपैथी डॉक्टर कोविड महामारी के दौरान हुई लाखों मौतों के लिए जिम्मेदार हैं. कोर्ट की तरफ से कहा गया कि अगर पतंजलि और इसके प्रमोटर्स इन दावों के संबंध में किए गए अपने सोशल मीडिया पोस्ट अगले तीन दिन में नहीं हटाते हैं, तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को उनके पोस्ट हटाने के लिए कहा जाएगा.

दिल्ली हाई कोर्ट की तरफ से कहा गया कि कोविड के दौरान एलोपैथिक डॉक्टर्स को लाखों मौतों का जिम्मेदार बताने का पतंजलि का दावा खतरनाक है. कोर्ट की तरफ से ये भी कहा गया कि पतंजलि की तरफ से कोरोनिल को कोरोना का उपचार बताने के दावे से आम लोगों को नुकसान पहुंच सकता है और इससे आयुर्वेद की बदनामी हो सकती है.

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