अपने यहां एक दिन राहुल गांधी या अन्ना हजारे भूख हड़ताल पर बैठ जाएं. सारे 'न्यूज चायनल' वाले टूट पड़ते हैं. 'जी हां आप देख रहे हैं भूख हड़ताल पर सबसे बड़ी कवरेज' टाइप्स. सही भी है. नाम बड़ा हो तो खबर बनने का दकियानूसी ख्याल पुराना है. आम लोगों की पूछ बस चुनावी भाषणों तक रह गई है. जइसे अपने इंडिया में आम बंदे का कोई लोड नहीं लेता. ठीक वैसे ही सरहद पार भी आम लोगों की इंसाफ के लिए वाट लगी रहती है. लेकिन ये खबर इससे भी आगे की है. पाकिस्तान में एक हिंदू बीते साढ़े तीन सालों से भूख हड़ताल पर है. ये कहानी अब की नहीं, 18 साल पहले की है. तब जब हम आप बालक या बालिका थे. उम्र में न सही तो फीलिंग में ही सही. पाकिस्तान के कराची में एक लोअर कास्ट हिंदू फैमिली रहती थी. सब कुछ बहुत अच्छे से चल रहा था. लेकिन फिर हुई एक जालिम मकान मालिक की एंट्री. नाम था अब्दुल रहमान मर्री. इन मर्री साहेब ने घर के नौ लोगों को किडनैप कर लिया मीरपुर जिले के पास से. ये आरोप लगाया है किडनैप होने से बचे घर के इकलौते शख्स मानो भील ने. द ट्रिब्यून एक्सप्रेस के मुताबिक, भील ने कहा, 'मैं गरीब आदमी हूं. लोअर हिंदू कास्ट से बिलॉन्ग करता हूं. मेरी मदद करो. एक ताकतवर मकान मालिक ने मेरे पूरे परिवार को किडनैप कर लिया. मेरे मम्मी-पापा, वाइफ और चार बच्चों को वो उठाकर ले गया था. तब से उनकी कोई खबर नहीं है. कुछ दिन पहले मुझे पता चला था कि मेरी फैमिली के तीन लोगों की मौत हो गई है.'
भील ने कहा, 'फैमिली की खोज की खातिर परेशान भील करीब 1287 दिनों से भूख हड़ताल पर हूं. 18 सालों से मेरे पास घर नहीं है. पुलिस भी इंसाफ नहीं कर रही है. मुझे न्याय नहीं मिल रहा है.'
हां तो जिसका कोई नहीं होता. उसका खुदा होता है यारों. पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ लेबर एजुकेशन एंड रिसर्च (PILER) भील की मदद के लिए आगे आया है. PILER के मुताबिक, पुलिस ने केस को कभी सीरियसली नहीं लिया. साल 2006 में तब के चीफ जस्टिस ऑफ पाकिस्तान इफ्तिखार मोहम्मद चौधरी ने इस केस में नोटिस भी जारी किया था. केस की तारीख मिली. लेकिन आरोपी बंदा हाजिर नहीं हुआ. कहा गया कि किडनैपिंग का केस है. पर तब से लेकर अब तक कुछ नहीं हुआ है. भील ने कई बार कोर्ट के चक्कर लगाए. सिंध कोर्ट में ये केस 2010 से पेंडिंग है. 11 फरवरी को अगली तारीख है.
मानो भील की उस मुल्क में बस इत्ती सी गुजारिश है, 'कुछ भी करके मेरे परिवार से मुझे मिलवा दो.'