पाकिस्तान के सिंध में घोटकी नाम की जगह है. वहीं एक चाचा रहते हैं. सब पुकारते हैं गोकल दास. धर्म से हिंदू हैं. वतन उनका पाकिस्तान है. रोजे चल रहे हैं. शाम को इफ्तार के बाद रोजा खुलता है. अब चूंकि गोकल दास हिंदू हैं तो उन्होंने रोजा नहीं रखा. शुक्रवार शाम जब रोजा खुलने को ही थी, तब गोकल दास ने इफ्तार से पहले रोजा खोल लिया. इस बात से वहां के एक पुलिसवाले अली हसन ने गोकल दास को इतना मारा कि पूरे बदन से खून निकलने लगा. बुरी तरह घायल हो गए.
गोकल दास की किसी ने तस्वीर खींची और सोशल मीडिया पर डाल दी. तस्वीर जैसे-जैसे वायरल होनी शुरू हुई. उस पार के लोग. गौर कीजिएगा, उस पार के लोग गोकल दास के सपोर्ट में आ गए. बोले- ये कतई गलत है. कोई रमजान के पाक महीने में ऐसा कैसा कर सकता है. इस पुलिस वाले को सजा दो. बात इत्ती फैली कि पुलिसवालला अली हसन अब जेल की सलाखों के पीछे है. ये रही तस्वीर देखो.

आरोपी पुलिसवाला अली (फोटो क्रेडिट: हनीफ समून)
पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है. गोकल दास सीनियर सिटीजन हैं. इसलिए वहां इसी को लेकर केस दर्ज हुआ है. ये खबर सिर्फ सोशल मीडिया तक ही नहीं रही. क्यूट बिलावल भुट्टो की बहन बख्तावर अली भुट्टो जरदारी तक भी पहुंची. ट्वीट कर बोलीं- जिस पुलिसवाले ने ये काम किया, वो गिरफ्तार हो चुका है.
https://twitter.com/BakhtawarBZ/status/741629015409238017
गोकल दास की गिरफ्तारी के आदेश जिस अधिकारी ने दिया. उनकी कहानी भी बेहद दिलचस्प है. फेसबुक पर शाहनवाज मलिक ने एक पोस्ट लिखी. हम आपको यहां पढ़ाए दे रहे हैं.
'टांडो मुहम्मद ख़ान पाकिस्तान के सिंध प्रांत का एक ज़िला है. 70 के दशक में यहां दो जिगरी यार अजीज़ ख़्वाजा और सेठ दरयानो मल हुए. ख़्वाजा ज़मींदार थे और सेठ दरयानो मल कारोबारी.
दरयानो के बारे में कहा जाता था कि मदद मांगने वाले को उन्होंने कभी ख़ाली हाथ नहीं लौटाया. वो दिल के शहंशाह थे लेकिन औलाद के मामले में कंगाल. उन्हें बस यही एक शिक़ायत थी, दुनिया और ऊपरवाले से.
फिर एक रोज़ जब ख़्वाजा के घर में बेटा पैदा हुआ तो दरयानो उनकी चौखट पर पहुंच गया. दरयानो बोला कि तेरी तो इतनी औलादें हैं ख़्वाजा. ला, अपना ये बेटा मुझे दे दे...इसे मैं पालूंगा, पढ़ाउंगा और बड़ा आदमी बनाउंगा. ख़्वाजा ने अपना बच्चा तभी एक हिंदू के हवाले कर दिया और दरयानो मल ने उसका नाम रखा अल्लाह दीनो ख़्वाजा.
वायदे के मुताबिक़ दरयानो ने अपने गोद लिए गए बेटे को उम्दा तालीम दी. मशहूर Cadet College Petaro के बाद University of Sindh भेजा. यहां से निकलते ही अल्लाह दीनो ख़्वाजा ने 1986-87 में पाकिस्तान सिविल सर्विसेज़ का एग्ज़ाम दिया. पहली बार में ही विदेश सेवा के लिए चुने गए लेकिन मना कर दिया. ख़्वाजा ने ये कहकर ऑफर ठुकरा दिया कि उन्हें पुलिस में जाना है.
अल्लाह दीनो ख्वाजा
ख़्वाजा पंजाब में बतौर एएसपी और एसपी तैनात हुए लेकिन अपने ही डिपार्टमेंट के लिए काल बन गए. कभी दूधवाले तो कभी सब्ज़ीवाले के भेस में थाने पहुंचते, फिर रिश्वतखोर अफसरों को रंगे हाथ पकड़कर सस्पेंड करते. इस बीच ख़्वाजा जब भी गांव जाते तो अपनी पेशानी दरयानो मल के क़दमों में रख देते. साथ रहने वाला पुलिसबल कभी ख्वाजा को देखता तो कभी दरयानो मल को लेकिन 2011 में सेठ का इंतक़ाल हो गया.
ख़्वाजा दोबारा अपने काम पर लग गए हैं. पुलिसकर्मियों पर उनका क्रैकडाउन जारी है. सोशल मीडिया पर ख़्वाजा के फैंस उनके लिए कई पेज चलाते हैं. पंजाब सरकार ने उन्हें इसी साल मार्च में उन्हें सिंध पुलिस का इंस्पेक्टर जनरल बना दिया है.
ख़्वाजा का ज़िक्र यहां इसलिए क्योंकि उनकी पैदाइश मु्स्लिम के घर में हुई लेकिन परवरिश एक हिंदू ने की. वो मज़हब और जहालत के फर्क़ को ढंग से समझते हैं. जब ये ख़बर आई कि एक सिरफिरे कॉन्सटेबल अली हसन ने एक बुज़ुर्ग हिंदू गोकल दास की पिटाई कर दी है तो उन्होंने ही फ़ौरन कार्रवाई का हुक्म दिया. अली हसन को गिरफ़्तार करके जेल भेज दिया गया है. उन्हीं की बदौलत गोकल दास को इंसाफ मिला और दर-दर भटकना नहीं पड़ा
ख़ैर, अजीज़ ख़्वाजा और सेठ दरयानो मल की तरह ज़िंदगी जीने और याराना निभाने के यही सारे फ़ायदे हैं, बाकी आपलोग देख लीजिए.
















.webp?width=275)



.webp?width=120)



.webp?width=120)
