मैच से पहले बीसीसीआई ने ट्वीट करके इस बात की जानकारी दी थी कि इस मैच में टीम इंडिया पुलवामा अटैक के शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए भारतीय सशस्त्र बलों की कैप पहनेगी और देश की जनता से अपील करेगी कि वो नेशनल डिफेंस फंड में शहीदों के बच्चों की पढ़ाई और देखभाल के लिए ज्यादा से ज्यादा दान करें.
मगर यही बात पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी को अखर गई. इन्होंने कहा कि आईसीसी को इस पर कुछ करना चाहिए. "दुनिया ने इंडियन क्रिकेट टीम को अपनी कैप की जगह आर्मी कैप पहने देखा. क्या आईसीसी को ये नहीं दिखा? हमें लगता है कि ये आईसीसी की जिम्मेदारी है कि वो इस मसले पर खुद एक्शन ले. पीसीबी को ही इसे नोटिस में लाने की जरूरत न पड़े."

कोहली ने कहा है कि लोग शहीदों के लिए ज्यादा से ज्यादा डोनेट करें.
साथ ही पाकिस्तान के इंफोर्मेंशन एंड ब्रॉडकास्ट मिनिस्ट फवाद चौधरी ने भी कहा कि अगर इंडियन टीम को रोका नहीं गया तो पाकिस्तान टीम भी किसी इंटरनेशनल मैच में बाजुओं पर काली पट्टी बांध कर उतरेगी और इंडिया के कश्मीरी लोगों पर अत्याचार को दुनिया के सामने लाएगी. पीसीबी इंडिया के खिलाफ दुनिया के दूसरे देशों को शिकायत भी दे."
मसला ये है कि पाकिस्तान को लग रहा है कि इंडिया इस मामले को क्रिकेट मैदान के जरिए पॉलिटिसाइज कर रहा है. वैसे 2014 में इंग्लैंड के मोइन अली ने सेव गाज़ा और फ्री फिलिस्तीन के रिस्ट बैंड पहनकर टेस्ट मैच खेला था. जिससे मैच के दौरान उतरवा दिया गया था. अब यही बात कहकर पाकिस्तान इस बात की मांग कर रहा है कि कप्तान कोहली और टीम पर कोई एक्शन हो. आईसीसी का कोड ऑफ कंडक्ट कहता है कि प्लेयर्स या टीम ऑफिशियल्स किसी भी तरह का बैंड या दूसरे आइटम्स नहीं पहनेंगे जिससे कोई मैसेज जाता हो. जब तक कि एडवांस में क्रिकेट बोर्ड और आईसीसी से परमिशन न ले ली जाए. राजनीतिक, धार्मिक या नस्लीय गतिविधियों या कार्यों के लिए परमिशन नहीं दी जाएगी.

मगर इसी पर अब ये बहस भी शुरू हो गई है कि क्या किसी देश की नेशनल टीम को अपने देश के किसी भी मसले में साथ खड़े होने का हक नही हैं? इसी पर सीनियर स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट बोरिया मजूमदार ने बड़े मार्के की बात कही है. बोरिया ने लिखा है कि अगर 1968 के मैक्सिको ओलंपिक्स में टॉमी स्मिथ और जॉन कार्लोस के उस कदम को सेलिब्रेट किया जा सकता है जिसमें उन्होंने गंभीर राजनीतिक बयान दिया था, तो अगर इंडियन क्रिकेट टीम आर्मी कैप पहन कर अपने फौजियों का साथ देती है तो इसमें गलत क्या है. खेल हमेशा से राजनीतिक रहा है और हमेशा रहेगा. अगर हम ये कहते हैं कि दोनों मिक्स नहीं हो सकते, तो ये सबसे बड़ा झूठ है." वैसे बता दें कि 1968 में इन दोनों एथलीट्स ने ने ओलंपिक मेडल्स लेते हुए पोडियम पर काले ग्लव्स पहने हाथ खड़े किए थे. दोनों अमेरिका में ब्लैक्स के साथ हो रहे अत्याचार का विरोध कर रहे थे. दोनों का ये कदम दुनिया में चर्चा का विषय बन गया था.

खैर, इंडियन क्रिकेट टीम का ये जेस्चर लोगों को जवानों के लिए डोनेट करने का एक तरीका है. अगर ये गलत है तो फिर ऑस्ट्रेलिया में ग्लेन मैक्ग्राथ फाउंडेशन के लिए टीमों का पिंक कैप्स पहनना या पिंक ग्लव्स लेना भी गलत ही माना जाएगा. इसमें इंडिया का मकसद किसी को टारगेट करना नहीं है और न ही टीम की तरफ से किसी ने कोई स्टेटमेंट इस पर दी है. मगर अब पाकिस्तान है कि उसे हर चीज में इंडिया की राजनीति दिख रही है. वैसे पाकिस्तान ये करके इंडिया से उस कैंपेन का भी बदला ले रहा है जहां उसके खिलाफ वर्ल्ड कप में बॉयकॉट करने का माहौल बन रहा है.






















