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पाकिस्तान के सिंध में पास हुआ हिंदू मैरिज लॉ

पापा का चल रहा था बचपन. साल था 1955. इंडियन हिंदुओं के ब्याह के लिए लॉ बन गया था. लेकिन पड़ोसी मुल्क अब जाकर एक्टिव हुआ है.

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क्रेडिट: Reuters
पापा का चल रहा था बचपन. साल था 1955. इंडियन हिंदुओं के ब्याह के लिए लॉ बन गया था. अब हिंदू सिर्फ इंडिया में तो पाए नहीं जाए जाते हैं. पाकिस्तान में भी हिंदू लोग रहते हैं. लेकिन उस पार के हिंदुओं के ब्याह के लिए कानून अब तक नहीं था. पर ज्यादा लोड मत लीजिए. 67 साल पुराना इंतजार खत्म होने को है. पाकिस्तान के पास जल्द अपना हिंदू मैरिज लॉ होगा. पाकिस्तान के प्रांत सिंध की असेंबली ने हिंदू लॉ बिल को अपनी मंजूरी दे दी है. याद रहे सिंध में लाखों हिंदू रहते हैं. पाकिस्तान में हिंदुओं के लिए स्पेशल मैरिज एक्ट-2015 कानून बनने को फुल टू रेडी है. सालों से लटके इस बिल को संसद के पैनल ने अपनी मंजूरी दे दी है. पांच हिंदू लॉ मेकर्स को बुलाकर बिल का फाइनल ड्राफट तैयार कर लिया गया है. काम बस इत्ता रहता है कि पाकिस्तान की नेशनल असेंबली को चर्चा बहस करनी है. ठीक वैसी ही, जैसे हमारे यहां लोकसभा-राज्यसभा में होती है न. वैसे ही. सब कुछ अलग हो सकता है. पर नेता इस दुनिया में एक जैसे ही पाए जाते हैं. यानी कुछ विरोधी भी हैं उधर इस बिल के. पर समर्थक ज्यादा हैं. नवाज शरीफ की पाकिस्तान मुस्लिम लीग (N) इस बिल की समर्थक है. माना जा रहा है कि जब बिल पर चर्चा होगी कि तो नवाज शरीफ की पार्टी पूरा समर्थन देगी इस बिल को. बेनजीर भुट्टो वाली 'पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी' भी इस बिल की सपोर्टर है. इन्ही दो पार्टियों के दो बंदे हुए. पीपीपी के रमेश लाल और पाकिस्तान मुस्लिम लीग (N) के डॉ दर्शन ने हिंदू मैरिज बिल को 2014 और 2015 में असेंबली में प्राइवेट बिल की तरह पेश किया था. बिल के आने से होगा क्या? 1. पाकिस्तान में जो हिंदू लौंडे और लौंडिया हैं. उनकी शादी की मिनिमम उम्र 18 साल फिक्स कर दी जाएगी. 2. हिंदुओं को शादी ब्याह को लेकर कानून रहेगा. ताकि सही गलत या तलाक के मौकों पर फैसला लिया जा सके. 3. अगर पाकिस्तान में रहने वाला कोई हिंदू किसी बच्चे को गोद लेना चाहता है तो इसे लेकर कोई कानून नहीं है उधर. अब इस लॉ के आने से आसानी रहेगी. 4. तलाक के बाद अगर कोई हिंदू बंदा या बंदी शादी करना चाहता है, तो इस कानून के आने से उनके लिए भी जुगाड़ का इंतजाम पक्का समझो. कुछ लफड़ा है क्या? हां है न. कुछ नेता उधर सवाल उठा रहे हैं बिल को लेकर. कहते हैं, 'अगर पति या पत्नी में से किसी ने इस्लाम कबूल लिया तो ऐसे केस में हिंदू शादी का क्या होगा. बोले तो कानून किसका माना जाएगा.' उधर संसदीय कमेटी के चेयरमैन हैं महमूद बशीर विर्क. एक बड़ी काम की बात बोल गए. हिंदू कानून में अब तक हुई देरी को लेकर सबसे सही बात कही है बशीर साहेब ने. बोले,
'कानून को लाने में देरी हम मुसलमानों और खासकर नेताओं के लिए ठीक नहीं था. हमारी जिम्मेदारी थी कि हम जल्दी कानून बनाएं. न कि इसमें रुकावट डालें. अगर 99 पर्सेंट आबादी को एक पर्सेंट वाली आबादी से डर लगता है तो हम सबको अपने भीतर झांकने की जरूरत है कि हम क्या दावा करते हैं और हम क्या हैं.'

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