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पूर्व सैनिक रामकिशन ग्रेवाल के सुसाइड पर इन 6 सवालों के जवाब कौन देगा

रामकिशन की मौत पर राजनीति शुरू हो गई है, लेकिन इन सवालों का जवाब अब तक किसी के पास नहीं है.

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फोटो - thelallantop

OROP के मसले पर मंगलवार को खुदकुशी करने वाले पूर्व सैनिक रामकिशन ग्रेवाल अपनी मौत के पीछे ढेर सारे सवाल छोड़ गए. पहली नजर में ये मामला सरकार के खिलाफ जाता दिख रहा था, लेकिन जैसे-जैसे इसकी परतें खुल रही हैं, उससे लग रहा है कि ये महज भावनाओं में लिया गया फैसला नहीं है. बुधवार की शाम रामकिशन की अपने बेटे के साथ बातचीत का जो ऑडियो आया, उससे मामला बेहद संदेहास्पद हो गया. इसके बाद खुद आर्मी चीफ रहे वीके सिंह ने भी कुछ ऐसे सवाल उठाए, जो रामकिशन के फैसले पर सवाल खड़े कर रहे हैं. आइए देखते हैं.

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# क्या रामकिशन ने सिर्फ पांच हजार के लिए खुदकुशी कर ली

6 सितंबर, 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वन रैंक वन पेंशन (OROP) स्कीम लॉन्च की थी, लेकिन सेना से रिटायर हो चुके सैनिक इसके नियमों से पूरी तरह खुश नहीं थे. उनकी मांग है कि एक रैंक पर रिटायर होने वाले सभी सैनिकों को एक जैसी पेंशन मिलनी चाहिए, भले उनकी सर्विस के साल कम-ज्यादा हों.

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रामकिशन लगभग तीन दशक तक सेना में रहे और वो 2004 में रिटायर हुए थे. नई स्कीम के कैलकुलेशन के हिसाब से ग्रेवाल को महीने में 28 हजार रुपए की पेंशन मिलनी थी, लेकिन कुछ मिसकैलकुलेशन की वजह से उन्हें 23 हजार रुपए मिल रहे थे. तो क्या ये मान लिया जाए कि 23 हजार रुपए मिलने के बावजूद रामकिशन ने महज पांच हजार रुपयों के लिए खुदकुशी कर ली. सेना में जवान रह चुके एक शख्स को अपनी जिंदगी इतनी सस्ती लग रही थी?

# पंगा बैंक का था, तो सवाल सरकार पर क्यों

रामकिशन की पेंशन में जो बढ़ोतरी हुई थी, वो उन्हें नहीं मिल रही थी. रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक इसके लिए बैंक जिम्मेदार था, क्योंकि मिसकैलकुलेशन बैंक की तरफ से ही हुई थी. सवाल उठता है कि अपनी कम पेंशन के बारे में रामकिशन ने क्या इसके लिए जिम्मेदार डिपार्टमेंट से बात की थी? जबकि बताया यही जा रहा है कि डिपार्टमेंट की तरफ से उनकी पेंशन बढ़ा दी गई थी. रक्षा विभाग के सूत्रों का कहना है कि कई ऐसे रिटायर्ड सैनिक थे, जिनके साथ रामकिशन जैसी ही समस्या थी, लेकिन उन्होंने डिपार्टमेंट से बात की और उनकी प्रॉब्लम सॉल्व हो गई.

# क्या कहना है वीके सिंह का ram-kishan-grewal

2004 में रिटायरमेंट के समय ग्रेवाल की सैलरी 14 हजार रुपए थी. अगले महीने से उन्हें 6500 रुपए की पेंशन मिलने लगी थी. लेकिन, छठा वेतन आयोग लागू होने और कांग्रेस द्वारा OROP की कुछ शर्तें माने जाने के बाद ग्रेवाल और उनके जैसे हजारों सैनिकों की पेंशन लगभग चार गुना तक बढ़ गई थी. वीके सिंह का कहना है कि अभी OROP का मामला रेड्डी कमीशन देख रहा है और एनडीए सरकार इस दिशा में लगातार काम कर रही है. ऐसे में कोई सैनिक ऐसा कैसे सोच सकता है कि उसकी मांगों पर बात नहीं की जाएगी.

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# 31 अक्टूबर को रिक्वेस्ट लिखने के बाद भी खुदकुशी क्यों

रामकिशन खुदकुशी करने से 3 दिन पहले घर से निकले थे. घर पर बोलकर गए थे कि दिल्ली जा रहे हैं OROP का मुद्दा उठाने. जंतर-मंतर पर धरने के समय उनके पास एक चिट्ठी थी, जो 31 अक्टूबर को लिखी गई थी. ये चिट्ठी रक्षामंत्री के नाम थी, जो ग्रेवाल उन्हें देने वाले थे. लेकिन अगले ही दिन ग्रेवाल ने खुदकुशी कर ली. सवाल उठता है कि जब उन्होंने एक दिन पहले ही चिट्ठी लिखी थी और उसे रक्षामंत्री को देने वाले थे, तो उन्होंने अगले ही दिन खुदकुशी कैसे कर ली. जब वो सारे काम तर्कों के साथ कर रहे थे, तो अचानक ये ऐसा फैसला कैसे ले लिया.

# चिट्ठी को ही बना दिया सुसाइड नोट suicide-note

रामकिशन की रक्षामंत्री के नाम लिखी गई चिट्ठी ही सुसाइड नोट की तरह सामने आई. उसी चिट्ठी के नीचे रामकिशन ने लिखा था, 'मैं मेरे देश के लिए, मेरी मातृभूमि के लिए एवं मेरे देश के वीर जवानों के लिए अपने प्राणों को न्योछावर कर रहा हूं.' ऐसे में इस बात का भी कोई पुख्ता सबूत नहीं है कि खुदकुशी की बात खुद उन्होंने ही लिखी थी या किसी और ने.

# बेटे से बात करते समय साथ में कौन बोल रहा था https://www.youtube.com/watch?v=UcMsx5luV7g

बुधवार की शाम रामकिशन और उनके बेटे प्रदीप के फोन पर आखिरी बात का कॉल रिकॉर्ड सामने आया. इसमें वो अपने बेटे को जहर खाने की बात बता रहे हैं. इस दौरान पीछे से कोई उन्हें बताता जाता है कि क्या बात कहनी है. ऑडियो से शक होता है कि इन लोगों की जानकारी में रामकिशन ने जहर खाया रहा होगा और अब उनके कहने पर ही वो अपने बेटे से बात कर रहे थे.

पढ़ें: OROP के लिए सुसाइड करने वाले फ़ौजी ने जहर खाने के पांच मिनट बाद किया था आखिरी कॉल

रामकिशन ग्रेवाल मर गए. कैसे मरे और क्यों मरे, इस पर राजनीति होगी. लेकिन सच सिर्फ इतना ही है कि एक पूर्व सैनिक इस तरह मर गया.


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