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यूपी में भी कोरोना संकट के दौरान 'ऑक्सीजन की कमी से कोई नहीं मरा', ऐसा सरकार ने कहा है

हालांकि एक इंटरव्यू में स्वास्थ्य मंत्री ने माना था कि ऑक्सीजन की कमी से लोग मरे हैं.

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बाईं तस्वीर प्रतीकात्मक है. दाईं तस्वीर स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह की है. (साभार- इंडिया टुडे)

कोरोना की दूसरी लहर के दौरान किसी कोविड मरीज की मौत ऑक्सीजन की कमी से नहीं हुई.

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ऐसा लगता है कि देशभर की सरकारों में ये दावा करने की होड़ लग गई है. गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, बिहार, मध्य प्रदेश, गोवा जैसे राज्यों के बाद अब उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने कहा है कि कोरोना की दूसरी लहर में हजारों लोग मारे गए, लेकिन ऑक्सीजन की कमी से कोई नहीं मरा.

विपक्ष का सवाल, सरकार का जवाब

दरअसल गुरुवार 16 दिसंबर को यूपी विधान परिषद में कांग्रेस सदस्य दीपक सिंह ने सरकार से ये सवाल पूछा था,
"कई मंत्रियों ने पत्र लिखकर कहा कि राज्य में ऑक्सीजन की कमी से मौतें हो रही हैं. कई सांसदों ने भी ऐसी शिकायतें की थीं. ऑक्सीजन की कमी से मौत की कई घटनाएं सामने आई थीं. क्या इसकी कोई जानकारी सरकार के पास है? क्या सरकार ने गंगा में बहती हुई लाशों और ऑक्सीजन की कमी से पीड़ित लोगों को नहीं देखा है?”
प्रश्नकाल के दौरान इसका जवाब देते हुए यूपी के स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह ने कहा,
''राज्य में दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की कमी से किसी की मौत की खबर नहीं है.''
जय प्रताप सिंह ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि अस्पताल में भर्ती मरीज की मौत होने पर डॉक्टर मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करता है. उन्होंने कहा कि राज्य में कोरोना पीड़ितों के लिए डॉक्टरों द्वारा जारी किए गए 22 हजार 915 मृत्यु प्रमाणपत्रों में कहीं भी 'ऑक्सीजन की कमी के कारण मृत्यु' का कोई उल्लेख नहीं है.
मंत्री ने कहा कि महामारी के दौरान कई कोरोना मरीजों की मौत पहले से हुई बीमारियों के कारण हुई. जय प्रताप सिंह ने दावा किया कि जहां ज़रूरत पड़ी सरकार ने दूसरे राज्यों से ऑक्सीजन की व्यवस्था की थी.

स्वास्थ्य मंत्री ने खुद कबूल की थी सच्चाई

यूपी सरकार ने विधान परिषद में बयान देकर पल्ला भले झाड़ लिया लेकिन इससे पहले उसने स्वीकार किया था कि ऑक्सीजन की कमी के कारण कई कोरोना मरीजों की मौत हुई है. खुद स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह ने ये सच्चाई कबूल की थी. मई 2021 में बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में कोरोना संकट से निपटने के प्रबंधन पर बात करते हुए जय प्रताप सिंह ने कहा था,
आईसीओ बेड जो हैं हमारे पास, वो विदाउट ऑक्सीजन हैं. विदाउट ऑक्सीजन बेड कोई चाहता नहीं है. आदमी चाहता है कि ऑक्सीजन वाला बेड ही चाहिए. इसलिए हमने हर दिन संसाधन बढ़ाए. हमने कम से कम 18 हजार बेड्स बढ़ाए हैं. उसी बीच जो 20 दिन का समय था, जब हम पर सबसे अधिक लोड पड़ा, तब हमको काफी तकलीफ हुई थी. तब भी हम पूरा प्रयास करते थे कि कोई पेशंट बाहर ना रहे. भले उसे स्ट्रेचर पर लेटना पड़े, लेकिन उसे उपचार मिले. ये हम लोगों का पूरा प्रयास था. और इस बात को हम मानते थे कि ऑक्सीजन की किल्लत की वजह से घर के अंदर कई लोगों की मौत हुई.

बीजेपी विधायक ने बताई थी जमीनी हकीकत

राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के अलावा बीजेपी के विधायक लोकेन्द्र प्रताप सिंह ने भी अपने इलाके में ऑक्सीजन की कमी से लोगों के मरने की बात कही थी. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लिखी चिट्ठी में उन्होंने कहा था,
'लखीमपुर जनपद में आक्सीजन की अत्यधिक कमी है और आक्सीजन की कमी से ही लोग अत्यधिक मर रहे हैं. हम चाह कर भी अपने लोगों को नहीं बचा पा रहे हैं.'
लोकेन्द्र प्रताप सिंह
लोकेन्द्र प्रताप सिंह की मुख्यमंत्री योगी को चिट्ठी

इसके अलावा इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी ऑक्सीजन की कमी पर कड़ा रुख अपनाया था. 4 मई को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ऑक्सीजन की कमी से मौत को आपराधिक कृत्य बताते हुए कहा था कि ये नरसंहार से कम नहीं है.

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