कश्मीर सिर्फ पंडितों का नहीं मुसलमानों का भी छूटा था
दिल्ली के अलावा, पुणे, बेंगलुरु, गोवा और कोच्चि में बसना पड़ा, अब वापस नहीं लौटना चाहते.
Advertisement

Source- Reuters
1990 के समय जब कश्मीर में आतंकवाद बढ़ा और कश्मीरी पंडितों को मारा गया. तब सिर्फ कश्मीरी पंडितों को ही नहीं, मुसलमानों को भी कश्मीर छोड़ना पड़ा था. कश्मीर में हिंसा के बाद मुसलमानों को भी कश्मीर रहने के लिए सेफ नहीं लगता था. ऐसी कई मुस्लिम फैमिलीज हैं जो उस वक़्त कश्मीर छोड़कर देश के दूसरे हिस्सों में बस गईं. दसियों हजार मुसलमान तो गोवा जा बसे. कई पुणे में और कई बेंगलुरु में. कोच्चि के मट्टनचेरी में भी चालीस के लगभग परिवार हैंडीक्राफ्ट के काम में लगे हैं, ये लोग भी कश्मीर से आए हैं. टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, ये लोग वापस कश्मीर नहीं लौटना चाहते. कहते हैं वहां उथल-पुथल और बेरोजगारी है. इन्हीं में से एक मोहम्मद अशरफ कहते हैं. 'अगर जम्मू-कश्मीर के लोगों को तरक्की चाहिए तो लोगों को लड़ना बंद करना होगा, आजादी के बाद उन्हें क्या मिलेगा? क्या नौकरियां मिल जाएंगी? अगर हम इंडिया से अलग हो भी गए तो कच्चा माल कहां से आएगा? इंडिया से' बेंगलुरु और पुणे जैसी जगहें जहां आईटी का बोलबाला है वहां भी कश्मीर छोड़कर आए लोग खूब नजर आते हैं. ऐसे 500 से ज्यादा परिवार बेंगलुरु में हैं. इनमें पढ़े-लिखे मुस्लिमों की संख्या ज्यादा है.
Add Lallantop as a Trusted Source

Advertisement
Advertisement
Advertisement












.webp?width=275)









