क्रिसमस का त्योहार आ चुका है. पूरी दुनिया में ये त्योहार धूम-धान से मनाया जा रहा है. इस बीच सैंटा क्लॉज़ (Santa Claus) की भी खूब चर्चा है. अमेरिका और कनाडा का एक संस्थान है NORAD. पूरा नाम North American Aerospace Defense Command. NORAD ने हर बार की तरह इस बार भी क्रिसमस ईव यानी क्रिसमस की पूर्व संध्या पर सैंटा क्लॉज़ को ट्रैक करने के लिए एक वेबसाइट जारी कर दी है. इस वेबसाइट पर जाएं तो ये पता लगता है कि सैंटा क्लॉ़ज (Santa Claus Tracker) कहां पहुंचे हैं? उन्होंने अबतक कितने गिफ्ट्स बांट दिए? और उनका अगला पड़ाव कहां होगा? साल 1955 में एक इश्तिहार में गलत नंबर के छपने से शुरु हुई ये प्रथा आज भी जारी.
नॉर्थ पोल से निकले सैंटा ठीक इतने बजे आपके घर पहुंचेंगे, पल-पल की अपडेट यहां है
Santa Claus Tracker: 1955 से Santa Claus को ट्रैक करने की प्रथा को NORAD आजतक निभा रहा है.


सैंटा क्लॉ़ज को ट्रैक करने की कहानी शुरू हुई साल 1955 में. उस समय NORAD को Continental Air Defense Command के नाम से जाना जाता था. इसका हेडक्वार्टर कोलोराडो स्प्रिंग्स के पीटरसन स्पेस फ़ोर्स बेस है. हुआ ये कि इस साल एक अमेरिकी कंपनी Sears Roebuck and Company ने अखबार में इश्तिहार दिया. ये इश्तिहार कोलोराडो के शहर कोलोराडो स्प्रिंग्स में बिकता था. इश्तिहार में बच्चों से अपील की गई कि वो सैंटा क्लॉ़ज से डायरेक्ट फोन पर बात करें.
लेकिन इस इश्तिहार में एक गड़बड़ी हो गई. हुआ ये कि अखबार की प्रिंटिंग में एक गलती हुई और जो फोन नंबर सैंटा का था, उसकी जगह NORAD का नंबर छप गया. जो कॉल नॉर्थ पोल पर सैंटा को लगनी थी, वो लग गई Continental Air Defense Command को. वहां एयरफोर्स के कर्नल Harry Shoup ने इमरजेंसी लाइन पर आ रहा कॉल रिसीव की.
जल्द ही कर्नल को समझ आ गया कि किसी तरह की कन्फ्यूजन की वजह से ये कॉल उनके पास आई है. लिहाजा वो बच्चे से सैंटा क्लॉ़ज जैसी आवाज बनाकर बात करने लगे. प्रिंटिंग की एक गलती की वजह से शुरू हुई बातचीत एक प्यारी सी कहानी में बदल गई. कर्नल ने अपने स्टाफ को आदेश दिया कि सैंटा क्लॉ़ज को उनके रडार मैप्स पर ट्रैक किया जाए. और तब से ये प्रथा आज तक चली आ रही है. क्रिसमस ईव पर हर साल NORAD सैंटा ट्रैकर के जरिये लोगों को उनकी लोकेशन की जानकारी देता है.
जब ये प्रथा शुरू हुई तब अमेरिका और सोवियत संघ के बीच शीत युद्ध (Cold War) चल रहा था. सैंटा पर अपडेट देने के साथ-साथ कर्नल शौप ने इसका इस्तेमाल अपनी फौज और लोगों के मनोबल को बढ़ाने के लिए किया. 1955 में जब ये कहानी पहली बार सामने आई तब कर्नल शौप ने फोन करने वाले बच्चे को आश्ववस्त किया कि सैंटा को अमेरिका तक सेफ पैसेज दिया जाएगा. उन्होंने इसमें ह्यूमर डालने के लिए एक कहानी बनाई जिसमें कहा कि वो सैंटा को उन संभावित हमलों से भी बचाएंगे जो उन पर हो सकते हैं. क्रिसमस में विश्वास न करने वाले लोग सैंटा पर हमले कर सकते हैं.
आज की कहानीNORAD के एक कर्नल की ये पहल इतनी पॉपुलर हुई कि आज भी हर साल लगभग एक लाख बच्चे फोन कर सैंटा की लोकेशन पूछते हैं. NORAD इसके लिए एक सैटेलाइट का इस्तेमाल कर सैंटा की लोकेशन बताता है. इसकी वेबसाइट पर जाकर इसे देखा जा सकता है. आज के दौर में जब सैंटा का व्यावसायिक इस्तेमाल भी खूब हो रहा है, बावजूद इसके ये प्रथा आजतक लोकप्रिय है. 9 भाषाओं वाली NORAD की इस वेबसाइट को लाखों लोग ऑनलाइन फॉलो करते हैं.

कई सारी चुनौतियां जैसे सरकार की ओर से रोक के बीच भी कई लोग इस प्रथा को जीवित रखने के लिए हर साल वालंटियर करते हैं. अब इस प्रथा को कायम रखने के लिए एक वेबसाइट, सोशल मीडिया हैंडल और एप भी है. एयर फोर्स की तरफ से इस प्रोग्राम की देखरेख करने वाले लेफ्टिनेंट कर्नल केस कनिंघम कहते हैं
कैसे काम करता है ट्रैकर?"ये बस परिवारों और बच्चों को खुशियां देने के लिए है."
ये ट्रैकर सैंटा को ट्रैक करने के लिए रडार और सैटेलाइट्स का इस्तेमाल करता है. NORAD के मुताबिक ये वही रडार और सैटेलाइट्स हैं जिनका इस्तेमाल पूरे नॉर्थ अमेरिका को किसी संभावित खतरे से बचाने के लिए किया जाता है. जब सैंटा नॉर्थ पोल से निकलते हैं, उसी समय से NORAD उन्हें ट्रैक करना शुरू करता है. लोग NORAD को फोन करके भी सैंटा की लोकेशन की जानकारी ले सकते हैं. उन्हें सिर्फ 877-HI-NORAD(1-877-446-6723) पर फोन करके ये पूछना है कि सैंटा की लोकेशन क्या है? अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के लोग भी फोन उठाकर जवाब देने में मदद करते हैं. और कभी-कभी तो खुद अमेरिका के राष्ट्रपति और उनकी पत्नी भी कॉल पर लोगों का जवाब देती है.
NORAD के मुताबिक, सैंटा हर साल अपनी यात्रा एक निश्चित दिन शुरू करते हैं. वो अपनी यात्रा पूर्व से पश्चिम दिशा की ओर शुरू करते हैं. ऐतिहासिक तौर पर सैंटा पहले साउथ पैसिफिक के देशों में जाते हैं. उसके बाद वो न्यूज़ीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, एशिया, अफ्रीका, यूरोप, नॉर्थ अमेरिका, सेन्ट्रल अमेरिका और फिर साउथ अमेरिका जाते हैं. NORAD का कहना है कि खराब मौसम की वजह से सैंटा की यात्रा बाधित भी हो सकती है. NORAD सैंटा के एल्फ लॉन्च स्टाफ से बात कर उनके लॉन्च टाइम को कन्फर्म करता है. पर उसके बाद से कब कहां जाना है, ये सैंटा खुद तय करते हैं.
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