अपने धर्म की 'शान' बचाने के लिए कुछ भी किया जा सकता है. 16 साल के लड़के को बेरहमी से मारा जा सकता है. विस्फोट किया जा सकता है या किसी बुजुर्ग को उसके घर में घुसकर क़त्ल किया जा सकता है. मकसद धर्म की 'हिफ़ाजत' करना है. इंसानियत, मोहब्बत या अमन-चैन को बचाकर क्या करेंगे. देश की आबोहवा कुछ ऐसा ही कह रही है. असम के तिनसुकिया जिले की हिन्दू महिला ने एक मुस्लिम से शादी कर ली थी. 1 जुलाई को उसने आत्महत्या कर ली. उसका पति अंतिम संस्कार के लिए श्मशान पहुंचा तो लोगों ने उसके साथ मारपीट की. लोगों ने उसे कब्रिस्तान में भी दफ़न नहीं करने दिया. महिला ने शनिवार को आत्महत्या की थी. रविवार तक उसकी लाश अंतिम संस्कार के लिए रखी रही. सोमवार (3 जुलाई) को पुलिस ने मामले में दखल दिया. फिर महिला के माता-पिता की मदद से हिन्दू रीति-रिवाज के साथ उसका दाह-संस्कार किया गया. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक 23 साल की तुलसीदास, तिनसुकिया के परबतिया इलाके में रहती थी. करीब एक महीने पहले 27 साल के बिट्टू अली के साथ उसकी शादी हुई थी. हालांकि बिट्टू के पास कोई निकाहनामा नहीं है. तिनसुकिया के एसपी मुग्धाज्योति देव महंता के अनुसार जब बिट्टू अली तुलसीदास का शव लेकर कब्रिस्तान गए तो उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया. इसके बाद वो शव लेकर श्मशान स्थल गए, लेकिन वहां भी उन्हें दाह-संस्कार की इजाज़त नहीं मिली. मुग्धाज्योति देव ने बताया कि,
'हिन्दू श्मशान में बीवी का शव ले जाने की कोशिश करने पर अली के साथ मारपीट भी की गई, लेकिन इसकी कोई शिकायत हमें नहीं मिली है.'
नहीं पता चली आत्महत्या की वजह
महिला ने आत्महत्या क्यों की, इसकी वजह अब तक पता नहीं चली है. एसपी महंता के मुताबिक आत्महत्या की वजह पति-पत्नी का झगड़ा नहीं लगती. अली ने भी झगड़े से इनकार किया है. साथ ही तुलसी के माता-पिता ने भी कोई शिकायत नहीं की है. पुलिस के अनुसार तुलसीदास के शव का पोस्टमार्टम हो चुका है, लेकिन रिपोर्ट आनी बाकी है.
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