'हम पानी के अंदर गए तो मंजर देखकर हैरान रह गए. एक महिला फंसी हुई थीं. जब उनका हाथ खींचा तो वो बाहर नहीं आ पा रही थीं. ध्यान से देखा तो उनके हाथों में बच्चा सिमटा हुआ था. वो हाथों की पकड़ से बच्चे को छोड़ ही नहीं रही थीं.' ये शब्द उन डाइवर्स के हैं जो जबलपुर क्रूज हादसे के बाद लोगों को रेस्क्यू करने में जुटे हुए हैं.
'वो बच्चे को छोड़ ही नहीं रही थीं', गोताखोरों ने बताया क्रूज हादसे का मंजर
Madhya Pradesh Cruise Accident: जबलपुर क्रूज दुर्घटना के बाद लोग क्रूज मेंबर्स पर आरोप लगा रहे हैं. कह रहे हैं कि उन्हें बीच में जाने से बताया गया था कि तूफान आने वाला है. फिर भी वे यात्रियों को लेकर गए. वहीं, जीवित बचे लोग अब उस खौफनाक मंजर को याद कर रहे हैं.


मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बचाव में लगे एक कर्मी ने बताया कि पानी के अंदर जाना और काम करना बहुत कठिन हो गया था. क्रूज बोट पूरी तरह उल्टी पड़ी थी. पानी के अंदर विजिबिलिटी बहुत कम थी और कुछ भी साफ़ दिखाई ना देने की वजह से बचाव कार्य में मुश्किलें आ रहीं थीं.
बचाव कर्मियों ने बताया, “वहां जगह बहुत कम थी और लोहे की नुकीली कीलें मौजूद थीं. इस वजह से हमें हथौड़ों का इस्तेमाल कर संकरे रास्ते बनाने पड़े. इस दौरान एक गोताखोर उसमें ही फंस गया था.”
उनका कहना है,
“नाव का स्ट्रक्चर दोनों तरफ से पूरी तरह टूट गया था और अंदर की ग्रिल की वजह से रास्ते पतले हो गए थे. इन मुश्किलों के साथ टीम ने अब तक पांच शव निकाले हैं. इन शवों में ही वो मां और बच्चा भी थे. मलबे से महिला का शव निकालने में हमें सबसे ज्यादा मुश्किल हुई. देखा तो महिला ने अपने बच्चे को कसकर पकड़ रखा था और उन्हें अलग करना मुश्किल था. हमारी टीम इस दृश्य को देखकर भावुक हो गई.”
बता दें कि क्रूज पर इस महिला के साथ उनकी 8 साल की बेटी, पति और अन्य परिवारवाले भी मौजूद थे. परिवार के 6 लोगों में से 3 की मौत हो गई है. हादसे में बची महिला की बेटी ने बताया,
"एकदम से बाढ़ आ गई थी और शिप के अंदर पानी भर गया था. इसके बाद क्रूज पलट गया. मुझे मेरे पापा मिल गए थे तो मैंने उनका हाथ पकड़ लिया."
बता दें कि मृतक अपने परिवार के साथ रिश्तेदार के गृह प्रवेश में शामिल होने गई थीं. प्रोग्राम ख़त्म करने के बाद वो घूमने के लिए डैम के पास गए और क्रूज पर बैठे. जिसके बाद ये हादसा हो गया. मौत से पहले महिला ने परिजनों से फोन पर बात की थी.
मृतक की रिश्तेदार ने बताया,
“मैरिना फोन पर थी. जब शिप डूबा नहीं था. वो वीडियो दिखा रहे थे. सब एंजॉय कर रहे था. बहुत अच्छा माहौल था. 5 बजे मैं बेटे को छोड़कर वापस आया, तो मेरी पत्नी बहुत तेज चिल्लाई. मैंने पूछा क्या हुआ? तो कहने लगी कि उसने (मैरिना) ने कहा कि प्रार्थना करो हमारे लिए. शिप डूब रहा है. सिर्फ इतना बोला, फिर फोन कर रहे हैं, तो कोई उठा नहीं रहा.”
मृतक की एक अन्य परिजन ने बताया,
सेफ्टी कुछ भी नहीं दी. मेरे ब्रदर इन लॉ ने लाइव जैकेट फेंक कर दी और कहा कि लो बचो. मेरी सिस्टर इन लॉ थी, उनका 4 साल का बेटा था. उसमें ही उसको फंसाया था. सेट करने के लिए कि बचो किसी तरह से. गांव वालों ने क्रूज वालों से कहा था कि तूफान आने वाला है. बीच में मत लेकर जाओ. मेरे परिवार के तीन लोग चले गए.
परिवार का आरोप है कि यात्रियों ने कई बार बोला कि तूफान आ रहा है. क्रूज रोक लो, लेकिन उन्होंने नहीं रोका. वहीं क्रूज डूबने के बाद भी गांववाले उनकी मदद के लिए आगे आए. प्रशासन की तरफ से मदद मिलने में बहुत देर हो गई.
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