जाहिर बात है कि खुशी इन सब चीजों के बिना भी हमारी सभ्यता ने हजारों सालों से सेलिब्रेट की है. यहां तक कि जब से सृष्टि बनी है तब से. जब हम कपड़े नहीं पहनते थे तब से. ये पार्टी सॉन्ग दरअसल पार्टी कल्चर के इर्द-गिर्द करोड़ों रूपये से ज्यादा के कारोबार को खड़ा करने के औजार रहे हैं. यंग लोग नाचने और मस्ती करने में ही बिजी रहे और इस ओर कभी ध्यान नहीं दिया. धीरे-धीरे इतने पार्टी सॉन्ग फिल्मों में भी ठूंसे गए कि हमारा अंत ले लिया.
इस बीच एक बड़ा अप्रभावी सा वीडियो सॉन्ग आया है जिसमें कुछ खास नहीं है लेकिन ये खास है कि इसमें उन सब स्टीरियोटाइप्स के उलट पार्टी सॉन्ग खड़ा किया गया है जिन्होंने सेलिब्रेशन को कंज्यूमरिस्ट बना दिया था. इस गाने में परफॉर्मर पार्टी फ्रूट जूस के साथ करता है. उसकी कई सारी विशेषताएं हैं.
कह सकते हैं कि वो पहला संस्कारी रैपर है. उसके इस गाने के बोल हैंः
हाथ में दारू नहीं जूस का ग्लास बंदा हूं मैं सीधा साधा इतनी सी बात बंदी पटी थी इन टेंथ क्लास उसके बाद सब बकवासये रैपर हैं श्रेय खन्ना. उन्होंने 2013 में स्टार प्लस का रिएलिटी शो 'इंडियाज डांसिंग स्टार' जीता. डायरेक्टर रेमो डिसूजा की फिल्म 'एबीसीडी' में भी नजर आए. फिर टी-सीरीज ने उन्हें लेकर 2015 में 'नखरा वखरा' सिंगल लॉन्च किया. इसमें श्रेय ही सिंगर और परफॉर्मर थे. अब इनका सिंगल 'हाथ में दारू नहीं' आया है लेकिन इससे पहले ये अति-भौतिकतावादी गाने बनाने वाले हनी सिंह के लाइव शो भी कोरियोग्राफ कर चुके हैं.
सोचा था ऐसा गाना बनाऊंगा दारू और बंदी बीच में न लाऊंगा ब्रेकअप पार्टी पे सबको बुलाऊंगा दारू और चिकन नहीं मंगवाऊंगा
आज कल स्वाइप से बनते हैं रिश्ते शादीशुदा भी हैं टिंडर पे दिखते फेसबुक पे स्टेटस बड़े प्यारे प्यारे लिखते मुझे तो आप में रब हैं दिखते

श्रेय खन्ना
संस्कारी रैपः दारू नहीं पीना, नॉन-वेज नहीं खाना
इस नए सिंगल की सबसे कमजोर बात वही है जो इसका अट्रैक्शन है. ये एेसा पार्टी सॉन्ग है जो कंज्यूमरिस्ट नहीं है लेकिन ये संस्कारों का ठप्पा प्रमोट करता है जो दकियानूसी है. सीधी भाषा में कहें तो दारू पीना कोई बुरी बात नहीं है. नॉन-वेज खाना भी बुरा नहीं है. तो आप ये सब करके भले नहीं हो जाते.इसके अलावा इस सिंगल में हीरो खुद को बाल-ब्रह्मचारी भी कहता है. तो जो ब्रह्मचारी नहीं हैं और कामेच्छाओं वाले हैं वे बुरे नहीं हो जाते.
पॉजिटिव यही है कि पार्टी सॉन्ग्स के स्टीरियोटाइप्स तोड़ने जरूरी थे जो श्रेय का सिंगल करता है. क्योंकि हनी सिंह और उनसे प्रेरणा लेकर कुकुरमुत्तों की तरह उगे रैपर्स ने कुछ भी गाया. कभी नहीं सोचा क्या गा रहे हैं और वे उसी समाज में रहते हैं जिस पर इसका बुरा असर हो सकता है. ध्यान रहे, हनी सिंह वही हैं जिन पर 'बलात्कारी' गाना गाने का आरोप लगा था. एेसा एक गाना इंटरनेट पर वायरल हुआ था जिसमें बलात्कार को ग्लैमराइज़ किया गया था. बाद में कोर्ट में केस भी हुआ.
हनी के एक से बढ़कर एक गाने रहे हैं.
जैसे कि ये रैप जो शाब्दिक रेप से कम नहीं हैः
बस कर ये जलवे न दिखा, ये सब तो मैं देख चुका, तुझ जैसी तो पट जाती हैं फिर दुर्घटना घट जाती है.
अब यहां सामने वाली युवती नहीं रह जाती है, चीज बन जाती है. यूज़ एंड थ्रो वाली कोई निर्जीव वस्तु. टिश्यू पेपर. ये गाना 2012 में 'हाई हील्स' नाम से आया था. हर पार्टी में लूप में रहता था. हैरत तो इस बात की थी कि लड़कियां भी बिना इन पंक्तियों का अर्थ जाने नाचती थीं.
एक ये गाना देखें. ये गाना पुराने ज़माने की विधवा प्रथा की याद दिलाता सा लगता है. जब कोई औरत विधवा हो जाती तो साल भर उसे कमरे से बाहर निकलने की अनुमति नहीं थी. पूरी जिंदगी उसे सफेद या काले रंग के कपड़े पहनने होते थे. उसे मनोरंजन, हंसने-खेलने, सजने की इजाजत नहीं थी. चाहे वो बाल उम्र में ही विधवा हो गई हो. मरने तक उसकी जिदंगी मर जाती थी. इस गाने में हनी सिंह रैप में कहते हैंः












