लैटिन अमेरिकी देश वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस के साथ अमेरिका ने पकड़ लिया है. ये बात 2 और 3 जनवरी के बीच वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले के बाद डॉनल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बताई है. मादुरो और ट्रंप के बीच लंबे समय से तनातनी चल रही थी. नवंबर में ट्रंप ने मादुरो को अल्टिमेटम दिया था कि वह सत्ता छोड़ दें लेकिन उनके इस ऑफर को मादुरो ने ठुकरा दिया था. अब वही मादुरो ट्रंप की सेना के कब्जे में हैं.
निकोलस मादुरो: बस की ड्राइविंग सीट से वेनेजुएला के 'सिंहासन' तक पहुंचने वाला शख्स
23 नवंबर, 1962 को वेनेजुएला की राजधानी काराकस के एक मजदूर परिवार में जन्में निकोलस मादुरो बस चलाते थे. बाद में वह मेट्रो यूनियन के नेता के तौर पर पहली बार राजनीति में आए. ये 1990 के दशक की बात है.


निकोलस मादुरो एक दशक से ज्यादा समय से वेनेजुएला की सत्ता पर काबिज हैं. वह अपने पूर्ववर्ती ह्यूगो शावेज के निधन के बाद वेनेजुएला के राष्ट्रपति बने और तब से लगातार तमाम विवादों और विरोध के बावजूद इस पद पर बने हैं.
23 नवंबर, 1962 को वेनेजुएला की राजधानी काराकस के एक मजदूर परिवार में जन्में निकोलस मादुरो बस चलाते थे. बाद में वह मेट्रो यूनियन के नेता के तौर पर पहली बार राजनीति में आए. ये 1990 के दशक की बात है. ये वही समय है, जब ह्यूगो शावेज नाम के एक सैन्य अधिकारी ने साल 1992 में देश में तख्तापलट की कोशिश की थी.
इस कोशिश में शावेज को जेल हुई और उनकी गिरफ्तारी के विरोध में मादुरो ने बड़ा अभियान चलाया और उन्हें जेल से रिहा भी कराया. इस दौरान वह अपने नेता ह्यूगो शावेज के वामपंथी विचारधारा के एक महत्वपूर्ण ध्वजवाहक के तौर पर उभरे.

वेनेजुएला में वामपंथी राजनीतिक आंदोलन के दौर में मादुरो, शावेज के करीबी और बड़े सहयोगी के रूप में उभरकर सामने आए. बाद में शावेज ने अपनी एक नई पार्टी बनाई, जिसका नाम रखा 'फिफ्थ रिपब्लिक मूवमेंट'. इस पार्टी को बनाने में मादुरो ने भी शावेज की मदद की थी.

शावेज के हाथ में वेनेजुएला की कमान साल 1999 में आई. सत्ता में आने के बाद उन्होंने मादुरो को भी संसद के स्पीकर के तौर पर चुन लिया. बाद में उन्हें विदेश मंत्री बनाया गया. साल 2012 में मादुरो वेनेजुएला के उपराष्ट्रपति बने. शावेज 1999 से लेकर 2013 तक वेनेजुएला के राष्ट्रपति पद पर बने रहे. इस दौरान 5 मार्च 2013 को उनकी मौत हो गई लेकिन जीवित रहते ही उन्होंने अपने उत्तराधिकारी के तौर पर मादुरो को चुन लिया था.
शावेज की मौत के बाद मादुरो ने वेनेजुएला के अंतरिम राष्ट्रपति का पद संभाला. बाद में देश में राष्ट्रपति का चुनाव हुआ और कड़ी मशक्कत से उन्होंने इस चुनाव में जीत हासिल की. उन पर चुनाव में धोखाधड़ी के आरोप भी लगे.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, मादुरो के कार्यकाल में देश की अर्थव्यवस्था बुरी तरह से चरमरा गई. महंगाई से जनता परेशान थी. भोजन और दवाओं की लगातार कमी बनी थी. इसी दौरान वेनेजुएला के नागरिकों का बड़े पैमाने पर पलायन हुआ. उनके शासनकाल में चुनावों में धांधली और विरोध प्रदर्शनों पर कठोर दमन के आरोप भी लगे. खासकर 2014 और 2017 के चुनावों में.
मादुरो की वेनेजुएला में सत्ता की राह इतनी आसान नहीं थी. उनके शासन के शुरुआती दौर में उन्हें कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा. इसमें प्रतिबंध, आर्थिक पतन, देश में बड़े पैमाने पर विरोध और अंतरराष्ट्रीय अलगाव जैसी बड़ी समस्याएं उनके सामने आईं. राष्ट्रपति मादुरो को लंबे समय से अमेरिका और उसके सहयोगियों की ओर चुनौतियां दी जाती रहीं. इसमें चुनावी हेरफेर, मानवाधिकार का हनन और नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े आरोप उन पर लगते रहे.
वेनेजुएला और अमेरिका के बीच तल्खी भरा संबंध लंबे समय से रहा है. अमेरिका ने साल 2020 में औपचारिक रूप से मादुरो पर गंभीर आरोप लगाए. साल 2025 में ही वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो को ‘नोबेल शांति पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया, जिसने वेनेजुएला की मादुरो सरकार के बर्ताव की ओर दुनियाभर के देशों का ध्यान खींचा.

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द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प ने अपने दूसरे कार्यकाल की कमान संभालने के बाद से ही वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो को सीधे निशाने पर ले लिया. उन्होंने मादुरो पर अमेरिका में अस्थिरता फैलाने वाली गतिविधियों का आरोप लगाया.
इनमें नशीले पदार्थों की तस्करी का आरोप शामिल है. जुलाई 2025 में अमेरिका ने मादुरो के सिर पर 50 मिलियन डॉलर यानी 4.50 अरब रुपये का इनाम घोषित किया. साथ ही उन्हें दुनिया के सबसे बड़े नशीले पदार्थों के तस्करों में से एक होने का आरोप लगाया.

इस दौरान ट्रंप ने 'ट्रेन डी अरागुआ' जैसे वेनेजुएला के गिरोहों को आतंकवादी संगठन घोषित किया. इसके अलावा कैरेबियन सागर में कथित मादक पदार्थों के तस्करों के खिलाफ एयर स्ट्राइक भी किए. साथ ही अमेरिका ने वेनेजुएला के तेल से भरे टैंकरों को जब्त करना शुरू कर दिया. इसके अलावा दक्षिण अमेरिकी देश के आसपास के समुद्री क्षेत्रों में अपनी सेना को बढ़ा दिया.
ट्रम्प ने वेनेजुएला में सत्ता को बदलने के विचार का खुले तौर पर समर्थन किया है. नवंबर, 2025 के अंत में, ट्रंप ने मादुरो को सत्ता छोड़ने की धमकी देते हुए देश से सुरक्षित बाहर निकलने का प्रस्ताव दिया. लेकिन मादुरो ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया. मादुरो ने वेनेजुएला में अपने समर्थकों से कहा कि वह 'गुलामी की शांति' नहीं चाहते हैं. साथ ही उन्होंने अमेरिका पर अपने देश के तेल भंडार पर नियंत्रण करने की इच्छा का आरोप भी लगाया.
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