ग्रुप के लोगों का कहना है कि गइया केवल दूध देने के लिए नहीं होती. उसके गोबर और सूसू से बन सकता है शैम्पू, टूथपेस्ट, अगरबत्ती और साबुन जैसी चीजें. और तो और इन प्रोडक्ट्स को बनाने वालों को रोजगार भी मिलता है. इसलिए वो जब दूध देना बंद कर दे, उसे बूचड़खाने में नहीं बेचना चाहिए. ग्रुप की मानें तो उनका मकसद सिर्फ गायों ही नहीं, दूसरे जानवरों पर हो रहे अत्याचार को भी रोकना है. अत्याचार तो कुछ महीनों पहले भी हुआ था. 'बीफ' के नाम पर. खैर आप 'गोमाता' के साथ अपनी सेल्फी अपलोड करिए और लाइक्स पाइए.













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