इतनी ट्रोलिंग हुई कि NYT ने अपना वो ट्वीट डिलीट कर दिया. उस स्टोरी की हेडिंग भी बदली. इसमें अटैक को बॉम्बिंग लिखा.
इस खबर के अंदर लिखा है कि एक समय बेहद मजबूत स्थिति में रहे नरेंद्र मोदी कुछ दिनों पहले कमजोर हालत में लग रहे थे. मगर पुलवामा में हुए 'बम धमाके' और इसके बाद पाकिस्तान के साथ बढ़े तनाव ने उन्हें फायदा पहुंचाया है.

ये है New York Times के उस ट्वीट का स्क्रीनशॉट.
कितना दोहरापन है ट्रोलिंग अलग बात है. मगर ये सवाल जायज है. क्या NYT 9/11 को प्लेन क्रैश लिख सकता है? नहीं. अमेरिका के लिए ये हमला उनके अस्तित्व पर हमला था. उन्होंने इस अटैक के बाद रिऐक्ट भी ऐसे ही किया. इसके पीछे अल-कायदा का हाथ था. वो छुपा था अफगानिस्तान में. तो अमेरिका ने अफगानिस्तान पर हमला कर दिया. पूरा देश बर्बाद कर दिया. 2001 से 2019 आ गया. मगर अफगानिस्तान की बर्बादी पर फुलस्टॉप नहीं लगा है अब तक. इस अटैक में मारे गए लोगों की कुल संख्या थी 2,996. इनमें हाइजैकर्स भी शामिल थे. अमेरिका के लिए 9/11 बहुत भावुक, बहुत दर्द वाला जिक्र है. होना भी चाहिए. सबको तकलीफ होनी चाहिए निर्दोषों के मरने पर. मगर ये क्या बात हुई. खुद पर आए, तो आतंकवाद पर नो टॉलरेंस. मगर दूसरे देशों की बात हो, तो आतंकवादी हमले को 'ब्लास्ट' कहकर सिंपलीफाई कर दो!

ये अपडेट होने के बाद वाली स्टोरी है. एक्सप्लोज़न की जगह बॉम्बिंग लिख दिया गया है.
आतंकी हमले को हमला कहने में क्यों दिक्कत है? पुलवामा हमले में CRPF के 40 जवान मारे गए. इसके बाद भारत ने बालाकोट में एयर स्ट्राइक की. इसमें भारत ने जितने आतंकियों को मारने का दावा किया है, उस पर सवाल उठे हैं. इंटरनैशनल मीडिया ने कई खबरें की हैं इसपर. ये सवाल समझ आते हैं. मगर एक टेरर अटैक को अटैक बोलने में झिझक हो, ये कतई समझ नहीं आता.
बालाकोट स्ट्राइक का एयरफोर्स ने दिया सॉलिड प्रूफ
बालाकोट में आतंकियों के मरने के आंकड़े पर आया पीएम मोदी और राहुल गांधी का जवाब























