टिम कुक इंडिया आए. उनका सारा ध्यान इस बात पर था कि कैसे यहां अपने पुराने और सस्ते आईफोन खपा सकें यहां आते ही उनकी आंखें खुल गई. जब गफ्फार मार्केट में 1100 में Eye-Phone बिकते देखा. टिम कुक ने ये भी जाना कि उनकी तकनीक पिछड़ी है. उन्हें लौटकर ये सीखना है कि कैसे चोरी हुए आईफोन को नीचे से खोलकर उसमें तीन हजार की मशीनरी लगा, पकड़े जाने से बच सकते हैं.
गुड़गांव के एक एप्पल स्टोर में उन्हें नकली आईफोन कवर बिकता मिला. वो भड़के, पर ये कह कर संभाल लिया गया कि यहां फिर भी महंगा बेच रहे हैं, इंदौर के नॉवेल्टी मार्केट में यही कवर 120 में मिलता है.
कुक भारत से लौटेंगे तो कंपनी के शीर्ष अधिकारियों से एक मीटिंग करने वाले हैं. आने के पहले जो मीटिंग करी थी उसमें पता लगा था कि उनका फायदा घट रहा है. अब न घटेगा, तमाम बोर्ड मेंबर्स को उनने सुबह-शाम साईंबाबा वाला मैसेज फॉरवर्ड करना शुरू जो कर दिया है. सिद्धिविनायक में मनौती मां आए हैं. भारत के बाजारों में घुसने का उन्हें एक और नुस्खा भी मिल गया है. वो तृप्ति देसाई की मदद ले सकते हैं. वो किसी को कहीं भी प्रवेश करा सकती हैं. यही तो अच्छी बात है.
टिम कुक आने वाले दिनों में आईफोन में जो बदलाव करने वाले हैं, उसमें से कुछ हमें पता लगे हैं.
कुक, प्रधानमंत्री से मिले. उनने मेक इन इंडिया के तहत आईफोन बनवाने की बात कही कुक मान गए हैं. इसी क्रम में अगली बार से आईफोन में पतली पिन वाला चार्जर लगा करेगा. इंडिया में हर किसी के पास वो आसानी से मिल जाता है. उसके बिना आईफोन सफल नहीं है.
ट्रेनों में आईफोन चार्ज नहीं होते. कई बार चार्जिंग पॉइंट पर चार्जर काम ही नहीं करता. कुक की पहली प्राथमिकता आईफोन चार्जर को भारतीय रेलों के काबिल बनाने की होगी.
कुक इयरफोन में भी बदलाव करने वाले हैं, ऐसे महंगे फोन का भी क्या फायदा जिसमें 30 रूपए वाला इयरफोन न लगे.
आईफोन इंडिया में रखने से ज्यादा दिखाने की चीज होते हैं. भारत के लिए भेजे जाने वाले तमाम फ़ोनों में आईफोन का लोगो बड़ा होगा, ताकि बाथरूम में ली गई सेल्फी में साफ़-साफ़ नजर आए.
आईफोन के फॉन्ट्स भी बड़े होंगे. उन लोगों की सुविधा के लिए जो बस-ट्रेन में बगल में बैठ हमें चैट करते हुए पढ़ना चाहते हैं. साथ ही आईफोन में टॉर्च, जनरेटर, रोटी मेकर, और पूड़ी अचार रख ले जाने के लिए एक खंधा भी होगा. इतने पैसे खर्च करने के बाद हम भारतीय इतनी सुविधा तो चाहते ही हैं.