जैसा कि अपेक्षित था, आम आदमी पार्टी गुजरात में भी एक चहरे के साथ उतर रही है. चुनाव आयोग द्वारा तारीखों के ऐलान के अगले ही दिन इसूदान गढ़वी के नाम की घोषण हो गई. इससे पहले आम आदमी पार्टी ने दिल्ली, पंजाब, उत्तराखंड और गोवा में भी सीएम फेस की घोषणा की थी. अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान तो चुनाव जीतकर मुख्यमंत्री बने. लेकिन अमित पालेकर और कर्नल अजय कोठियाल अपनी सीट भी नहीं जीत पाए. कर्नल कोठियाल ने तो पार्टी से इस्तीफा भी दे दिया है.
जानिए इसूदान गढ़वी आम आदमी पार्टी और गुजरात की राजनीति के गणित में कहां फिट होते हैं
दिल्ली, पंजाब, गोवा और उत्तराखंड की राजनीति के अपने अलहदा समीकरण हैं.


दिल्ली, पंजाब, गोवा और उत्तराखंड की राजनीति के अपने अलहदा समीकरण हैं. इसलिए इन चार उदाहरणों के आधार पर किसी तरह का स्ट्राइक रेट निकालना जल्दबाज़ी हो सकती है. फिलहाल हम इस बारे में बात कर सकते हैं कि इसूदान गढ़वी आम आदमी पार्टी और गुजरात की राजनीति के गणित में कहां फिट होते हैं. आम आदमी पार्टी दावा कर रही है, कि गुजरात में भाजपा को असली मुकाबला वही दे रही है. ऐसे में इस बात की भी थाह लेनी होगी कि क्या आम आदमी पार्टी गुजरात के मुकाबले को इसूदान बनाम भूपेंद्र पटेल होने देगी, या फिर केजरीवाल बनाम मोदी वाले नैरेटिव पर ही चलेगी, जो ज़्यादा कैची है.
इसूदान गढ़वी आम आदमी पार्टी में नेशनल जॉइंट जनरल सेक्रेट्री हैं. माने राष्ट्रीय स्तर के अतिरिक्त महासचिव. आम आदमी पार्टी ने लोगों से सीएम फेस पर राय मांगी थी. पार्टी का कहना है कि रायशुमारी में 40 वर्षीय इसूदान 73 फीसदी लोगों की पसंद थे. आज से पहले तक उनकी यात्रा क्या थी, इस बारे में भी आपको सामान्य जानकारी दे देते हैं. वो गुजरात के द्वारका ज़िले में पड़ने वाले पीपलिया गांव से आते हैं. पिता खेरजभाई का परिवार खेती करता था. लेकिन अभाव नहीं था. शुरुआती पढ़ाई के बाद इसूदान कॉलेज के लिए जामनगर गए. फिर अहमदाबाद से पत्रकारिता की पढ़ाई की. पहले वो दूरदर्शन पर योजना नाम के कार्यक्रम में नज़र आए. इसके बाद निजी समाचार चैनलों में काम किया, सूबे के चैनल हेड के पद तक पहुंचे. डांग ज़िले में पेड़ों की अवैध कटाई में हुए 150 करोड़ के घोटाले पर उनकी रिपोर्टिंग को खूब चर्चा मिली थी. वैसे गुजरात में जिन्होंने इसूदान को टीवी पर देखा है, उनमें से ज़्यादातर उन्हें महामंथन नाम के प्रोग्राम के लिए जानते हैं.
जून 2021 में अरविंद केजरीवाल अहमदाबाद आए, तब इसूदान आम आदमी पार्टी में विधिवत रूप से शामिल हुए. दोनों को मिलाने में गोपाल इटालिया की भूमिका बताई जाती है. इसके बाद इसूदान सक्रिय हुए. दिसंबर 2021 में गुजरात में पेपर लीक का विरोध दर्ज कराने आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता गांधीनगर स्थित सूबे के भाजपा मुख्यालय पहुंचे. तब इसूदान भी इनके साथ थे. भाजपा ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी कार्यकर्ताओं ने बदतमीज़ी की. इसूदान पर भी कथित रूप से शराब पीकर महिलाओं से अभद्र व्यवहार किया. लेकिन पुलिस जांच में शराब की मात्रा नगण्य मिली. तब इसूदान ने कहा था कि वो लाई डिटेक्टर टेस्ट कराने को भी तैयार हैं, क्योंकि उनकी कोई गलती है ही नहीं. फिर मई 2022 में जब आम आदमी पार्टी ने गुजरात में परिवर्तन यात्राएं निकालनी शुरू कीं, तो उनमें भी इसूदान को देखा गया.
गुजरात के वोटबैंक में सबसे बड़ा हिस्सा ओबीसी समाज का है. और इसूदान इसी समाज से ताल्लुक रखते हैं. तो पार्टी ने चहरे के साथ जाति का गणित भी साधने की कोशिश की है. इसूदान के नाम के ऐलान पर सत्ताधारी भाजपा ने क्या प्रतिक्रिया दी. कयास लगाए जा रहे हैं कि इसूदान अपने गृहनगर खंबालिया से ही विधानसभा चुनाव का पर्चा भरेंगे. दी लल्लनटॉप पर आप जल्द इसूदान गढ़वी का विस्तृत इंटर्वू देखेंगे, जिसमें हमारे साथी अभिनव ने उनसे हर तरह के सवाल पूछे हैं. मसलन अगर आम आदमी पार्टी जाति की राजनीति नहीं करती, तो फिर वो अपने वंश की बात क्यों करते हैं. और अगर आम आदमी पार्टी वाकई भाजपा को अपना कॉम्पटीशन मानती है, तो ब्रैंड मोदी पर टिप्पणी करने से क्यों बचती है. तो इंतज़ार कीजिए.
दी लल्लनटॉप शो: गुजरात इलेक्शन में AAP CM फेस इसूदान गढ़वी कितने कामयाब हो पाएंगे?












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