नेपाल में बालेंद्र शाह के प्रधानमंत्री बनते ही बड़ी कार्रवाई देखने को मिली. शनिवार, 28 मार्च को पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक को भी पुलिस ने पकड़ा है. यह कार्रवाई सितंबर 2025 में हुए Gen Z प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और मौतों के मामले में की गई है. इसी प्रदर्शन के बाद ओली सरकार को सत्ता छोड़नी पड़ी थी.
नेपाल में पूर्व PM ओली गिरफ्तार, पूर्व गृह मंत्री भी पकड़े गए, बालेंद्र शाह के प्रधानमंत्री बनते ही एक्शन
Nepal KP Sharma Oli Arrested: जांच आयोग ने सिफारिश की थी कि पूर्व PM केपी शर्मा ओली, पूर्व गृह मंत्री Ramesh Lekhak के खिलाफ राष्ट्रीय दंड संहिता की धारा 181 और 182 के तहत मामला चलाया जाना चाहिए. इन धाराओं में आपराधिक लापरवाही का आरोप शामिल है.


इंडिया टुडे से जुड़े पंकज दास की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों नेताओं को भक्तपुर स्थित उनके घरों से हिरासत में लिया गया. इस मामले में उन पर ऐसे कानूनों के तहत आरोप लग सकते हैं, जिनमें 10 साल तक की सजा हो सकती है.
गृह मंत्रालय की आधिकारिक शिकायत के बाद जांच हुई, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई. एक जांच आयोग ने दोनों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की थी. इस आयोग का नेतृत्व पूर्व स्पेशल कोर्ट जज गौरी बहादुर कार्की ने किया था. आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा इंतजाम में गंभीर लापरवाही हुई, जिसके कारण कई लोगों की जान गई.
द काठमांडू पोस्ट की खबर के मुताबिक, नए प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में आयोग की सिफारिशों को लागू करने का फैसला लिया गया. इसके बाद ही पुलिस ने कार्रवाई शुरू की. गिरफ्तारी से पहले काठमांडू घाटी में सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी. पुलिस ने कार्रवाई से पहले कानून मंत्रालय से लिखित इजाजत भी ली थी.
रिपोर्ट में कहा गया है कि केपी शर्मा ओली, रमेश लेखक और उस समय के पुलिस प्रमुख चंद्र कुबेर खापुंग के खिलाफ राष्ट्रीय दंड संहिता की धारा 181 और 182 के तहत मामला चलाया जाना चाहिए. इन धाराओं में आपराधिक लापरवाही का आरोप शामिल है.
इसके अलावा कई अन्य अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की सिफारिश की गई. इनमें तत्कालीन गृह सचिव गोकरण मणि दवाडी, सशस्त्र पुलिस बल (APF) के प्रमुख राजु अर्याल, राष्ट्रीय जांच विभाग के पूर्व प्रमुख हुताराज थापा और काठमांडू के मुख्य जिला अधिकारी छवि रिजाल शामिल हैं.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुछ अधिकारियों को केवल आधिकारिक फटकार पड़नी चाहिए. अगर ऐसा हुआ, तो उनके आगामी प्रमोशन पर असर पड़ सकता है. इनमें मौजूदा पुलिस प्रमुख दान बहादुर कार्की और APF अधिकारी नारायण दत्ता पौडेल का नाम शामिल है.
जांच में यह सामने आया कि अधिकारियों को पहले से हिंसा बढ़ने की जानकारी थी, लेकिन समय पर सही कदम नहीं उठाए गए. इसी वजह से प्रदर्शन के दौरान 77 लोगों की मौत हो गई और अरबों रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ.
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