प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार वक्फ अधिनियम में संशोधन करने की तैयारी में है. सूत्रों के मुताबिक 2 अगस्त को कैबिनेट ने वक्फ अधिनियम में 40 संशोधनों को मंजूरी दे दी है. इन संशोधनों के पारित होने के बाद वक्फ बोर्ड की शक्तियां सीमित हो जाएंगी. इन सूत्रों के मुताबिक इन संशोधनों का उद्देश्य किसी भी संपत्ति को वक्फ संपत्ति के रूप में नामित करने के वक्फ बोर्ड के अधिकार को बैन करना है. इसके अलावा संशोधनों का एक उद्देश्य केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य बोर्ड में महिलाओं को प्रतिनिधित्व देना भी बताया जा रहा है.
वक्फ एक्ट में सरकार क्या बदलने जा रही? जिसे सुन ओवैसी, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड विरोध करने लगे
केंद्र सरकार वक्फ बोर्ड में संशोधन के लिए नया बिल लाने की तैयारी में है. लेकिन संसद में पेश होने से पहले ही इस बिल को लेकर सवाल उठने शुरू हो गए हैं. AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी सहित मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इस पर सवाल उठाए हैं.
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आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, अब वक्फ बोर्ड किसी संपत्ति पर दावा करेगा तो उसके दावे की जांच की जाएगी. इसके लिए नए बिल में एक प्रक्रिया तैयार की गई है. वक्फ अधिनियम में संशोधन का यह बिल इसी हफ्ते संसद में पेश किए जाने की संभावना है. लेकिन संसद में पेश होने से पहले ही इस बिल को लेकर सवाल उठने शुरू हो गए हैं. AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने इसको लेकर सरकार पर निशाना साधा है.
औवैसी ने कहा,
वक्फ एक्ट में यह संशोधन वक्फ की संपत्तियों को छीनने के इरादे से किया जा रहा है. यह संविधान द्वारा दिए गए धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार पर हमला है. RSS की मंशा शुरू से ही वक्फ की संपत्तियों को छीनने की रही है.
वक्फ अधिनियम में होने वाले संशोधन पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. AIMPLB के सदस्य मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने कहा,
हमारे पास पहले से ही वक्फ अधिनियम 1995 है. और फिर 2013 में भी इसमें कुछ संशोधन किए गए थे. हमें नहीं लगता कि इस अधिनियम में किसी भी तरह के संशोधन की जरूरत है. यदि सरकार को लगता है कि संशोधन की जरूरत है तो पहले इसके शेयरहोल्डर्स से सलाह-मशविरा करना चाहिए. और उनकी राय जाननी चाहिए. सभी को यह ध्यान रखना चाहिए कि वक्फ संपत्तियों का लगभग 60 से सत्तर प्रतिशत हिस्सा मस्जिदों, दरगाहों और कब्रिस्तान के रूप में है.
वक्फ अधिनियम में संशोधन की संभावना पर इतिहासकार एस इरफान हबीब ने कहा कि सवाल सरकार की नीयत पर है कि कहीं वह वक्फ की जमीनों को हड़पना तो नहीं चाहती. उन्होंने आगे कहा कि अगर कोई कानून आ रहा है, तो अच्छे के लिए आना चाहिए. और जैसी बातें चल रही हैं, महिलाओं को भी इसका हिस्सा होना चाहिए.
वक्फ अधिनियम में केंद्र सरकार के प्रस्तावित संशोधन पर दूसरी राजनीतिक पार्टियों की भी प्रतिक्रिया सामने आई हैं. जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा,
वक्फ एक्ट में संशोधन के लिए प्रस्तावित बिल का प्रारूप क्या है ये देखना होगा. बिहार में नीतीश कुमार ने वक्फ की संपत्ति के मैनेजमेंट के लिए जरूरी कदम उठाए हैं. वक्फ की संपत्ति पर हॉस्टल, शॉपिंग मॉल से लेकर यतीमखाना तक बनवाया गया है. हमें उम्मीद है कि केंद्र सरकार बिहार के वक्फ मॉडल पर काम करेगी.
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वहीं राजद प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने इसको लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि सरकार की निगाह कहीं और निशाना कहीं और है. किसी धर्म विशेष को टारगेट करना और विवादित मुद्दों को उठाना ये केंद्र सरकार की नीति है ताकि असली मुद्दों पर चर्चा न हो.
वक्फ बोर्ड लगभग 8,70,000 संपत्तियों की देखभाल करता है. जो लगभग 9,40,000 एकड़ में फैली हुई हैं. साल 2013 में यूपीए सरकार ने मूल वक्फ अधिनियम, 1995 में संशोधन करके वक्फ बोर्ड के अधिकारों को मजबूत किया था.
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