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म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन शुरू, कई देशों के नेता जुटे, क्या अब खत्म हो जाएगी रूस-यूक्रेन जंग?

Munich security conference 2025: जर्मनी में म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन ऐसे वक्त हो रहा है, जब अमेरिका में डॉनल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाली नयी सरकार ने सत्ता संभाली है और अगले सप्ताह जर्मनी में संसदीय चुनाव होने वाले हैं. क्या बड़ा फैसला हो सकता है इस सम्मेलन में?

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रूस यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने पर म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में होगी चर्चा. (तस्वीर:AFP)

वैश्विक सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं पर चर्चा करने के लिए दुनिया भर के नेताओं का जुटान जर्मनी के म्यूनिख शहर में चल रहा है. कार्यक्रम का नाम है म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन (MSC). इसमें अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की समेत दुनिया के 60 अन्य नेता अगले तीन दिनों तक शिरकत करेंगे. यह सम्मेलन ऐसे वक्त हो रहा है जब अमेरिका में डॉनल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाली नयी सरकार ने सत्ता संभाली है और अगले सप्ताह जर्मनी में संसदीय चुनाव होने वाले हैं.

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अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस ने दी यूरोप को नसीहत

इस बार MSC 14-16 फरवरी तक म्यूनिख के होटल बायरिशर हॉफ में आयोजित किया जा रहा है. कार्यक्रम के पहले दिन अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने अपनी बात जनता के सामने रखी. उन्होंने अमेरिकी विदेश नीति में चल रहे बदलावों के बीच ‘नाटो’ में शामिल देशों से अपने डिफेंस बजट को बढ़ाने की गुजारिश की. नाटो यानी उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन, ये एक राजनीतिक और सैन्य गठबंधन है. इसमें अमेरिका, ब्रिटेन, तुर्की समेत दुनिया के 32 देश शामिल हैं.

वेंस ने MSC में कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कर दिया है कि हमारे यूरोपीय मित्र देशों को इस महाद्वीप के भविष्य में एक बड़ी भूमिका निभानी चाहिए.”

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अमेरिकी मीडिया संस्थान Scripps के मुताबिक, उपराष्ट्रपति की स्पीच के दौरान यूरोपीय नेताओं के बीच मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं. जे़डी वेंस ने यूरोप को रूस के बजाय मीडिया पर लगाम, फेक न्यूज और माइग्रेशन के मुद्दों पर भी ध्यान देने को कहा. उन्होंने बोला, “इस महाद्वीप में किसी भी मतदाता ने अप्रवासियों को पनाह देने के मुद्दे पर वोट नहीं दिया होगा. लेकिन क्या आप जानते हैं कि उन्होंने किस मुद्दे पर वोट दिए? वोटर्स ने इंग्लैंड में ‘ब्रेक्सिट’ के लिए वोट डाले. उन्होंने उन नेताओं के पक्ष में वोट डाले जिन्होंने माइग्रेशन के मुद्दे को समाप्त करने का वादा किया था.”

यूक्रेन रूस युद्ध को सुलझाने पर होगी चर्चा

न्यूज एजेंसी AP की रिपोर्ट के मुताबिक, MSC में रूस और यूक्रेन के बीच तीन साल से चल रही जंग को समाप्त करने पर बात हो सकती है. इसकी संभावना प्रबल इसलिए है क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से कुछ दिन पहले ही इस मुद्दे पर बात की थी. 

रिपोर्ट की मानें तो जेडी वेंस इस सम्मेलन के दौरान यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की से मिलेंगे. मुलाकात में उम्मीद है कि युद्ध समाप्त करने के लिए बातचीत के जरिए समाधान निकाला जाएगा. जर्मनी के राष्ट्रपति फ्रैंक-वाल्टर स्टीनमीयर ने सम्मेलन में कहा है कि हर कोई चाहता है कि रूस-यूक्रेन युद्ध समाप्त हो.

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क्या है म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन?

हर साल बंसत के आगमन के साथ ही अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा नीति के मसले पर चर्चा करने के लिए जर्मनी में ‘म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन’ का आयोजन किया जाता है. MSC की स्थापना एक जर्मन अधिकारी और पब्लिशर इवाल्ड-हेनरिक वॉन क्लिस्ट ने साल 1963 में की थी.

यह वो समय था जब अमेरिका और रूस के बीच 1947-1991 तक चला शीत युद्ध अपने चरम पर था. शुरुआत में यह सम्मेलन केवल सैन्य मुद्दों पर केंद्रित था. इसमें मुख्य रूप से पश्चिमी देशों और उनके आला अधिकारियों ने भाग लिया था. लेकिन शीत युद्ध के खातमे के बाद सम्मेलन ने अपने एजेंडे का विस्तार किया. इसमें रक्षा और सुरक्षा मामलों के अलावा जलवायु परिवर्तन और माइग्रेशन जैसे मुद्दों को शामिल किया गया. इसमें रूस, भारत और चीन जैसे देशों के नेताओं ने शिरकत करना शुरू किया.

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने म्यूनिख में सुरक्षा सम्मेलन 2024 में शिरकत की थी.
विदेश मंत्री एस जयशंकर म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन, 2024 के दौरान. 

यह सम्मेलन दो दफा स्थगित भी हो चुका है. पहली बार साल 1991 में पहले खाड़ी युद्ध के दौरान और दूसरी दफा साल 1997 में इवाल्ड-हेनरिक वॉन क्लिस्ट के रिटायरमेंट के वक्त.

वैश्विक नेताओं के लिए पिछले चार दशकों से यह सम्मेलन अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा नीति के मुद्दे पर विचारों के आदान-प्रदान के लिए सबसे महत्वपूर्ण मंच बन गया है. भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए इसमें हर साल दुनिया भर के 70 से अधिक देशों से लगभग 350 नेता एक साथ मंच साझा करते हैं.

इनमें कई अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के अध्यक्षों के अलावा कई देशों के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री भी शामिल होते हैं. इसके अलावा सम्मेलन में सेना, सिविल सोसाइटी, मीडिया जगत में महत्वपूर्ण स्थान बनाने वाले प्रतिनिधि भी शामिल होते हैं. पिछले साल भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी इस सम्मेलन में हिस्सा लिया था.

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