संजय के मुताबिक वो मोतिहारी के आजादनगर इलाके में महेंद्र प्रसाद के मकान में किराए पर रहते हैं. 17 अगस्त की दोपहर एक बजे वो यूनिवर्सिटी के छात्रों को ट्यूशन पढ़ा रहे थे. इसी दौरान 20-25 की संख्या में आए लोगों ने उनका दरवाजा खटखटाया. दरवाजा खोलने के बाद लोग उनके घर में घुस गए, ट्यूशन पढ़ने वाले छात्रों को एक घर में बंद कर दिया और फिर संजय कुमार को कॉलर पकड़कर घर से खींचते हुए बाहर लेकर आए. भीड़ में शामिल लोगों ने संजय के कपड़े फाड़ दिए, डंडों से पिटाई की और फिर पेट्रोल डालकर जिंदा जलाने की कोशिश भी हुई. इस दौरान भीड़ में से आवाज आ रही थी कि कन्हैया कुमार बनने की कोशिश कर रहे हो. भीड़ में से आवाज आ रही थी कन्हैया कुमार बनेगा, अटल बिहारी वाजपेयी के खिलाफ लिखेगा. इसके बाद भीड़ ने संजय को बुरी तरह से पीटा. इस हमले का वीडियो देखिए.
संजय यादव को बेरहमी से पीटते गुण्डे..…
Posted by Jitendra Yadav
on Friday, 17 August 2018
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की मौत के बाद जब दिल्ली में उनका अंतिम संस्कार किया जा रहा था, संजय कुमार ने फेसबुक पर दो पोस्ट लिखीं. इनमें से एक पोस्ट में संजय कुमार ने लिखा था कि भारतीय फासीवाद का एक युग समाप्त हुआ. अटलजी अनंत यात्रा पर निकल चुके.

इस पोस्ट के दो घंटे बाद ही संजय कुमार ने एक और पोस्ट लिखी. इसमें लिखा था कि अटल बिहारी वाजपेयी एक संघी थे, नेहरूवियन नहीं. उनकी भाषण कला ने भारतीय मध्यम वर्ग में हिंदुत्व की राजनीति को एक सेक्सी चीज बनाकर रख दिया. उन्हें नेहरूवियन बुलाना इतिहास की गलत व्याख्या होगी. इसी पोस्ट में संजय कुमार ने पाश की वो मशहूर कविता की लाइन भी लिखी थी, जिसमें पाश ने कहा था कि मैंने उसके खिलाफ लिखा और सोचा है. अगर आज उसके शोक में सारा देश शरीक है तो उस देश से मेरा नाम काट दो!

हालांकि अब ये दोनों ही पोस्ट संजय के फेसबुक पर नहीं हैं और संजय के करीबी बताते हैं कि पोस्ट पर पड़ने वाली गालियों को देखते हुए फेसबुक ने इसे स्पैम कर दिया है. इस पोस्ट को लिखने के तुरंत बाद उनके वॉट्सऐप पर उन्हें जान से मारने की धमकी भी आई और फिर दोपहर होते-होते उनपर जानलेवा हमला हो गया. मोतिहारी के एसपी उपेंद्र कुमार शर्मा के मुताबिक हमले के पीछे की वजहें तलाशी जा रही हैं. पुलिस केस दर्ज कर मामले की जांच कर रही है.
लेकिन मोतिहारी के स्थानीय लोग इस घटना को पूर्व नियोजित मानते हैं और इसके पीछे उनके अपने तर्क भी हैं. तर्क ये कि संजय कुमार उन कुछ चुनिंदा शिक्षकों में से हैं, जो विश्वविद्यालय में चल रही अनियमितताओं के खिलाफ लगातार आवाज उठाते रहे हैं. संजय कुमार 29 मई 2018 से ही विश्वविद्यालय की अनियमितताओं के खिलाफ धरने पर थे. इससे पहले भी वो कई बार धरना-प्रदर्शन कर चुके हैं. संजय की ये बात यूनिवर्सिटी के वीसी प्रोफेसर डॉक्टर अरविंद कुमार अग्रवाल को कभी पसंद नहीं रही है. वहीं 3 फरवरी 2016 को प्रोफेसर डॉक्टर अरविंद कुमार अग्रवाल के वीसी बनने के बाद से ही संजय लगातार यूनिवर्सिटी प्रशासन के खिलाफ मुखर रहे हैं.

यूनिवर्सिटी के खिलाफ 29 मई से ही धरना दे रहे थे संजय कुमार.
संजय के करीबी और उनपर हमले के चश्मदीद मृत्युंजय के मुताबिक इस बात से किसी भी तरह से इन्कार नहीं किया जा सकता है कि हमला करने वालों को बढ़ावा यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से मिला होगा. इस बात की पुष्टि इस बात से भी होती है कि महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी के शिक्षक संघ की ओर से एक बयान जारी कर कहा गया है कि यह सब एक सुनियोजित साजिश के तहत किया गया है और इसमें हमलावरों को वीसी की शह हो सकती है. ऐसा इसलिए है कि उनके एक प्रोफेसर पर जानलेवा हमला होता है और वो अपने प्रोफेसर को देखने तक नहीं आते हैं.
अब संजय ने राहुल आर पांडेय, संजय कुमार सिंह, अमन बिहारी वाजपेयी समेत कई लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई है. एफआईआर के लिए दी गई शिकायत में संजय ने लिखा है-
'मेरे साथ मारपीट के दौरान लगाता ये बोला जाता रहा कि तुम कुलपति के खिलाफ बोलते हो, ज्ञानेश्वर गौतम के खिलाफ बोलते हो, संजय कुमार सिंह के खिलाफ बोलते हो. अभी के अभी इस्तीफा देकर भाग जाओ, नहीं तो शाम तक आकर जिंदा जला देंगे. मुझे मारने के दौरान लगातार कहा गया कि सभी वीसी विरोधी प्रोफेसरों को यहां से भगाने का लक्ष्य पूरा करेंगे.'

फिलहाल संजय कुमार को पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (पीएमसीएच) में भर्ती किया गया है, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है. पुलिस मामले की जांच कर रही है और विपक्ष लगातार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और बिहार की कानून व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा रहा है.
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