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'GDP के आंकड़े समझ से परे हैं...', मोदी सरकार में आर्थिक सलाहकार रहे अरविंद सुब्रमण्यन का बयान

GDP के नए आंकड़ों के मुताबिक, देश की अर्थव्यवस्था 2023-24 की तीसरी तिमाही में 8.4 प्रतिशत की दर से बढ़ी, जो पिछली छह-तिमाहियों का उच्चतम स्तर है. हालांकि पूर्व आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन इससे इत्तेफाक नहीं रखते.

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2014 से 2018 तक देश के आर्थिक सलाहकार थे अरविंद सुब्रमण्यन. (फोटो- इंडिया टुडे)

नरेंद्र मोदी सरकार (Narendra Modi) के आर्थिक सलाहकार रहे अरविंद सुब्रमण्यन (Arvind  Subramanian) ने देश की विकास दर (GDP) के आंकड़ों पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने GDP में बढ़त के नए आंकड़ों को 'अस्पष्ट' कह दिया. इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में शामिल हुए सुब्रमण्यन ने कहा,

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“मेरे लिए ताज़ा GDP के आंकड़े समझ से परे हैं, अस्पष्ट हैं.”

पूर्व आर्थिक सहालकार ने उदाहरण देकर कहा कि सरकार ने इम्लाइड इंफ्लेशन के आंकड़े 1-1.5% बताए हैं जबकि एक्चुअल इंफ्लेशन 3-5 प्रतिशत है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जहां अर्थव्यवस्था 7.5% की दर से बढ़ रही थी, वहीं निजी खपत 3% की दर से कम हो रही है.

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हाल में सरकार ने जीडीपी के आंकड़े पेश किए थे. इनके मुताबिक, देश की अर्थव्यवस्था 2023-24 वित्तीय वर्ष की तीसरी तिमाही में 8.4 प्रतिशत की दर से बढ़ी, जो छह-तिमाहियों का उच्चतम स्तर है. इसके अलावा, चालू वित्त वर्ष की पहली और दूसरी तिमाही के GDP के आंकड़ों को 7.8 प्रतिशत और 7.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 8.2 प्रतिशत और 8.1 प्रतिशत रिवाइज़ कर दिया गया है. यानी सरकार के मुताबिक जितना अनुमान था उससे ज्यादा तेज़ी से देश की अर्थव्यवस्था बढ़ रही है.

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कॉन्क्लेव में पहुंचे अरविंद सुब्रमण्यन ने गिरते प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को भी रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि पिछली दो या तीन तिमाहियों में एफडीआई में बहुत तेजी से गिरावट आई है. उन्होंने कहा,

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“ऐसा नहीं है कि सिर्फ भारत का FDI कम नहीं हो रहा है, बल्कि दुनिया भर के उभरते बाजारों में जाने वाले वैश्विक एफडीआई में भारत की हिस्सेदारी भी कम हो गई है. तो सवाल यह है कि अगर भारत निवेश के लिए इतना आकर्षक स्थान बन गया है, तो अधिक एफडीआई क्यों नहीं आ रहा है? आज देश में कॉरपोरेट निवेश भी साल 2016 के स्तर से काफी नीचे है.”

हालांकि, सुब्रमण्यन ने दक्षिण भारत राज्यों में फिर से बढ़ती मैन्यूफैक्चरिंग क्षमता की तारीफ की. साथ ही उन्होंने सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेन्टिव (PLI) स्कीम और आत्मानिर्भर भारत नीति की भी सराहना की. उन्होंने कहा,

"कारखाने बड़े पैमाने पर खुल रहे हैं. जिनमें 5,000-50,000 श्रमिकों को रोजगार मिल रहा है. इसके अलावा, भारत वैश्विक बाजार में सर्विस एक्सपोर्ट में भी अच्छी हिस्सेदारी हासिल कर रहा है."

कौन हैं अरविंद सुब्रमण्यन?

अरविंद सुब्रमण्यन देश के प्रख्यात अर्थशास्त्रियों में गिने जाते हैं. उन्हें नरेंद्र मोदी सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान अक्टूबर 2014 में मुख्य आर्थिक सलाहकार के तौर पर नियुक्त किया गया था. सुब्रमण्यन करीब 4 साल तक इस पद पर रहे. पूर्व वित्त मंत्री दिवंगत अरुण जेटली ने जब सुब्रमण्यन के इस्तीफे की जानकारी सार्वजनिक की तो उन्होंने अपनी सरकार की अति महत्वाकांक्षी योजनाएं, जैसे GST और JAM के लिए अरविंद सुब्रमण्यन को श्रेय दिया था. JAM यानी जनधन, आधार और मोबाइल. जिसके माध्यम से सरकार दावा करती है कि गरीबों को सीधे उनके खाते में पैसे पहुंचाने में मदद मिलती है.

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