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नरेंद्र मोदी से आनंदी बेन ने मेरी चुगली की है

मंत्रिमंडल में उठापटक हुई, कुछ का डिमोशन भी हुआ. सोचिए डिमोशन वालों को कैसा लग रहा होगा अब?

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फोटो - thelallantop
अप्रेजल खराब हो तो भगवान कस्सम सीने में एक टीस घर कर जाती है. प्रमोशन सबको चाहिए. रोजगार वालों को भी और रोजगार देने वालों को भी. मोदी सरकार 19 नए चेहरों के साथ मंगलवार को फैल गई है. प्रकाश जावड़ेकर प्रमोशन पाकर HRD मिनिस्टर स्मृति ईरानी की कुर्सी खा गए. स्मृति सरकार की खातिर अब कपड़ा मंत्रालय संभालेंगी. स्मृति भले ही संतोषी हों. पर जूनियर HRD मिनिस्टर रामशंकर कठेरिया गुस्सा गए. ऐसे तमाम मंत्री रहे, जिनका डिमोशन हुआ. आदिवासी मामलों के राज्यमंत्री मनसुखभाई वसाना थे. मंत्रियों का खुद का 'थे' होना कितना दुखद रहता होगा न? हां तो मनसुखभाई से मंत्रालय छिना तो मन का सुख भी छिन गया. गुजरात के भरूच से मनसुखभाई सांसद हैं. खुद के राज्यमंत्री न रहने पर बोले, 'पीएम नरेंद्र मोदी से गुजरात की सीएम आनंदीबेन पटेल ने मेरी चुगली की है. इस वजह से मेरा डिमोशन हुआ है.' मनसुखभाई ने अपने डिमोशन के लिए दो और लोगों को जिम्मेदार बताया. बोले- केंद्रीय मंत्री जुअल ओराम और गुजरात के फाइनेंस मिनिस्टर सौरभ पटेल ने मोदी से मेरी शिकायत की. मनसुखभाई ने कहा, 'मैं तो ट्रांसपेरेंट तरीके से काम कर रहा था. ठीक वैसे ही, जैसे सरकार काम करने की बात करती है. कुछ भी गलत होता, तो मैं सबका ध्यान उस तरफ ले जाता. मुझे अपने साथ ऐसे ही बिहेवियर की उम्मीद थी. मुझसे जैसे इस्तीफा देने के लिए कहा गया है. मुझे लगता है कि कोई सच बोलने की हिम्मत नहीं दिखाएगा. मैं केंद्र और राज्य दोनों का ध्यान आदिवासियों के मुद्दे पर ध्यान लाता था.' आगे जानिए डिमोशन पाकर कौन मिनिस्टर क्या बोला?

1. रामशंकर कठेरिया:

मेरे सपोर्टर्स गुस्सा और नाराज हैं. मुझे लगता है अगले साल उत्तरप्रदेश में होने वाले चुनावों में ये कदम बीजेपी को नुकसान पहुंचाएगा. खुदै हीरो बनते हुए कठेरिया ने कहा एक दलित नेता और मंत्री होने के चलते, मैं अच्छा काम कर रहा था और मेरे काम की वजह से मायावती और बीएसपी की हमारे इलाके में बढ़त रुक गई थी. इसलिए मेरे इस्तीफे से इलाके के वर्कर्स को बुरा लग रहा है. मैंने बहुत मेहनत से काम किया और मायावती और बीएसपी इलाके में बीजेपी की ग्रोथ देख सकते में थे. उन्होंने गवर्नमेंट को भी सजेशन दे डाला है कि यूपी से दो दलित मिनिस्टर भी हो सकते थे. ये पार्टी के हिसाब से अच्छा होता. मोदी ने मिनिस्ट्री में शामिल होने के लिए कृष्णा राज को चुना है, जो कि यूपी के शाहजहांपुर से हैं.

2. निहाल चंद

निहाल बताते हैं, अमित शाह ने निहाल चंद को सोमवार को अपने घर बुलाया था. उन्होंने मुझे बताया कि ये पार्टी का डिसीजन है. मैंने उनसे कहा मैं हमेशा आपके डिसीजन के साथ हूं. निहाल का कहना है मुझे बिलकुल इसका अंदेशा नहीं था कि मुझे निकला जायेगा. निहाल का मानना है कि इसके पीछे उनकी खराब परफॉर्मेंस कोई रीजन नहीं है. न ही उसके पीछे मेरे खिलाफ लगे रेप के आरोप हैं. ये सब पुराना हो चुका है. कोई मेरी अभी की परफॉरर्मेंस पर सवाल नहीं उठा सकता है. मैंने 23 राज्यों का दौरा किया. देश भर में घूम-घूम कर देखा सारी योजनायें सही से लागू की जा रही है या नहीं. मैंने सारा नार्थ-ईस्ट छान मारा. जैसा प्रधानमंत्री जी ने कहा वैसे किया तो परफॉरर्मेंस के हिसाब से निकाले जाने का सवाल ही नहीं उठता. जो मुझे मिला मैंने किया. वैसे कठेरिया पर तीन मेन आरोप हैं मुस्लिमों के खिलाफ आखिरी लड़ाई को मानने से इनकार कर दिया है. उनकी ग्रेजुएशन की मार्कशीट को लेकर भी बवाल हुआ था. 2014 में उनपर रेप का आरोप लगने के बाद भी. गंगानगर, राजस्थान से लोकसभा एमपी निहाल चंद को केमिकल फर्टीलाइजर से पंचायती राज मंत्री बनाया गया था लेकिन दूसरे मंत्रिमंडल बदलाव में वो नहीं टिक सके. अर्जुन राम मेघवाल भी दलित हैं जिन्हें इनके रिप्लेसमेंट में मिनिस्ट्री में लाया गया है. निहाल चंद को मंत्रिपरिषद से निकले जाने को बैलेंस करने के कदम के रूप में इसे देखा जा रहा है.

3. मनसुखभाई वासवा

मंत्रिपरिषद से निकाले जाने पर मनसुखभाई वसावा सेंटर के साथ ही स्टेट को भी लताड़ा है. अभी तक आदिवासी मामलों के मंत्री रहे थे. वैसे आरोप इंट्रेस्टिंग हैं. ध्यान दें-
इनका कहना है कि जुएल ओरांव, गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदीबाई पटेल और वित्त मंत्री सौरभ पटेल ने मिलकर प्रधानमंत्री मोदी से मेरी चुगली की है. इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए उन्होंने कहा कि कोई ऐसे सच बोलने की हिम्मत नहीं करेगा. जिस तरह से पार्टी और सरकार ने मुझे इस्तीफ़ा देने पर मजबूर किया है. वसावा का कहना है कि आदिवासियों के लिए उनकी मांगों में बहुत अंतर था. इसी वजह से इन लोगों ने ऐसा किया है.

4. सांवर लाल जाट

अभी तक जल संसाधन राज्य मंत्री रहे सांवर लाल जाट ने कहा कि तुरंत ही उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया था. पार्टी ने जो भी फैसला लिया है वो उसके साथ हैं.

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