मगर अब जब MNF को बहुमत मिल रहा है तो 84 साल के जोरामथांगा का मुख्यमंत्री बनना तय है. चुनाव से पहले ये बात चल रही थी कि बीजेपी एमएनएफ से हाथ मिला सकती है. मगर ऐसा हुआ नहीं. इस बार बीजेपी इस उम्मीद में अच्छा प्रदर्शन करने की बात कह रही थी कि उन्होंने ब्रू रिफ्यूजियों को वापस लाने का काम किया है. चूंकि ये रिफ्यूजी ज्यादातर हिंदू हैं, बीजेपी उन्हें अपना लॉयल वोटर मानती है. हालांकि बीजेपी को यहां एक ही सीट मिल रही है. चूंकि 2014 लोकसभा चुनाव में MNF NDA का घटक दल थी, ये एक तरह से बीजेपी के लिए भी जीत है. वैसे MNF ने विधानसभा चुनाव से पहले ये साफ कर दिया था कि उन्हें बीजेपी के साथ की यहां जरूरत नहीं है, मगर कांग्रेस को सत्ता से हटाने के लिए बीजेपी खुद को MNF के साथ खड़ी बताएगी. जैसा कि तेलंगाना में TRS को प्रचंड बहुत मिलने पर भी बीजेपी अपना समर्थन दे रही है. लाल थनहवला का इंटरव्यू सुनिए-
कांग्रेस का वो मुख्यमंत्री जो कुर्सी बचाने के लिए दो सीटों पर चुनाव लड़ा और दोनों पर हार गया
एक सीट पर तो पिछली 7 बार से लगातार चुनाव जीत रहे थे.
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कांग्रेस यहां 10 साल से सत्ता पर काबिज थी. फोटो में लाल थनहवला और कांग्रेस चीफ राहुल गांधी.
नॉर्थईस्ट का राज्य मिजोरम. इस सूबे का पिछले 10 साल से जो शख्स मुख्यमंत्री था, वो इस बार अपनी दोनों सीटों पर चुनाव हार गया है. नाम है लाल थनहवला. कांग्रेस के इस कदावर नेता को एक सीट पर मिजो नेशनल फ्रंट ने हराया है और दूसरी पर एक निर्दलीय ने. पहली सीट साउथ चंपई की है जहां एमएनएफ के टीजे लालनंतलुआंगा ने 5 बार के मुख्यमंत्री थनहवला को हराया है. साउथ चंपई से थनहवला 1049 वोटों से हारे हैं. साथ ही थनहवला अपनी उस सीट से भी हार गए हैं जहां से वो लगातार 7 बार चुनाव जीते हैं. सीट का नाम है सेरछिप. मगर इस बार अपनी ये सीट मुख्यमंत्री एक निर्दलीय से बेहद करीबी मुकाबले में हार गए हैं. निर्दलीय का नाम है लालदुहोमा. दूसरी तरफ इस बार मिजो नेशनल फ्रंट को बड़ी जीत मिली है. राज्य की 40 सीटों में से MNF को 29, कांग्रेस को 6, बीजेपी को 1 और अन्यों को 6 सीटें मिलती दिख रही हैं. फरवरी 1987 में ये राज्य बना. MNF यहां की रीजनल पार्टी है जिसने मिजोरम को अलग राज्य बनाने के लिए बड़ा संघर्ष किया है. इसलिए सत्तारूढ़ कांग्रेस के लिए यहां सबसे बड़ी प्रतिद्वंदी पार्टी बीजेपी नहीं एमएनएफ है. वो 1987 से 2008 तक लगातार सत्ता में रही है. मगर 2009 में कांग्रेस ने यहां चुनाव जीत लिया. 32 सीटें जीतीं. फिर 2013 में 34 सीटें मिलीं. कांग्रेस के लाल थनहवला फिर से मुख्यमंत्री बने. 74 साल के थनहवला का यहां की राजनीति में काफी दबदबा है.
मगर अब जब MNF को बहुमत मिल रहा है तो 84 साल के जोरामथांगा का मुख्यमंत्री बनना तय है. चुनाव से पहले ये बात चल रही थी कि बीजेपी एमएनएफ से हाथ मिला सकती है. मगर ऐसा हुआ नहीं. इस बार बीजेपी इस उम्मीद में अच्छा प्रदर्शन करने की बात कह रही थी कि उन्होंने ब्रू रिफ्यूजियों को वापस लाने का काम किया है. चूंकि ये रिफ्यूजी ज्यादातर हिंदू हैं, बीजेपी उन्हें अपना लॉयल वोटर मानती है. हालांकि बीजेपी को यहां एक ही सीट मिल रही है. चूंकि 2014 लोकसभा चुनाव में MNF NDA का घटक दल थी, ये एक तरह से बीजेपी के लिए भी जीत है. वैसे MNF ने विधानसभा चुनाव से पहले ये साफ कर दिया था कि उन्हें बीजेपी के साथ की यहां जरूरत नहीं है, मगर कांग्रेस को सत्ता से हटाने के लिए बीजेपी खुद को MNF के साथ खड़ी बताएगी. जैसा कि तेलंगाना में TRS को प्रचंड बहुत मिलने पर भी बीजेपी अपना समर्थन दे रही है. लाल थनहवला का इंटरव्यू सुनिए-
मिजोरम में थनहवला ने शराब पर लगा बैन हटा दिया. मार्च 2016 से शराब की दुकानें लगीं. ये एक ईसाई बाहुल वाला राज्य है और 1995 से मिजोरम में शराब पर पूरी तरह से रोक थी. मगर थनहवला ने इसमें ढील दे दी जिसका खूब विरोध हुआ. इसी को निशाना बनाते हुए एमएनएफ ने चुनाव लड़ा. अब चुनाव जीतने के बाद एमएनएफ के मुख्यमंत्री पद के दावेदार ने कहा कि वो शराब की बिक्री पर सौ फीसदी बैन लगाएंगे.
मगर अब जब MNF को बहुमत मिल रहा है तो 84 साल के जोरामथांगा का मुख्यमंत्री बनना तय है. चुनाव से पहले ये बात चल रही थी कि बीजेपी एमएनएफ से हाथ मिला सकती है. मगर ऐसा हुआ नहीं. इस बार बीजेपी इस उम्मीद में अच्छा प्रदर्शन करने की बात कह रही थी कि उन्होंने ब्रू रिफ्यूजियों को वापस लाने का काम किया है. चूंकि ये रिफ्यूजी ज्यादातर हिंदू हैं, बीजेपी उन्हें अपना लॉयल वोटर मानती है. हालांकि बीजेपी को यहां एक ही सीट मिल रही है. चूंकि 2014 लोकसभा चुनाव में MNF NDA का घटक दल थी, ये एक तरह से बीजेपी के लिए भी जीत है. वैसे MNF ने विधानसभा चुनाव से पहले ये साफ कर दिया था कि उन्हें बीजेपी के साथ की यहां जरूरत नहीं है, मगर कांग्रेस को सत्ता से हटाने के लिए बीजेपी खुद को MNF के साथ खड़ी बताएगी. जैसा कि तेलंगाना में TRS को प्रचंड बहुत मिलने पर भी बीजेपी अपना समर्थन दे रही है. लाल थनहवला का इंटरव्यू सुनिए-
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