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पड़ताल: क्या JNU वाला नजीब ISIS का आतंकवादी बन गया?

ये फोटो खूब शेयर हो रही है, क्या है इसकी सच्चाई...

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फेसबुक व्हाट्सएप पर खूब धड़ल्ले से शेयर हो रही है ये फोटो.
नजीब अहमद. जेएनयू का स्टूडेंट. अक्टूबर 2016 से लापता है. नजीब के गायब होने के मामले की जांच सीबीआई कर रही थी. लगभग दो साल तक जांच करने के बाद अक्टूबर 2018 में क्लोजर रिपोर्ट लगा दी. यानी कि सीबीआई भी नजीब का पता नहीं लगा पाई. ढाई साल से ज्यादा का समय बीत चुका है. नजीब का कुछ पता नहीं है. इन सबके बीच समय-समय पर नजीब के ISIS जॉइन करने का हल्ला सोशल मीडिया पर उड़ता रहा. ऐसा ही मैसेज पिछले तीन-चार दिनों से फिर वायरल हो रहा है.
नजीब की मां ने पूछा, कहां है मेरा बेटा?  16 मार्च 2019. प्रधानमंत्री और उनके पूरे कैबिनेट ने अपने ट्विटर हैंडल पर अपने नाम के आगे चौकीदार लगा लिया. सुबह के 9 बजे एक ट्वीट किया. #mainBhiChowkidar के साथ. नजीब अहमद की मां फातिमा नफीस ने इसे रिट्वीट किया. और पूछा, 'अगर आप चौकीदार हैं तो बताइए मेरा बेटा कहां हैं?' इसके बाद सोशल मीडिया पर एक बार फिर नजीब के ISIS जॉइन करने की खबर चलने लगी.
सोशल मीडिया पर वायरल इस फोटो में इस लड़के को नजीब बताया जा रहा है
सोशल मीडिया पर वायरल इस फोटो में इस लड़के को नजीब बताया जा रहा है    (फोटो-फेसबुक)

सबसे पहले इस फोटो को देखिए. हमने इस फोटो की पड़ताल की, तो पता चला कि ये फोटो इराक के अल अलाम शहर की है. 7 मार्च, 2015 को खींची गई इस फोटो में दिख रहे लोग शिया लड़ाके हैं. ये लोग ISIS के नियंत्रण वाले तिकरित शहर में एक लड़ाई में जीत के बाद जश्न मना रहे थे. ये फोटो न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के लिए ताहिर अल-सूदानी ने खींची थी.
रायटर्स की ओरिजनल फोटो जिसे आईएस के आतंकियों की बता कर वायरल की जा रही है.
रायटर्स की ओरिजनल फोटो जिसे आईएस के आतंकियों की बता कर वायरल की जा रही है.   (फोटो- रायटर्स)

अब आते हैं इसमें नजीब के होने पर. नजीब और इस लड़के में जमीन-आसमान का अंतर है. इन दोनों में शायद ही कोई समानता नजर आ रही हो.
नजीब और वायरल फोटो में दिख रहे लड़के में शायद ही कोई समानता हो.
नजीब और वायरल फोटो में दिख रहे लड़के में शायद ही कोई समानता हो.

इससे दो चीजें साफ होती हैं. 1. वायरल तस्वीर में नजीब नहीं है. 2. तस्वीर में दिख रहे लोग ISIS के आतंकी नहीं हैं.
एक और नजीब हुआ था गायब! नजीब के आईएस जॉइन करने की खबरें 2018 में भी खूब वायरल हुई थीं. ऑल्ट न्यूज
के मुताबिक अगस्त 2017 में वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी का एक छात्र गायब हो गया था. उसके आईएस जॉइन करने का अंदेशा था. इस अंदेशे का आधार एक टेक्स्ट मैसेज था. जिसे उसने गायब होने से पहले अपने परिवार को भेजा था. उसका नाम भी नजीब ही था.
तो वीआईटी के नजीब को जेएनयू का नजीब बताकर वायरल कर दिया गया. व्हाट्सएप फेसबुक पर इसे खूब शेयर किया गया. भाजपा नेता राम माधव और स्वपन दासगुप्ता ने भी इसे शेयर किया. कुछ मीडिया संस्थानों ने भी इस भ्रामक खबर को आगे बढ़ाया. बाद में दिल्ली पुलिस ने स्वयं इस खबर में कोई सच्चाई न होने की पुष्टि की. मतलब साफ है. नजीब के आईएस जॉइन करने की खबरों में कोई सच्चाई नहीं है. दिल्ली पुलिस स्वयं इस बात की पुष्टि कर चुकी है. जो फोटो वायरल हो रहा है, वो भी आतंकियों की नहीं है.


वीडियो देखें: न्यूजीलैंड की मस्जिद में गोली चलाने वाले ने 74 पन्ने के दस्तावेज में क्या सफ़ाई दी? 

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