गिलास और बारह आने और विदेश मंत्रालय की एक ही सांस में बात इसलिए हो रही है क्यूंकि यहां एक कमाल का काम हो रहा है. जिज्ञासा से भर देने वाला. सरकारी वेबसाइट है eprocure.gov.in जिसपर सरकारी ऑनलाइन टेंडर्स के बारे में मालूम पड़ता रहता है. यहां साड़ी जानकारियां उपलब्ध होती हैं. यहां से बोली लगाई जा सकती है और बाकी सभी ज़रूरी काम किये जा सकते हैं. विदेश मंत्रालय ने एक टेंडर निकाला. उन्हें 24 लोगों के खाने वाला डिनर सेट चाहिए था. एकदम स्पेसिफ़िक लिखा भी हुआ था - "Handmade crystal glassware, crested with seal" इसके लिए विदेश मंत्रालय 22 लाख रुपये खर्चने को तैयार है. माने एक आदमी के बर्तन की कीमत होगी लगभग 91 हज़ार, 6 सौ 67 रुपये. ये खाली एक आदमी के बर्तनों की कीमत होगी. अब इसमें 12 रुपये की मैगी सर्व होगी या मोदी जी वाले 80 हज़ार रुपये किलो भाव मिलने वाले मशरूम, ये तो वो ही जाने जिसको खाने को मिलेगा. सहसा लता मंगेशकर और बाला सुब्रमनियम की आवाज़ कानों में गूंज गई - "पहले जूते... खाएंगे क्या? आपकी मर्ज़ी... ना जी तौबा, ना जी तौबा..." (हम आपके हैं कौन, साल 1994)
टेंडर खुला 2 मई 2018 को. बोली लगाने की शुरुआत हुई थी 5 अप्रैल 2018 को. बोली लगनी बंद हुई 30 अप्रैल 2018 को सायं 6 बजे.
ये खबर वाइस वेबसाइट के हवाले से बताई जा रही है. उन्होंने टेंडर के खुलते ही नई दिल्ली में कितने ही क्रॉकरी वालों से बात की लेकिन कहीं भी इतना महंगा डिनर सेट नहीं मिला. क्ले क्राफ्ट इंडिया अर्थात ऐसे सामानों की बहुत भारी और बहुत हाई एंड दुकान मैनेज करने वाले अश्विनी गुप्ता ने वाइस से कहा, "ऐसी चीज़ हिंदुस्तान में नहीं होती. आपको दौड़ा रहे हैं ये ऐसे."

विदेश मंत्रालय को क्या चाहिए था.
वाइस ने दिल्ली में जो पड़ताल की उसके हिसाब से उन्हें जो सबसे महंगा डिनर सेट मिला उसकी कीमत 87 हज़ार रुपये थी. 22 लाख में 21 लाख 13 हज़ार रुपये कम.

टेंडर से जुड़ी जानकारी जो कि सरकारी वेबसाइट पर मिली. (वाइस के सौजन्य से)
31 मई को विदेश मंत्रायल में एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफ़िसर अरुणा टिर्की ने बताया कि किसी ने भी इस टेंडर के लिए बोली नहीं लगाई थी. टिर्की ने ही इस टेंडर पर साइन किये थे.
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