सीबीआई ने गृह मंत्रालय के अंडर सेक्रेटरी के खिलाफ सोमवार को करप्शन का मामला दर्ज किया है. सीबीआई को रेड के दौरान आनंद जोशी के घर से मंत्रालय की फाइलें और 7.5 लाख रुपय मिले हैं. जोशी पर आरोप है कि वो विदेशी चंदा नियम कानून(FCRA) के मामलों से मिली जानकारियों का इस्तेमाल एनजीओ को ब्लैकमेल करने में करते थे. इसके अलावा उनपर एनजीओ को एफसीआरए की मंजूरी दिलाने के लिए फाइलों में हेराफेरी करने का भी आरोप है. इस मामले पर जोशी ने मंगलवार को कहा था कि उनके खिलाफ करप्शन का कोई चार्ज नहीं है. सीबीआई को इनकम से ज्यादा प्रॉपर्टी नहीं मिली है. उन्हें उनकी ईमानदारी की सजा मिली है. क्योंकि उन्होंने फोर्ड फाउंडेशन की तीस्ता सीतलवाड़ के खिलाफ एक्शन लिया. आनंद की पत्नी मीनाक्षी और बेटे का कहना है कि जोशी पर लगे सभी आरोप गलत हैं. वह डिप्रेशन के मरीज हैं. उन्हें होम मिनिस्ट्री के ज्वाइंट सेक्रेटरी फंसा रहे हैं. करीब 8 महीने पहले गृह मंत्रालय में तैनाती के दौरान फोर्ड फाउंडेशन के प्रोजेक्ट्स को भारत में मंजूरी देने के लिए आनंद को 250 करोड़ की घूस ऑफर की गई थी. मगर उन्होंने मंजूरी नहीं दी. जिन फाइलों के गुम होने का आरोप मेरे पति पर लगाया जा रहा है वो उनके ट्रांसफर के बाद वहां से गुम हुई हैं. बुधवार को सीबीआई ने उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया था. पर आनंद जोशी का कहीं अता-पता नहीं है. रिपोर्ट के मुताबिक जोशी ने सुबह ही अपना घर छोड़ दिया था. उन्होंने अपने परिवार के लिए एक लेटर छोड़ा है. जिसमें उन्होंने लिखा है कि "मैं कुछ महीनों से मानसिक पीड़ा से गुजर रहा हूं. मुझे शांति चाहिए जो यहां नहीं है. इसलिए मैं घर छोड़कर जा रहा हूं." ये रहा पूरा लेटर.
ये स्टोरी जागृतिक ने लिखी है. जागृतिक 'द लल्लनटॉप' के साथ इंटर्नशिप कर रही है.