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मेवात गैंगरेप-मर्डर: CBI जांच में बीफ नहीं मिला, आरोपी भी बदले

परिवार की दो लड़कियों के साथ गैंगरेप किया गया था.

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इस मामले ने बहुत तूल पकड़ा था. सरकार पर भी इसे लेकर काफी दबाव था. इसी दबाव के कारण केस की जांच सीबीआई को सौंपी गई.
24 अगस्त, 2016. जिला, मेवात. गांव, डिंगरहेरी. आधी रात के बाद का वक्त था. रशीदन और इब्राहिम अपने घर में सो रहे थे. किसान परिवार था. एकाएक कुछ लोग उनके घर में घुस आए. उन्होंने घरवालों पर हमला कर दिया. तीन घंटे बाद जब हमलावर गए, तब तक रशीदन और इब्राहिम मर चुके थे. परिवार के दो और सदस्यों- आयशा और जफरुद्दीन बुरी तरह जख्मी हो गए थे. परिवार की दो लड़कियों के साथ गैंगरेप किया जा चुका था. एक की उम्र थी 21 साल और दूसरी की 16 साल. ये दोनों रशीदन और इब्राहिम की भांजियां थीं. सुनने में आया कि ये सब 'नाराजगी' में किया गया. कुछ 'हिंदू' नाराज थे कि ये 'मुसलमान' परिवार बीफ खाता है. इसीलिए ऐसे घिनौने अपराध को अंजाम दिया गया.
हमलावरों ने दो हत्याएं की. दो लोगों को जमकर पीटा. दोनों लड़कियों के साथ गैंगरेप किया और फिर लूटपाट करके भाग गए. पीड़ित परिवार का कहना था कि हमलावरों की तादाद 8 से 10 के करीब थी (सांकेतिक तस्वीर)
हमलावरों ने दो हत्याएं की. दो लोगों को जमकर पीटा. दोनों लड़कियों के साथ गैंगरेप किया और फिर लूटपाट करके भाग गए. पीड़ित परिवार का कहना था कि हमलावरों की तादाद 8 से 10 के करीब थी (सांकेतिक तस्वीर)

बीफ से जुड़ा विवाद नहीं था ये: CBI जांच शुरू तो हुई, पर पीड़ित पक्ष पुलिस की जांच से खुश नहीं था. मामला सीबीआई के पास गया. अब सीबीआई ने इस केस में अपनी चार्जशीट दाखिल की है. बीफ ऐंगल को खारिज कर दिया है. इतना ही नहीं, पहले जो आरोपी माने जा रहे थे, उन्हें भी निर्दोष बताया गया है. उनकी जगह चार नए लोगों का नाम है. ये चारों एक ही गिरोह के लिए काम करते हैं.
जिसके साथ क्राइम हुआ, उसने क्या कहा था? सीबीआई की चार्जशीट पर सवाल उठना तय लग रहा है. वजह इस केस से जुड़े ब्योरे हैं. इस घटना के करीब 15 दिन बाद उन दोनों लड़कियों ने दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई थी. उन्होंने कहा कि हमलावरों ने उनसे कहा था कि उनके साथ जो हो रहा है, वो बीफ खाने की सजा है. एक लड़की बोलते-बोलते रो पड़ी थी. बोली:
मेरे मामा-मामी को मारने के बाद वो मुझे कमरे के अंदर ले जाने की कोशिश कर रहे थे. जब मैंने भागने की कोशिश की, तो उन्होंने मेरे बच्चे को चाकू की नोंक पर रख दिया. इसके बाद चारों ने मिलकर मेरे साथ बलात्कार किया.
सीबीआई ने पंचकुला की CBI कोर्ट में अपनी चार्जशीट दाखिल कर दी है.
सीबीआई ने पंचकुला की CBI कोर्ट में अपनी चार्जशीट जमा कर दी है.

'मुस्लिम तो गए' घटना के तीन दिन बाद मेवात पुलिस ने चार लोकल लड़कों को पकड़ा. उनकी शिनाख्त भी हुई. मामले ने तब तूल पकड़ा, जब इन चार में से दो आरोपियों का रिश्ता हिंदूवादी संगठनों से जुड़ने लगा. एक आरोपी, राहुल वर्मा, ने अपनी फेसबुक प्रोफाइल में लिखा था- अप्रैल 2016 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ काम करना शुरू किया है. राव अमरजीत नाम के एक दूसरे आरोपी ने अपने फेसबुक पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक तस्वीर लगाई हुई थी. इस फोटो पर कैप्शन था- मुस्लिम तो गए. ऐसा भी सुनने में आया कि ये चारों 'गोरक्षक' हैं.
पुलिस की जांच पर हल्ला मचा था केस की जांच शुरू होने पर पुलिस ने कहा कि ये बस साधारण क्राइम का मामला है. कि इसके पीछे कोई सांप्रदायिक ऐंगल नहीं है. न तो 'हिंदू-मुस्लिम' हुआ, न बीफ मर्डर. जो चीजें सामने थीं, उसे देखते हुए पुलिस की थिअरी पर हल्ला मचना ही था. आरोप लगा कि आरोपियों का राजनैतिक कनेक्शन है और इसीलिए पुलिस उन्हें बचाने की कोशिश कर रही है. पीड़ित परिवार ने भी ये ही कहा. इसी शक-शुबहे में जांच सीबीआई को सौंपी गई. अब सीबीआई ने आरोपी ही बदल दिए हैं. उसके मुताबिक, ये सब कुख्यात ऐक्सल गिरोह का किया-धरा है.
इस घटना के बाद मनोहर लाल खट्टर की काफी आलोचना हुई. पुलिस की जांच पर लगातार सवाल उठते रहे.
इस घटना के बाद मनोहर लाल खट्टर की काफी आलोचना हुई. पुलिस की जांच पर लगातार सवाल उठते रहे.

किसी और केस में पकड़े गए गैंगस्टर्स ने ये गुनाह भी कबूल लिया सितंबर 2017 में गुड़गांव पुलिस ने चार लड़कों को पकड़ा था. किसी और केस के सिलसिले में. उनसे पूछताछ हुई, तो साथ के साथ इन्होंने इस डिंगरहेरी केस में भी अपना गुनाह कबूल लिया. यानी मेवात पुलिस ने घटना के तीन दिन बाद जिन चार लड़कों को पकड़ा था, वो निर्दोष थे? CBI तो ये ही कह रही है. उसके मुताबिक, पीड़ित परिवार के बयान के अलावा उन लड़कों के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला है.
चार्जशीट का ये मेडिकल पर्चा क्या कहता है? एक बड़ी अलग सी चीज भी है इस चार्जशीट में. CBI का कहना है कि पुलिस ने जिन लड़कों को पकड़ा था, उनके बारे में पीड़ित ये कह रहे हैं कि रशीदन मरने से पहले उनका नाम बताकर गई थी. साथ में एक डॉक्टरी सर्टिफिकेट भी लगाया गया है. इस सर्टिफिकेट के मुताबिक, रशीदन को सिर में इतनी चोट लगी थी कि उसकी मानसिक स्थिति हिल गई होगी. इसीलिए उसकी कही बात पर यकीन नहीं किया जा सकता है.
एक सवाल ये भी है कि पीड़िताओं ने पुलिस द्वारा अरेस्ट किए गए चारों लड़कों की शिनाख्त कैसे की? शिनाख्त की ये कार्रवाई अदालत की देखरेख में हुई थी (सांकेतिक तस्वीर)
एक सवाल ये भी है कि पीड़िताओं ने पुलिस द्वारा अरेस्ट किए गए चारों लड़कों की शिनाख्त कैसे की? शिनाख्त की ये कार्रवाई अदालत की देखरेख में हुई थी (सांकेतिक तस्वीर)

पीड़िताओं ने तो उन लोकल लड़कों की शिनाख्त की थी सीबीआई जांच शुरू होने से पहले ही आरोप लग रहे थे कि अपराधियों को बचाने की कोशिश हो रही है. अब जब कि सीबाआई की जांच नए आरोपी लाई है और पुरानों को 'बरी' करती दिख रही है, तो क्या वो पुराने सवाल फिर से उभरेंगे? एक सवाल ये भी दिमाग में सालता रहेगा कि वो दोनों लड़कियां जिन्होंने अपनी आंखों के सामने मामा-मामी को मरते देखा, परिवार के दो और सदस्यों को बेहद बुरी तरह से पिटते देखा और चार लोगों के हाथों गैंगरेप भोगा, वो क्या ये सब करने वाले अपराधियों को पहचानने में गलती कर सकती हैं? उन्होंने तो पहले पकड़े गए चारों लोकल लड़कों की शिनाख्त कर ली थी.


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