लोकसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रही है वैसे-वैसे राजनीतिक दल भी अपने पत्ते खोल रही है. इसी कड़ी में बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने 20 मार्च को ऐलान किया है कि वह आगामी लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगी. उन्होंने कहा कि-
देश की मौजूदा राजनीतिक हालात को देखते हुए मैंने लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है. अभी मेरे जीतने से ज्यादा गठबंधन की सफलता ज्यादा जरूरी है. अगर चुनाव के बाद कोई स्थिति बनती है तो किसी भी सीट को खाली कराकर चुनाव लड़ सकती हूं और जीत भी सकती हूं.
ट्वीट देखिए.
मायावती की यह घोषणा इसलिए अहम है क्योंकि उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा का गठबंधन है. 21 फरवरी को सपा और बसपा के बीच सीटों का बंटवारा भी हुआ था. यह तय हुआ कि यूपी की 80 सीटों में सपा 37 सीटों और बसपा 38 सीटों पर लोकसभा चुनाव लड़ेगी. 1984 में बीएसपी बनने के बाद वह चुनाव यूपी के कैराना से लड़ीं. पहले ही चुनाव में बीएसपी को कैराना में 44 हजार वोट मिले. फिर 1985 में कांशीराम ने मायावती को बिजनौर लोकसभा उपचुनाव में लड़वाया. वह फिर हारीं. 1987 में हरिद्वार से बाई इलेक्शन लड़वाया. वह हारीं, मगर 1 लाख से भी ज्यादा वोट पाए. और 1989 में मायावती ने अपने सपने को हकीकत में बदलने वाला पहली सीढ़ी चढ़ने में कामयाबी पा ली. उन्होंने लोकसभा चुनावों में बिजनौर सीट जीत ली. 9 हजार वोटों से. जबकि पूरे प्रदेश में जनता दल की लहर थी. एक बात यह भी है कि मायावती पिछले कई सालों से आम तौर पर चुनाव नहीं लड़ती हैं. मायावती ने 20 जुलाई 2017 को राज्यसभा से भी इस्तीफा दे दिया था. साल 2012 में बसपा के चुनाव हारने के पर उन्होंने पार्टी लीडर पोस्ट से भी इस्तीफा दे दिया था. इसके कुछ दिनों बाद 7 मार्च 2012 को राज्यसभा पहुंची थीं.
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