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आज श्रीमती सनी लियोन को देखकर हिंदी की क्लास याद आ गई

भारत में वीर्यवान बालकों की कमी नहीं. तो फिल्म का सिक्का तो खूब उछलेगा

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फोटो - thelallantop
छोटे में हिंदी की क्लास में एक अलंकार पढ़ाया जाता था. अलंकार बोले तो जूलरी. भाषा की जूलरी अलंकार. जिनसे सुंदरता बढ़े. कहन की. हां, तो अलंकार था, श्लेष. इसमें क्या होता है कि शब्द एक, मगर अर्थ कई. मसलन,
चरण धरत चिंता करत चितवत चारहुं ओर सुबरण को खोजत फिरत कवि व्यभिचारी चोर.
अर्थात. पैर रखता है. फिर चारों तरफ चिंता से देखता है. सुवर्ण की खोज कवि, ठरकी और थीफ करता है. यहां कवि के लिए सुवर्ण मतलब सुंदर शब्द, जिसे वो मिसरे में लगाके महफिल लूट ले. सुवर्ण मतलब गोरा रंग. जिसे गोरिया के साथ बांध दिया गया है. और ये मान लिया गया है कि कामातुर पुरुष तो उसे ही देखेगा. खैर, ये डिस्कोर्स और कहीं. तीसरा है, सुवर्ण यानी सोना. जिसकी चाह में चोर सेंध मारता है. उसे ये भी नहीं पता. काफी हिस्सा तो अक्षय कुमार मणप्पुरम गोल्ड लोन के लिए ले गए. बाकी जो बचा, उसे पीएम की योजना में जमा कर दिया भाई लोगों ने. चेतावनी- आगे मस्तीजादे का झागदार ट्रेलर है, इयरफोन लगा कर देखें खैर, बात श्लेष की. जिसका एक नया उदाहरण श्रीमती सनी लियोन ने दिया है. उनकी फिल्म आ रही है. मस्तीजादे. उसकी यह कविता है. कवि हैं कुमार. बोल पढ़ें
"मैं नची टू मच न कर मुझे तू टच के मुंडे कहंदे होर होर होर होर नच नीं इनको चढ़ी है बड़ी गर्मी ये करने लगे हैं बेशर्मी हो साकिट में तेरे ये प्लगपिन मेरे तू चार्ज कर दे मेरा दिल शाम सवेरे हाय मैं कितना भी करूं इग्नोर नी के मुंडे कहंदे होर होर होर नच नीं"
ओहो. कविता पढ़ा दी. शीर्षक नहीं बताया. होर होर होर. जिन्हें पंजाबी आती है. वे जानते हैं. इसका मतलब है और. मगर मुल्क में कितनों को पंजाबी आती है. मेरा मतलब एक बड़ा हिस्सा ऐसा है, जिनके लिए पंजाबी बल्ले बल्ले और शावा शावा पर खत्म हो जाती है. इन लोगों ने रैपिडेक्स से लेकर इल्लू इंग्लिश कोर्स तक क्या क्या किया. और उन्हें ये पता है. कि होर का मतलब वेश्या होता है. तो क्या मैं इस गाने को श्लेष अलंकार में पढ़ूं. प्रॉड्यूसर की नीयत तो यही होगी. उसे पता है. भारत में वीर्यवान बालकों की कमी नहीं. तो फिल्म का सिक्का तो खूब उछलेगा. और लोगों की कल्पनाओं में रंग भरने के लिए एक माटी की मूरत भी तो है. सनी लियोन. जिसे गूगल के हर कोने पर हर कोण से खोजते हैं हम भारतीय. दो बरस से लगातार. पर आज मुझे किसी और पर गुस्सा आ रहा है. कवि पर. जिनसे पापी पेट के फेर में कोयल कौआ सब एक कर दिए. होर को लिखा है कुमार ने. जालंधर वाले कुमार ने. और इन्हीं कुमार ने ये गाना भी लिखा है. अलंकार यहां भी है. यमक और अनुप्रास. मगर फर्क कितना है, आप खुद ही देख लें.
"नैना लगीयां बारिशां ते सुक्के सुक्के सपने वि पिज गए नैना लगियां बारिशां रोवे पलकें डे कोने विच नींद मेरी नैना लगेयां बारिशां हंजू दिगदे ने चोट लगे दिल ते नैना लगेयां बारिशां रुत बिरहा दे बदलां दी छा गई"
(आंखों में बारिश बरस रही है. सूखे सूखे सपने भी भीग गए हैं. पलकों के कोने में जो नींद बसर करती है, वो भी रो रही है. दिल पर लगी चोट भी नजर नहीं आ रही. और बिछड़ने का मौसम बताने वाले बादल छा गए हैं. ) आगे पंजाबी से हिंदी में प्रवेश है
"काली-काली खाली रातों से होने लगी है दोस्ती खोया-खोया इन राहों में अब मेरा कुछ भी नहीं हर पल हर लम्हा मैं कैसे सहता हूं हर पल हर लम्हा मैं खुद से ये कहता रहता हूं तुझे भुला दिया फिर क्यों तेरी यादों ने मुझे रुला दिया"
कुमार, तेरी इन यादों ने आज रुला दिया. और जिन्हें अब भी सनी की सनसनी मची है. उनके लिए आगे की सूचना इस गाने की फरमाइश की है भारत दैट इज इंडिया ने. स्वर हैं मीत ब्रदर्स अंजान और रितु पाठक के. संगीत से सजाया है मीत ब्रदर्स अंजान ने. और बोल हैं कुमार के. आइए सुनते हैं फिल्म मस्तीजादे का यह गीत, होर नच https://www.youtube.com/watch?v=R2SIOc7b8tA

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