मणिपुर में जारी नस्लीय हिंसा के बीच अब महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न और हिंसा की कई घटनाएं सामने आ रही हैं. पहले 4 मई की घटना का वीडियो बाहर आया, जिसमें भीड़ दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर उनकी परेड कराती दिख रही थी. दोनों महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न हुआ. ये वीडियो 19 जुलाई को सबके सामने आया. इसके बाद, यौन उत्पीड़न की कई घटनाएं अखबारों में छप चुकी हैं. हालांकि मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने दावा किया कि पिछले ढाई महीने से जारी हिंसा के दौरान रेप की सिर्फ एक घटना रिपोर्ट हुई है. इंडिया टुडे नॉर्थ ईस्ट से बातचीत में उन्होंने कहा कि अलग-अलग घटनाओं की 6 हजार से ज्यादा FIR दर्ज हुई, उनमें एक रेप केस है. उन्होंने यौन उत्पीड़न की दूसरी घटनाओं को नकार दिया.
अपहरण, रेप, हत्या, जिंदा जला दिया...मणिपुर की वो घटनाएं जिनके वीडियो सामने नहीं आए!
मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने दावा किया कि रेप की सिर्फ एक घटना रिपोर्ट हुई है.


अंग्रेजी अखबार 'द हिंदू' में छपी विजयता सिंह की खबर के मुताबिक, 15 मई को इम्फाल ईस्ट में एक 18 साल की लड़की के अपहरण और गैंगरेप की बात सामने आई है. लड़की ने 21 जुलाई को पुलिस से संपर्क किया, जिसके बाद जीरो FIR (घटना कहीं भी हो, किसी भी थाने में दर्ज हो सकती है) दर्ज की गई. FIR के मुताबिक, लड़की ने बताया कि उसे कुछ महिलाओं ने हथियार लिए 4 मर्दों के हवाले कर दिया. उन महिलाओं की पहचान मीरा पइबी के रूप में की गई हैं. यानी मशाल धारक महिलाएं. अगर इन्हें संबोधित करना हो तो इन्हें स्थानीय स्तर पर इमा कहा जाता हैं.
रेप पीड़ित लड़की को गंभीर हालत में नागालैंड के अस्पताल में भर्ती करवाया गया था. 21 जुलाई को उसने कांगपोकपी थाने में जीरो FIR दर्ज करवाई थी. हत्या का प्रयास, अपहरण, गैंगरेप और एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ था. FIR में लड़की ने आरोप लगाया है कि उन महिलाओं ने मर्दों को साफ कहा था कि उसे मार दे. बाद में वे सभी चार मर्द उसे एक कार में दूसरी जगह ले गए. उनमें से तीन ने उसके साथ गैंगरेप किया. अखबार ने पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया है कि 22 जुलाई को FIR इम्फाल ईस्ट थाने में ट्रांसफर कर दी गई.
मणिपुर में 3 मई को मैतेई और कुकी समुदाय के बीच हिंसा शुरू हुई थी. इंटरनेट बंद होने के कारण कई घटनाएं सामने नहीं आईं. अब छन-छन कर खबरें आ रही हैं. 5 मई को दो और कुकी महिलाओं के साथ कथित रूप से रेप हुआ था. इंडियन एक्सप्रेस में छपी सुक्रिता बरुआ की रिपोर्ट के मुताबिक, 16 मई को कांगपोकपी के सैकुल थाने में 21 साल और 24 साल की दो लड़कियों की मौत पर जीरो FIR दर्ज हुई थी. ये दोनों इम्फाल में एक कार वॉश में काम करती थीं. शिकायत के मुताबिक लड़कियों के किराये के घर में भीड़ ने उनके साथ रेप किया गया और फिर उनकी बर्बरता से हत्या कर दी गई.
21 साल की लड़की की मां ने शिकायत दर्ज की थी, जिसके बाद मर्डर, रेप और अपहरण की धाराओं में FIR दर्ज की गई. परिवार के मुताबिक उन लड़कियों के साथ काम करने वाले नगा व्यक्ति ने उन्हें बताया था भीड़ को पता था कि दो कुकी लड़कियां रहती हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, उस व्यक्ति ने बताया कि डर के कारण एक व्यक्ति ने लड़कियों के कमरे के बारे में बता दिया. भीड़ ने लड़कियों को घसीटकर बाहर लाया. लड़कियों के मुंह में कपड़ा डालकर एक हॉल में ले गए और फिर दरवाजा बंद कर दिया. भीड़ वहां शाम 7 बजे तक थी. जब वे लोग गए तो दोनों लड़कियों की मौत हो चुकी थी. 13 जून को मामले में दर्ज FIR को इम्फाल ईस्ट के पोरोमपाट थाने में ट्रांसफर किया गया.
45 साल की महिला को जलाया गयाद हिंदू की एक दूसरी रिपोर्ट के मुताबिक, 6 मई को 45 साल की एक महिला को निर्वस्त्र किया गया और उसे जला दिया गया. एक पादरी ने बताया कि 7 मई को महिला की आधी जली बॉडी मिली थी. उसके शरीर पर कपड़े नहीं थे. बाद में लाश को इम्फाल के सरकारी अस्पताल लाया गया था. एक दिन पहले काली शर्ट पहने और हथियार लिए मर्दों की भीड़ ने गांव पर हमला किया था. पादरी ने दावा किया कि मणिपुर पुलिस भी भीड़ के साथ थी. जब गांव पर हमला हुआ तो ज्यादातर लोग वहां से भाग गए. महिला अकेली रहती थी. वो भाग नहीं पाईं. भीड़ ने उन्हें पकड़ लिया था. उन्होंने बताया कि कांगपोकपी में उन्होंने जीरो FIR दर्ज कराई थी, जो बाद में इम्फाल ईस्ट थाने में ट्रांसफर की गई.
उत्पीड़न की कहानी अलग-अलग तरह की है. मणिपुर में एक हेल्थकेयर इंस्टीट्यूट में पढ़ाई करने वाली स्टूडेंट ने बताया था कि 4 मई को मैतेई समुदाय के लोगों ने उसके साथ उत्पीड़न किया. अंग्रेजी अखबार ‘द टेलीग्राफ’ से स्टूडेंट ने कहा था कि 4 मई को उसके साथ जो हुआ उसे वो आज भी नहीं भूल पाई है. आरोप लगाया कि मैतेई समुदाय के लोगों ने उसके इंस्टीट्यूट पर हमला किया था. भीड़ के साथ खड़ी महिलाएं खुशी से चिल्ला रही थीं और हमें मारने के लिए मर्दो को उकसा रही थीं. पीड़ित स्टूडेंट कई दिनों तक इम्फाल और फिर दिल्ली के अस्पताल में भर्ती रहीं.
स्टूडेंट ने अखबार को बताया,
स्वतंत्रता सेनानी की पत्नी को जिंदा जलाया"डॉरमेटरी में करीब 90 छात्र थे. वे सभी आइडेंटिटी कार्ड देखकर कुकी स्टूडेंट्स को परेशान कर रहे थे. हम 10 लोगों में दो को पुलिस ने बचा लिया और 6 लोग भाग गए. मुझे और मेरे दोस्त को आरांबाई तेंगोल और मैतेई लिपुन के पुरुष और महिलाओं ने घेर लिया. करीब आधे घंटे तक सभी फुटबॉल की तरह हमें लात मारते रहे. मर्दों का समूह हम पर कूद रहा था...जो हुआ उसे मैं शब्दों में नहीं बता सकती."
मणिपुर के काकचिंग जिले की एक वीभत्स घटना अभी सामने आई है. 80 साल की एक महिला अपने घर में थीं. लेकिन हथियारबंद लोगों ने उनके घर को पहले बाहर से बंद कर दिया और फिर आग के हवाले कर दिया. NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, ये घटना 28 मई की है. उस दिन, राजधानी इम्फाल से करीब 45 किलोमीटर दूर सीरो में कई जगहों में भारी हिंसा हुई थी. सीरो पुलिस स्टेशन में एक केस दर्ज किया गया है. महिला का पति एस चुराचांद सिंह एक स्वतंत्रता सेनानी था, जिनको पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने सम्मानित भी किया था.
राज्य में हो रही इन घटनाओं में एक आरोप पुलिस पर भी लग रही है कि कई मामलों में वो 'मूकदर्शक' बनी रही. एक आरोप ये भी लग रहा है कि मामले में कार्रवाई करने में देरी की जा रही है. 4 मई को थाउबल वाली घटना में भी पुलिस पर यही आरोप लगे. यौन उत्पीड़न के मामले में जीरो FIR 18 मई को दर्ज हुई थी लेकिन जहां घटना हुई, वहां के नोंगपोक सेकमाई थाने में पक्की FIR 21 जून को जाकर दर्ज हुई थी.
वीडियो: मणिपुर वीडियो मामले के बाद अब्दुल खान का नाम वायरल क्यों? पूरा सच मुंह बंद कर देगा













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