तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में एक व्यक्ति आपनी मां के शव को व्हीलचेयर पर श्मशान लेकर गया. उसकी मां काफी समय से बीमार थीं. उसे लगा कि उसकी मां की बीमारी के चलते कोई मदद करने नहीं आएगा. इस वजह से वो अकेले ही अपनी मां के शव को व्हीलचेयर पर ही शमशान तक ले गया.
'कोई मदद नहीं करेगा', मां के शव को व्हीलचेयर पर श्मसान लेकर पहुंचा बेटा
ये घटना तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली की है.


मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, श्मशान चलाने वाली संस्था लोकल लॉयन क्लब के ट्रस्टी एन. श्रीधरन ने बताया कि तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली के भारथीयार नगर के पास मनाप्परै में रहने वाले 60 साल के मुरुगन्नधम अपनी मां राजेश्वरी के शव को व्हीलचेयर श्मसान लेकर पहुंचे. राजेश्वरी 84 साल की थीं. हालांकि, डेथ सर्टिफिकेट मिलने के बाद ही शव का दाह संस्कार किया गया था. श्रीधरन ने आगे बताया,
'मेरे पास सुबह करीब 6 बजे पास में ही चाय की दुकान लगाने वाले का फोन आया. चायवाले ने बताया कि एक व्यक्ति दाहगृह के बाहर इंतजार कर रहा है. वो व्हीलचेयर में शव लाया है, जिसे उसने कपड़े से लपेट रखा है. यह सुनकर मैं जल्दी से उस जगह भागा. फिर मुरुगन्नधम ने बताया कि ये शव उसकी मां का है, जिन्हें लकवा मार गया था और वो लंबे समय से बीमार थीं, जिस कारण सुबह चार बजे उनका निधन हो गया और वो अपनी का अंतिम संस्कार करना चाहते हैं. मैं चौंक गया और उनसे पूछा कि वो अपनी मां का शव इस तरह क्यों लेकर आएं हैं, तो उन्होंने बताया कि उनकी मां सोरायसिस नाम की बीमारी से ग्रसित हैं, तो उन्हें लगा कि कोई उनकी मां के अंतिम संस्कार में उनकी मदद नहीं करेगा.'
दरअसल, सोरायसिस स्किन से जुड़ी एक ऑटोइम्यून बीमारी है. ये किसी भी उम्र में हो सकती है. इस बीमारी में स्किन पर लाल रंग की मोटी परत बन जाती है, जो चकत्ते की तरह दिखने लगती है. श्रीधरन बताते हैं कि मुरुगन्नधम ने उनसे बताया कि उनकी मां राजेश्वरी की सोरायसिस बीमारी का इलाज काफी सालों से चल रहा था और सात सितंबर को पास के अस्पताल के डॉक्टर्स ने मुरुगन्नधम को बताया कि उनकी मां की तबीयत बिगड़ रही है और उनकी मां की सबसे अच्छी सेवा घर में ही हो सकती है.
श्रीधरन ने आगे बाताया,
'उन्होंने अस्पताल से मिले दस्तावेजों को चेक किया और राजेश्वरी का इलाज कर रहे डॉक्टर्स से भी इस बात कि पुष्टि की. मुरुगन्नधम ने बताया कि उनके पास अंतिम संस्कार का खर्चा उठाने के लिए रुपये नहीं थे.'
मुरुगन्नधम के एक भाई मन्नापरै के पास में रहते हैं और एक भाई बेंगलुरु में रहते हैं. श्रीधरन के अनुसार उनके भाइयों को उनकी मां के निधन के बारे में पता नहीं है.
(ये स्टोरी हमारे साथ इंटर्नशिप कर रहे आर्यन ने लिखी है.)
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