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क्या मध्य प्रदेश पुलिस अपने साथियों के हत्यारे शिकारियों का एनकाउंटर करने पर तुली है?

पुलिस काले हिरण के शिकारियों को अरेस्ट कर चुकी है, तो फिर उन पर गोली क्यों चलाई?

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तस्वीर 14 मई की है जब काले हिरणों के सिर ले जा रहे शिकारियों ने 3 पुलिसकर्मियों को मार दिया था. (साभार-पीटीआई)

मध्य प्रदेश के गुना में कुछ दिनों पहले काले हिरण के शिकारियों ने 3 पुलिसवालों की हत्या कर दी थी. बाद में इस घटना से जुड़े दो आरोपी शिकारियों को पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया था. लेकिन अब इस मामले में पुलिस पर सवाल उठ रहे हैं. वजह है उसका दो और शिकारियों पर गोली चलाना. आरोप लग रहा है कि मध्य प्रदेश पुलिस अपने साथियों के हत्यारे शिकारियों का एनकाउंटर ही करना चाहती है.

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पुलिस का दावा

दरअसल रविवार, 15 मई को इन आरोपियों को जंगल के उस क्षेत्र में ले जाया जा रहा था, जहां कथित तौर पर काले हिरन की हत्या की गई थी. पुलिस का कहना है कि ले जाए जाते समय आरोपियों ने भागने की कोशिश की थी, जिसके चलते उनके पैर में गोली मारनी पड़ी. बाद में उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया.

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक गुन के एसपी राजीव मिश्रा ने बताया कि आरोपी जिया खान और सोनू को इसलिए ले जाया जा रहा था ताकि हथियारों और हिरण के अवशेषों को जब्त किया जा सके. उन्होंने दावा किया,

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'जिया खान ने स्टेयरिंग पर झपट्टा मार गाड़ी को पलटने की कोशिश की. इसके कारण गाड़ी सड़क से नीचे गड्ढे में उतर गई और दोनों ने पिछले दरवाजे से भागने की कोशिश की. हमारी टीम ने उन्हें वॉर्निंग दी, लेकिन वे नहीं रुके, जिसके बाद उनके पैर में गोली मारकर उन्हें पकड़ लिया गया.'

एसपी राजीव मिश्रा ने बताया कि इस घटना में दो पुलिसवाले भी घायल हुए हैं.

क्यों उठ रहे सवाल?

हालांकि इस मामले को लेकर पुलिसवालों के बयानों में विरोधाभास देखा जा रहा है. उस पर 'त्वरित न्याय' के नाम पर 'उत्तर प्रदेश के गैंगस्टर विकास दुबे' की तरह एनकाउंटर करने का आरोप लगाया जा रहा है. एसपी राजीव मिश्रा ने कहा है कि आरोपियों को घटनास्थल पर ले जाया जा रहा था, जबकि इंस्पेक्टर जनरल डी. श्रीनिवास वर्मा ने मीडिया को बताया कि आरोपी व्यक्तियों को ऐरन जिला न्यायालय ले जाया जा रहा था.

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द क्विंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक श्रीनिवास वर्मा ने कहा,

'दोनों जिया और सोनू को मध्य प्रदेश के गुना जिले के ऐरन कोर्ट में ले जाया जा रहा था. इसमें से एक आरोपी ने गाड़ी को पलटने और भागने की कोशिश की. उन्होंने पुलिस से हथियार भी छीनने की कोशिश की. उनसे सरेंडर करने के लिए कहा गया, लेकिन वे नहीं रुके. इसके बाद पुलिस को उनके पैरों में गोली मारनी पड़ी.'

वर्मा ने कहा कि इसके बाद दोनों आरोपियों को पहले ऐरन जिला अस्पताल में ले जाया गया, उसके बाद अदालत में पेश किया गया.

क्या है पूरी घटना?

इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत शनिवार 14 मई को हुई. उस दिन तड़के लगभग पौने तीन बजे गुना के ऐरन क्षेत्र में मोटरसाइकिल पर सवार सात हथियारबंद शिकारी काले हिरण और मोरों को मारकर ले जा रहे थे. उसी दौरान पुलिस की एक टीम ने शिकारियों को रोकने की कोशिश की. इस टीम में सब-इंस्पेक्टर राजकुमार जाटव, हेड कांस्टेबल संत कुमार मीना, कांस्टेबल नीरज भार्गव और तीन अन्य पुलिसवाले शामिल थे. इन्हें देख शिकारियों ने हथियार निकाल लिए और पुलिसकर्मियों पर फायरिंग कर दी. इस गोलीबारी में तीन पुलिसवालों की मौत हो गई और एक ड्राइवर घायल हो गए.

घटना के बाद पुलिस ने दो शिकारियों नौशाद खान और शहबाज को एनकाउंटर में मार दिया था. सभी आरोपी बिदोरिया गांव के रहने वाले हैं, जहां इस समय भारी पुलिसबल तैनात है. पुलिस का कहना है कि कुछ आरोपी अभी भी  फरार हैं. उनकी खोजबीन की जा रही है. इसके अलावा घटना के दौरान एक पुलिसकर्मी से छीनी गई इन्सास राइफल को अभी तक बरामद नहीं किया जा सका है.

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