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LIC के 2 लाख करोड़ उड़ गए, अडानी का क्या कनेक्शन निकला?

निवेशकों को जो नुकसान हुआ है, जानकर भरोसा नहीं कर पाएंगे!

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हिंडनबर्ग की अडानी ग्रुप पर जारी की गई रिपोर्ट के कारण भी LIC के शेयरों पर दबाव बढ़ा था. (फोटो: PTI/आजतक)

भारतीय शेयर मार्केट में गेम चेंजर के रूप में आया LIC IPO निवेशकों के लिए नुकसान भरा साबित हुआ है. LIC के IPO की लिस्टिंग को एक साल पूरा हो गया है. लेकिन एक साल बाद ये स्टॉक अपने इश्यू प्राइस से लगभग 40 फीसदी नीचे जा चुका है.

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, निवेशकों ने पिछले एक साल में LIC के IPO में लगभग 2 लाख करोड़ रुपये का नुकसान झेला है. दरअसल, LIC के IPO ने भारत के पांचवें सबसे कीमती IPO के तौर पर एंट्री ली थी. तब इसकी मार्केट कैपिटलाइजेशन 5 लाख 48 हजार करोड़ रुपये आंकी गई थी. लेकिन 16 मई को LIC IPO का मार्केट कैपिटलाइजेशन गिरकर 3 लाख 59 हजार करोड़ रुपये हो गया है.

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LIC के स्टॉक की लिस्टिंग 17 मई, 2022 को हुई थी. इसका इश्यू प्राइस 949 रुपये प्रति शेयर था. लेकिन 16 मई, 2023 को LIC का एक शेयर 568 रुपये पर बंद हुआ था. LIC में सरकार की हिस्सेदारी अभी भी 96.5 फीसदी बनी हुई है.

विदेशी निवेशकों ने घटाया हिस्सा

रिपोर्ट्स के अनुसार, LIC पिछले एक साल में निवेशकों को सबसे ज्यादा नुकसान देने वाली लार्ज कैप कंपनियों में से एक है. इसी वजह से म्यूचुअल फंड्स और विदेशी निवेशकों ने LIC के स्टॉक्स में अपना हिस्सा घटाया है. इकॉनमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, LIC में म्यूचुअल फंड कंपनियों की हिस्सेदारी घटकर 0.63 फीसदी पर आ गई है, जो कि दिसंबर में 0.66 फीसदी थी.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक LIC के शेयरों को साल 2022 में मार्केट की खराब स्थिति कारण उम्मीद से कम सब्स्क्रिप्शन मिला था. इसके अलावा मार्केट में इन्वेस्टर्स के बीच इंश्योरेंस सेक्टर के प्रति इतना पॉजिटिव माहौल नहीं था, इसके कारण भी LIC के शेयरों में गिरावट देखने को मिली है. LIC के शेयरों में गिरावट का एक कारण ये भी रही कि LIC ने अपने इन्वेस्टर्स के लिए कोई भी डिविडेंड जारी नहीं किया था. हिंडनबर्ग की अडानी ग्रुप पर जारी की गई रिपोर्ट के कारण भी LIC के शेयरों पर दबाव बढ़ा था.  

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LIC में फ्रंट रनिंग का केस सामने आया था

हाल ही में SEBI ने पाया था कि LIC के बॉन्ड डीलर योगेश गर्ग, जो कि जनवरी 2022 से LIC के इक्विटी डीलर बन गए थे, डीलिंग रूम में बैठकर अपनी मां, सास और स्वर्गीय पिता के नाम पर खेल कर रहे थे. SEBI ने पाया था कि योगेश गर्ग को जैसे ही इस बात की सूचना मिलती थी कि LIC किसी कंपनी के शेयर खरीदने वाली है, तो वो इस जानकारी को अपने करीबी रिश्तेदारों के साथ साझा कर देते थे.

इसके बाद योगेश गर्ग के ये करीबी लोग भी उस कंपनी के शेयर खरीद लेते थे. जैसे ही LIC उस कंपनी में पैसा लगाती, उसका शेयर मांग बढ़ने से रॉकेट पर सवार हो जाता था. इस तरह से योगेश गर्ग ने जांच से बचने के लिए अपने करीबी रिश्तेदारों के ट्रेडिंग खातों का इस्तेमाल किया. मामला सामने आने के बाद उनपर और उनके रिश्तेदारों पर बैन लगा दिया गया.

दरअसल, LIC अपने पॉलिसी धारकों का पैसा म्युचुअल फंड, शेयर मार्केट और बॉन्ड समेत कई निवेश साधनों में लगाती है ताकि बेहतर रिटर्न हासिल हो सके. LIC के पास देश के करीब 29 करोड़ पॉलिसी धारकों के 41 लाख करोड़ रुपये जमा हैं. उसने इसमें से करीब 10 लाख करोड़ रुपये का निवेश शेयर मार्केट में कर रखा है.

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