अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की अपने ही देश में घेराबंदी शुरू हो गई है. अमेरिका के पूर्व रक्षा मंत्री और सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (CIA) के पूर्व निदेशक लियोन पैनेटा ने ट्रंप की तीखी आलोचना की है. उन्होंने ईरान के साथ चल रही जंग और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने के लिए ट्रंप को ही पूरी तरह से जिम्मेदार ठहराया है. पैनेटा ने कहा कि ट्रंप के लिए इस पूरे टकराव से खुद को बाहर निकाल पाना बेहद मुश्किल होगा. हालांकि, उन्होंने ट्रंप को एक ऐसा रास्ता भी सुझाया, जिससे अमेरिका की इज्जत बचाने में मदद मिल सकती है.
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Iran vs America: अमेरिका के पूर्व रक्षा मंत्री Leon Panetta ने कहा कि अगर Donald Trump के अलावा कोई और अमेरिकी राष्ट्रपति होता, तो वो Iran के मीनाब शहर में एयरस्ट्राइक में 165 से ज्यादा स्कूली छात्राओं की मौत के लिए माफी मांगता.


ब्रिटिश अखबार 'द गॉर्डियन' से बात करते हुए लियोन पैनेटा ने कहा कि ट्रंप ने ईरान के बारे में जैसा सोचा था, वैसा कुछ हुआ नहीं. उन्होंने कहा कि यह अंदेशा पहले से था कि ईरान पर हमला हुआ, तो वो होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर देगा. होर्मुज, जो दुनिया की करीब 20 फीसदी तेल और गैस सप्लाई का प्रमुख समुद्री रास्ता है.
2011 में पैनेटा की देखरेख में ही अमेरिका ने पाकिस्तान के एबटाबाद में एक ऑपरेशन को अंजाम दिया था, जिसमें आतंकी संगठन अल-कायदा के चीफ ओसामा बिन लादेन को मार दिया गया था. पैनेटा ने कहा कि ट्रंप के लिए होर्मुज को खोलना या ईरान को रोकना बेहद मुश्किल है. उन्होंने कहा कि मोजतबा खामेनेई के नया सुप्रीम लीडर बनने पर इसकी आशंका और भी कम हो गई है, क्योंकि अली खामेनेई के मुकाबले मोजतबा ज्यादा कट्टर हैं.
लियोन पैनेटा ने बताया कि ट्रंप को खुद को युद्ध का विजेता घोषित करने का एकमात्र रास्ता होर्मुज को खोलना है. इसके लिए उन्हें 'बूट्स ऑन ग्राउंड' यानी ईरान की जमीन पर अमेरिकी सैनिक भेजने होंगे. पैनेटा ने सलाह देते हुए कहा कि ट्रंप अपनी हवा-हवाई सोच को छोड़ दें और 'इस सच्चाई का सामना करें' कि उन्हें होर्मुज स्ट्रेट को खोलने, तट से लगे ईरानी रक्षा ठिकानों को खत्म करने और तेल टैंकरों को सुरक्षित निकालने के मकसद से जहाज तैनात करने के लिए सेना का इस्तेमाल करना ही होगा.
लियोन पैनेटा ने आगे कहा,
"इसमें कोई शक नहीं है कि (ईरान की जमीन पर अमेरिकी सैनिक भेजने) इसमें जानें जाएंगी और इससे निश्चित रूप से जंग का दायरा बढ़ेगा, लेकिन मुझे इसका कोई दूसरा विकल्प नजर नहीं आता. उन्हें यह करना ही होगा."
लियोन पैनेटा ने कहा कि ट्रंप ने अमेरिका की ताकत के बारे में बहुत कुछ कहा है. ये इस बात का इम्तिहान है कि क्या अमेरिका उस स्थिति से निपट पाएगा, जो ना केवल युद्ध को लंबा खींचेगी, बल्कि ईंधन की बढ़ती कीमतों की वजह से अमेरिका को भारी आर्थिक नुकसान भी पहुंचाएगी. कुछ लोगों का कहना है कि ये स्थिति संभावित तौर पर दुनिया भर में मंदी का कारण भी बन सकती है.
लियोन पैनेटा ने साफ-साफ कहा,
"ज्यादा विकल्प नहीं हैं. आपको वही करना होगा जो जरूरी है, और अगर आप होर्मुज स्ट्रेट को खोल पाते हैं, तो इससे आपको एक बेहतर मौका मिल सकता है. एक ऐसा आधार जिस पर आप उम्मीद के साथ किसी तरह के सीजफायर के लिए बातचीत कर सकें. इस मोड़ पर उनके पास आगे बढ़ने का यही एकमात्र रास्ता है; वर्ना, यह साफ हो जाएगा कि वे कोई समाधान खोजने में नाकाम रहे हैं."
ट्रंप ने नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन (NATO) के साथी देशों से होर्मुज स्ट्रेट खुलवाने में सैन्य मदद के लिए कहा था. हालांकि, NATO देश इसके लिए आगे नहीं आए. मदद नहीं मिली तो ट्रंप ने NATO देशों को 'कागजी शेर' और 'डरपोक' तक बता दिया.
लियोन पैनेटा का कहना है कि 28 फरवरी को ईरान पर हमले से पहले अमेरिका को पहले अपने सहयोगी देशों के साथ बात करनी चाहिए थी. उन्होंने कहा,
"अगर आप युद्ध की योजना बना रहे हैं, तो अपने सहयोगियों से बात करना कोई बुरा विचार नहीं है. किसी भी तरह की सैन्य कोशिश को समर्थन देने के लिए गठबंधन जरूरी होते हैं. हमने यह सबक बहुत पहले, दूसरे विश्व युद्ध के समय ही सीख लिया था. लेकिन (ट्रंप) गठबंधनों के प्रति एक लापरवाह रवैया अपनाते हैं, और अब वे अचानक खुद को ऐसी स्थिति में पाते हैं, जहां उन्हें अपने सहयोगियों- NATO और दूसरों की ओर रुख करना पड़ रहा है; ये वही लोग हैं जिनके साथ उन्होंने अपने राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान निश्चित रूप से अच्छा बर्ताव नहीं किया, और अब वे उनसे खुद को मुश्किल से बाहर निकालने में मदद मांग रहे हैं."
पूर्व रक्षा मंत्री ने हल्के से हंसते हुए आगे कहा, "अब उनके अपने ही कर्मों का फल उन्हें भुगतना पड़ रहा है."
लियोन पैनेटा ने कहा कि उन्होंने कभी किसी कमांडर-इन-चीफ (अमेरिकी राष्ट्रपति) को उन नियमों को तोड़ते हुए नहीं देखा, जैसा कि ट्रंप करते हैं. जब संघर्ष के पहले ही दिन दक्षिणी ईरान के मीनाब शहर में लड़कियों के एक स्कूल पर टॉमहॉक मिसाइल गिरी, तो ट्रंप ने इस हमले का दोष ईरान पर मढ़ने की कोशिश की. ट्रंप का दावा था कि ईरान के सुरक्षा बल अपने गोला-बारूद के इस्तेमाल में 'बहुत ज्यादा चूक' करते हैं.
पैनेटा ने टिप्पणी करते हुए कहा,
"अमेरिका का कोई भी अन्य राष्ट्रपति अपनी गलती कबूल करता और जो कुछ हुआ, उसके लिए माफी मांगता. लेकिन वे (डॉनल्ड ट्रंप) ऐसा नहीं करते. इससे अमेरिका की एक ऐसी इमेज बनती है, जो काफी हद तक उस 'बदसूरत अमेरिकी' वाली इमेज से मेल खाती है, जो कभी बहुत से लोगों के मन में अमेरिका को लेकर हुआ करती थी."
28 फरवरी को अमेरिका ने कथित तौर पर ईरान के मीनाब में लड़कियों के स्कूल पर दो बार एयरस्ट्राइक की थी. इसमें 165 से ज्यादा स्कूली बच्चियों की मौत हो गई थी. सामूहिक कब्र खोदकर उन बच्चियों के शव दफनाए गए थे. इस घटना के लिए दुनिया भर में अमेरिका की काफी आलोचना हुई.
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