आरोपी गुरविंदर (सबसे बाएं) ने हिंसा वाले दिन भिंडरावाले की तस्वीर वाली टीशर्ट पहन रखी थी. (तस्वीर- इंडिया टुडे)
लखीमपुर हिंसा मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने 2 और लोगों को गिरफ्तार किया है. मंगलवार 26 अक्टूबर को की गई इस गिरफ्तारी का संबंध भारतीय जनता पार्टी (BJP) के दो कार्यकर्ताओं, एक पत्रकार और एक ड्राइवर की हत्या से है. बीती 3 अक्टूबर को लखीमपुर में किसानों को कार से कुचलने वाली घटना के बाद जो हिंसा भड़की, उसी में इन 4 लोगों की हत्या कर दी गई थी.
भिंडरावाले की टीशर्ट पहने था एक आरोपी
पुलिस ने जिन 2 आरोपियों को अरेस्ट किया है, उनमें से एक की पहचान गुरविंदर उर्फ बिंदा के रूप में हुई है. दूसरे आरोपी का नाम विचित्र सिंह बताया गया है. इंडिया टुडे से जुड़े संतोष कुमार की रिपोर्ट के मुताबिक बिंदा वही शख्स है जो 3 अक्टूबर को लखीपमुर एसपी अरुण कुमार सिंह की बगल में नारेबाजी करता दिखा था. उस वक्त उसने जरनैल सिंह भिंडरावाले की तस्वीर वाली टीशर्ट पहनी हुई थी. इंडिया टुडे की ख़बर के मुताबिक़ लखीमपुर मामले में यूपी पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 24 से ज़्यादा किसानों के बयान दर्ज किए हैं. उसने सभी चश्मदीदों को आरोपियों के वीडियो और तस्वीरें दिखाए हैं. इसके बाद ही आरोपियों की पहचान की जा सकी. आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस ने पिछले 24 घंटों में लखीमपुर के आसपास के ज़िलों में छापेमारी की है. ये भी कहा है कि जल्द ही और गिरफ़्तारियां की जाएंगी.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
हालांकि गवाहों की संख्या पर सुप्रीम कोर्ट ने हैरानी जताई है. 26 अक्टूबर को ही लखीमपुर मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले से जुड़े गवाहों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई. उसने यूपी पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा कि उसे 3 अक्टूबर की घटना से जुड़े केवल 23-24 गवाह मिले, जबकि जिस समय केंद्रीय मंत्री के काफिले की कार ने कई किसानों को टक्कर मारी थी तब वहां बहुत बड़ी संख्या में लोग जुटे थे. दि हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक सीजेआई एनवी रमना की अध्यक्षता में मामले की सुनवाई कर रही 3 सदस्यीय बेंच ने कहा,
"किसानों की रैली में सैकड़ों लोग थे. लेकिन सिर्फ 23 गवाह हैं. आपको ऐसे गवाह ढूंढने चाहिए जो सामने आकर बताएं कि उन्होंने उस दिन क्या देखा."
सीजेआई रमना ने कहा कि आरोपियों का जिस तरह का प्रभाव है, मुमकिन है उसके चलते कई गवाह डरे हुए हों. कोर्ट ने साफ कहा कि ये सरकार की जिम्मेदारी है कि वो और गवाहों को खोजे जो विश्वसनीय बयान दे सकें ताकि पुलिस की कार्रवाई आगे बढ़े. कोर्ट ने यूपी सरकार के वकील हरीश साल्वे से पूछा कि क्या इस घटना का कोई ऐसा गवाह नहीं है जो उस दिन घायल हुआ हो. इस पर पहले तो हरीश साल्वे ने कहा कि घटना में शिकार हुए लोगों की मौतें हुईं, कोई घायल गवाह नहीं है. इस पर सीजेआई ने जोर देकर पूछा-
"क्या एक भी इंजर्ड विटनेस नहीं है!"
तब जाकर हरीश साल्वे ने कहा-
"मुझे यकीन है कि कुछ घायल विटनेस होंगे. उनमें से कुछ ने सेक्शन 164 के तहत बयान दिए हैं."
सुनवाई में कोर्ट ने यूपी सरकार को निर्देश दिया कि वो और गवाहों के बयानों के साथ कोर्ट के सामने आए. साथ ही उन्हें सुरक्षा भी प्रदान करे. इस पर यूपी सरकार ने दावा किया कि उसने पहले ही गवाहों की सुरक्षा के मद्देनजर उन्हें गार्ड मुहैया कराए हैं. साथ ही सीसीटीवी सिक्योरिटी भी दी है. बताते चलें कि शीर्ष अदालत ने पत्रकार रमन कश्यप और बीजेपी कार्यकर्ता श्याम सुंदर की हत्या की जांच की अलग स्टेटस रिपोर्ट यूपी सरकार से मांगी है. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक ये दोनों घटना में शामिल गाड़ियों में बैठे थे जिनकी बाद में हत्या कर दी गई थी. मामले की अगली सुनवाई 8 नवंबर को होगी.