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राजनीति में दोबारा कदम रखेंगे? सवाल पर क्या बोले कुमार विश्वास

कुमार विश्वास ने लल्लनटॉप को अपने राजनीतिक भविष्य के बारे में बता दिया!

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कवि कुमार विश्वास ने लल्लनटॉप अड्डा में राजनीति पर भी बात की

लल्लनटॉप अड्डा. 'दी लल्लनटॉप' का सालाना जलसा. इस बार 18, 19 और 20 नवंबर को दिल्ली के मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में लगा. साहित्य और फ़िल्मी दुनिया से जुड़ी शख्सियतों ने शिरकत की. जलसे में कवि कुमार विश्वास भी आए. मंच पर उनसे बातचीत की लल्लनटॉप के सरपंच सौरभ द्विवेदी ने. इस बातचीत में कुमार विश्वास से पहला सवाल राजनीति को लेकर पूछा गया.

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उनसे सवाल हुआ कि आपने लल्लनटॉप अड्डे पर कहा कि जिंदाबाद के नारे मत लगाओ, इस चक्कर में मेरे 7 साल बर्बाद हो गए. क्या कवि कुमार विश्वास को लगता है कि राजनीति का ये जीवन उनके लिए नहीं बना है या फिर अभी महज ये 14 साल का वनवास चल रहा है?

इस सवाल का जवाब देते हुए कुमार विश्वास ने कहा,

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'ये कशमकश केवल मेरी नहीं है, ये इतिहास के हर सच्चे और अच्छे आदमी की रही है. ये चाणक्य की भी कशमकश है कि मैं व्याकरण पढूं, फेलोशिप ले लूं, या अहंकारी नंद वंश को उखाड़ फेकूं. ये बाहर पढ़ते हुए मोतीलाल नेहरू के बेटे की भी कशमकश है कि विदेश में पढ़ते हुए अपने दादा और पिता की तरह बैरिस्टर बन जाऊं या फिर अंग्रेजों के शासन को खत्म करूं. ये गांधी जी और मदन मोहन मालवीय की भी कशमकश है.... मैं कोई अनोखा पैदा नहीं हुआ, साल 2010 में कॉमनवेल्थ के समय मेरे अंदर भी ऐसी ही कशमकश थी. एक प्रयोग किया... ऐसा कुछ नहीं है कि मेरा मन ऊब गया है, लेकिन उस समय जो एनर्जी थी, उससे बहुत कुछ हो सकता था... राजनीति में जो सात साल मेरे चले गए, उसका आउटपुट अच्छा नहीं आया, उस आउटपुट को देखकर मुझे नहीं लगता को वो सात साल मैंने अच्छे खर्च किए. हां, आंदोलन के दौरान का समय अच्छा था.'

आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता ने आगे ये भी कहा कि वो भविष्य के बारे में अभी कुछ नहीं कह सकते. उनके मुताबिक हो सकता है किसी दिन लगे कि यही करना (राजनीति करना) जरूरी है, हो सकता है किसी दिन लगे की सामने वाला शासक ज्यादा अहंकारी हो गया है, तो बोतल से निकाला गया जिन्न, बोतल में वापस डालने के लिए राजनीति में उतरना पड़ जाए.

वीडियो देखें : कुमार विश्वास ने राम और धार्मिक कट्टरता पर क्या कह माहौल बना दिया?

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