चांदनी चौक स्थित हनुमान मंदिर को 3 जनवरी को ढहा दिया गया. नगर निगम ने दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बाद ये कदम उठाया. दरअसल, चांदनी चौक का पुनर्विकास हो रहा है. इसी के चलते अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया गया है. कोर्ट ने पाया कि हनुमान मंदिर अतिक्रमण वाली जगह पर बना है, ऐसे में मंदिर को ढहाने का आदेश दिया गया. मंदिर ढहने के बाद अब कांग्रेस, भाजपा और AAP एक-दूसरे के सिर पर इसका ठीकरा फोड़ रहे हैं.
चांदनी चौक: हनुमान मंदिर तोड़ने के पीछे की असल वजह क्या है, जान लीजिए
BJP, AAP और कांग्रेस मंदिर ढहाने का ठीकरा एक दूसरे पर फोड़ रही हैं.


इस मामले में कौन क्या कह रहा है? कोर्ट ने क्या कहा? पुनर्विकास के तहत क्या-क्या होना है? इन सभी सवालों के जवाब एक-एक करके जानते हैं.
2004 में प्लान बना, अब जाकर शुरू हुआ काम
चांदनी चौक के पुनर्विकास की योजना 2004 में बनी. 2008 में दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने शाहजहानाबाद पुनर्विकास निगम (SRDC) की स्थापना की. पर काम 2018 तक शुरू नहीं हुआ. दिल्ली में AAP सरकार आ चुकी थी. 2018 में डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने इस योजना को लॉन्च किया.
चांदनी चौक में क्या-क्या काम होना तय हुआ?
- लाल किले और फतेहपुरी मस्जिद के बीच 1.3 किमी लंबा नो पार्किंग फुटपाथ डेवलप करना. - ओवरहेड तारों को अंडरग्राउंड करना. - फायर हाइड्रेंट स्थापित करना. - लाल बलुआ पत्थरों की चेयर्स बनाना. लाल बलुआ पत्थरों के 175 प्लांटर्स बनाना. 250 मौलसारी पेड़ लगाना. - यहां आने वाले लोगों की सुविधा के लिए टॉयलट बनाना. - LED स्ट्रीट लाइट लगाना. - सेल्फी प्वाइंट बनाना. - सीवर व पानी की लाइन दुरुस्त करना. - रिक्शा, ई-रिक्शा व साइकिल के लिए पार्किंग की सुविधा करना. - 2300 से अधिक कारों की पार्किंग के लिए गांधी मैदान में मल्टी लेवल पार्किंग बनाना, जिसमें आठ फ्लोर और तीन अंडरग्राउंड लेवल होंगे. इस परियोजना को मार्च 2020 तक जनता के लिए खोल दिया जाना था, लेकिन कोविड -19 लॉकडाउन के कारण इसमें देरी हुई.
मामला दिल्ली हाई कोर्ट क्यों गया?
हनुमान मंदिर मुख्य मार्ग पर मोती बाजार के सामने स्थित था. करीब 50 साल पुराना यह मंदिर चांदनी चौक पुनर्विकास परियोजना में अड़चन पैदा कर रहा था. 2015 में दिल्ली हाई कोर्ट ने नगर निगम को आदेश दिया था कि वो चांदनी चौक की सड़कों पर धार्मिक संरचनाओं द्वारा किए गए अतिक्रमण को हटाए. इसके बाद कोर्ट ने 16 मई, 2018 को आदेश दिया कि अतिक्रमण को हटाने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से MCD की है और दिल्ली सरकार को निगम को समर्थन देना चाहिए. उस समय MCD में BJP थी. और दिल्ली में आप की सरकार. इसी को लेकर दोनों में तनातनी हो गई.
दिसंबर, 2020 में भी दिल्ली हाई कोर्ट ने चिंता व्यक्त की थी. कहा था कि उत्तरी दिल्ली नगर निगम एक छोटे से मंदिर को हटा नहीं पा रही है. कोर्ट ने ये भी कहा था कि लोग मंदिरों और पूजा स्थलों की आड़ में सरकारी जमीन पर अपना अधिकार कर लेते हैं.
AAP, BJP और कांग्रेस के नेताओं का क्या कहना है?
कांग्रेस काल में योजना बनी, अब दिल्ली में आप की सरकार में काम शुरू हुआ. वहीं एमसीडी में बीजेपी है. ऐसे में तीनों ही पार्टियों के नेता इस मसले पर उलझे हुए हैं. वहीं, एक-दूसरे पर मंदिर गिराने का आरोप डाल रहे हैं.
AAP के प्रवक्ता राघव चड्ढा ने ट्वीट किया कि बीजेपी की MCD ने चांदनी चौक में बजरंग बली का प्राचीन मंदिर तोड़ दिया.

आप विधायक सौरभ भारद्वाज ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए BJP पर निशाना साधा.
इधर, BJP नेता कपिल मिश्रा ने भी ट्वीट किया. और AAP सरकार पर निशाना साधा.
दिल्ली कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अनिल चौधरी ने आरोप लगाया कि भाजपा और आप नेताओं ने मिलकर मंदिर तुड़वाया है.
यानी चांदनी चौक का रीडेवलपमेंट हो रहा है. इसके लिए मंदिर हटाया जाना था. कोर्ट के आदेश से एमसीडी को हटाना था, राज्य सरकार को सहयोग करना था. मंदिर हट गया, लेकिन एमसीडी और सरकार में बैठी पार्टियां मंदिर हटाने की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं हैं. गजब है!
















