डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ कांगो की एक महिला में रक्तस्रावी बुखार के लक्षण दिखाई दे रहे हैं जिसके बाद से नए घातक रोग 'डिज़ीज़ एक्स' की आंशका बढ़ गई है. इस मरीज़ को पेशेंट ज़ीरो बताया जा रहा है. माने डिज़ीज़ एक्स से पीड़ित पहला मरीज़.
रक्तस्त्रावी बुखार यानी ऐसा बुखार जो शरीर की नसों को प्रभावित करता है. इबोला और येलो फीवर में इस तरह के लक्षण देखने को मिलते हैं.
CNN की एक रिपोर्ट
मुताबिक़, कांगो के अधिकारियों ने इबोला सहित कई और टेस्ट्स के लिए महिला के सैम्पल लिए हैं. और उन्हें कांगो नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल रिसर्च (INRB) भेजा गया है. इबोला की रिपोर्ट का इंतज़ार है, वहीं दूसरे सभी नतीजे नेगेटिव आए हैं. इस इंस्टीट्यूट को अमेरिकी यूनाइटेड स्टेट्स सेंटर्स फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन और WHO जैसे संस्थाओं का समर्थन मिला हुआ है.
मरीज़ की बीमारी अभी भी रहस्य बनी हुई है. मरीज़ अभी सिर्फ एक निश्चित दूरी से अपने रिश्तेदारों से बातचीत कर सकती है. उसकी पहचान गुप्त रखी गई है. उसके बच्चों की भी टेस्टिंग हुई है लेकिन बच्चों में अभी तक कोई लक्षण नहीं दिखा है.
इबोला के लिए वैक्सीन मौजूद है जिससे मृत्यु दर में कमी आई है लेकिन डिज़ीज़ एक्स के लिए मौजूदा वक्त में न कोई दवाई है और न ही कोई वैक्सीन. इलाज कर रहे डॉक्टर का क्या कहना है? मरीज़ का इलाज़ कर रहे डॉक्टर डैडिन बोनकोल ने CNN से बातचीत में कहा,
हम सभी डरे हुए हैं. इबोला अज्ञात था. कोविड अज्ञात था. हमें नई बीमारियों से डरना होगा. यह कोई साइंस फिक्शन नहीं है. यह वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित वैज्ञानिक डर है.लेकिन कई मेडिकल साइंटिस्ट और लोगों के दिमाग में ये सवाल है कि अगर इस महिला को इबोला न हो तो, क्या होगा? क्या होगा अगर महिला 'डिज़ीज़ एक्स' से पीड़ित निकले, जो कि कोरोना वायरस से भी ख़तरनाक बीमारी है.
अभी के लिए डिज़ीज़ एक्स काल्पनिक जैसा है लेकिन वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन
ने 2018 में ही इस संभावित गंभीर बीमारी के लिए अलर्ट ज़ारी कर दिया था. Disease X है क्या? 2018 में जब WHO ने डिज़ीज़ एक्स को लेकर जानकारी दी थी तब यूनाइटेड स्टेट्स नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ एलर्जी और संक्रामक रोगों के डायरेक्टर डॉक्टर एंथोनी फौसी ने 'डिज़ीज़ एक्स' में एक्स को अप्रत्याशित बताया था.
डिज़ीज़ एक्स अभी एक रहस्य जैसा ही है. WHO ने इसके बारे में कहा था कि इससे एक गंभीर अंतरराष्ट्रीय महामारी फ़ैल सकता है जिसके बारे में अभी हमें कुछ ख़ास पता नहीं है. यह कथित तौर पर कई जगहों से एक साथ उभर सकता है और किसी भी वक्त स्ट्राइक कर सकता है.

इबोला वायरस की खोज में मदद करने वाले प्रोफेसर जीन-जैक्स मुएम्बे ताम्फुम. (तस्वीर: एएफपी)
EBOLA खोजने में मदद करने वाले वैज्ञानिक ने क्या कहा? प्रोफेसर जीन-जैक्स मुएम्बे ताम्फुम. 1976 में इन्होंने इबोला वायरस की खोज में मदद की थी. इन्होंने CNN से कहा,
"हम अब एक ऐसी दुनिया में हैं जहां नए-नए बैक्टीरिया, वायरस और माइक्रोऑर्गैनिस्म का पता चलता रहेगा और यह मानवता के लिए ख़तरा है. डिसीज़ एक्स कोरोना वायरस से भी ख़तरनाक हो सकता है. भविष्य में कई और बीमारियां जानवरों से इंसानों में आ सकती हैं."मुएम्बे बताते हैं कि अगर डिज़ीज़ एक्स का कांगो में पता चलता है तो यूरोप सहित पूरी दुनिया को इस नई बीमारी से लड़ने के लिए वक्त मिलेगा और दुनियाभर के देश नई रणनीति बना पाएंगे.
येलो फीवर या पीतज्वर कई तरह के इन्फ्लूएंजा, रैबीज, ब्रुसेलोसिस और लाइम डिज़ीज़ उन बीमारियों में से हैं, जो जानवरों से मनुष्यों में कीट आदि के जरिए आते हैं. ये इससे पहले भी कई महामारी फ़ैला चुके हैं.






















