जबकि होम मिनिस्ट्री नार्थ ईस्ट के लोगों के साथ भेदभाव रोकने के लिए कई कदम उठा रही है, फिर भी अभी ये जारी है. मैं इस मामले का फॉलोअप लूंगा.वीडियो में दिख रही लड़की कहती है.
हम यहां जामा मस्जिद पर हैं. हमें यही पता था कि यहां की इंट्री फ्री है. हम लोग नॉर्थ ईस्ट से हैं. हमारे साथ एक जर्मनी का दोस्त भी आया था. हम गेट नंबर आठ पर थे. मोबाइल के लिए एंट्री के लिए हमसे 300 रुपये मांगे गए. हम फोन बैग में रखे हुए थे. हमने कहा कि हम मोबाइल यूज नहीं करेंगे. तब भी वो हमसे उसके लिए पैसे मांग रहे हैं. हमें पैसे देने से कोई प्रॉब्लम नहीं है. प्रॉब्लम इससे है कि वो केवल हम लोगों से पैसे मांग रहे हैं. जबकि दूसरे इंडियन, जिनके पास फोन है वो आराम से फोन लेकर अंदर जा रहे हैं. क्योंकि हमारा साथी फॉरेनर है और हम नार्थ ईस्ट से हैं इसलिए उन्होंने हमसे पैसे मांगे. खैर सारी बहस के बाद हम एक पुलिस वाले को बुला कर लाए. जिसने उन्हें बताया कि हम फॉरेनर नहीं हैं. हम इंडिया के ही हैं. पर एंट्री वाले तब भी नहीं माने. पुलिस वाला भी हार के चला गया. बोला कि हो सके तो हम PMO को लेटर लिखें. हमें भी लगा कि हमें ऐसा करना चाहिए. हमारा दोस्त अंदर गया है पर हमें नहीं जाने दिया गया. ये रिलीजियस इंस्टीट्यूसन है पर ऐसा नहीं है जिसमें नहीं जा सकते. ऐसी कोई रिलीजियस बात होती तो मैं इसकी इज्जत करती हूं. यह लोग हमारा शोषण कर रहे हैं. केवल वो हमें जाने के लिए पे करने को कर रहे थे. हमारा दोस्त शॉर्टस में था तब भी गया. मैं समझती हूं कि ये दुखी है. सारे लोग अपना फोन लेकर जा रहे थे. वो हमसे 300 रुपये मांग रहे थे. वैसे पैसों की कोई बात नहीं है. हां पर ये है कि हमसे दूसरे लोग भी आकर पूछ रहे थे कि आप चीन से या नेपाल से हैं. ये बहुत बुरा था. मुझे लगता है आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया या जो भी अथॉरिटी हो उसे इसके बारे में कुछ करना चाहिए.पहले भी ऐसे कई मामले सामने आते रहे हैं. ये काबिल-ए-तारीफ है कि केंद्रीय मंत्री इस तरह के मामलों पर ध्यान दे रहे हैं. और फॉलोअप पर भी नजर बनाए हुए हैं.
वीडियो देखें https://twitter.com/KirenRijiju/status/793518035520716802
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