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कौन है ये युक्तिवादी संगम, जो केरल की मुसलमान लड़कियों को हिजाब जलाना सिखा रहा है?

भारत में ये पहला ऐसा मौका है, जब ईरान की महिलाओं के समर्थन में सार्वजनिक रूप से हिजाब जलाया गया है.

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हिजाब को आग लगाती एक महिला. (फोटो: इंडिया टुडे)

ईरान में चल रहे हिजाब विरोधी प्रदर्शन (Iran Hijab Protest) के समर्थन में बीते रविवार 6 नवंबर को केरल में भी कई महिलाओं ने हिजाब जलाया. केरल युक्तिवादी संगम नाम के एक संगठन द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ऐसा किया गया. युक्तिवादी का मतलब होता है तर्कवादी. कोझिकोड में ये कार्यक्रम कराया गया था, जहां ईरान की महिलाओं के समर्थन में मुस्लिम महिलाओंऔर लड़कियों ने हिजाब जलाया.

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भारत में ये पहला ऐसा मौका है, जब ईरान की महिलाओं के समर्थन में सार्वजनिक रूप से हिजाब जलाया गया हो. संगठन की छह मुस्लिम महिलाओं की अगुवाई में ऐसा किया गया. इस दौरान कार्यकर्ताओं ने नारे लगाए और ईरान में हिजाब की अनिवार्यता का विरोध कर रही महिलाओं के साथ एकजुटता में पोस्टर-बैनर लहराए गए. 

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क्या है केरल युक्तिवादी संगम?

यह केरल का एक ‘तर्कवादी’ संगठन है. ये फेडरेशन ऑफ इंडियन रेशनलिस्ट एसोसिएशन (फिरा) नाम के संगठन का हिस्सा है, जो तर्कवाद और मानवता के लिए बनाया गया था. केरल युक्तिवादी संगम हर साल आजाद विचारों पर सेमिनार आयोजित कराता रहता है. इस संगठन में सभी धर्मों के लोग शामिल हैं.

ये संगठन साल 1967 से काम कर रहा है. केरल के सभी जिलों में ये संगठन सक्रिय है. केरल युक्तिवादी संगम की एक मासिक पत्रिका निकलती है, जिसका नाम है युक्तिरेखा. यह साल 1983 से ही प्रकाशित हो रही है. इस संगठन का एक यूथ विंग है- ह्यूमनिस्ट यूथ मूवमेंट. इसका एक अन्य सहयोगी संगठन- केरल मिश्र विवाहावेड़ी- अंतरधार्मिक और अंतरजातीय विवाहों पर काम करता है.

केरल का ये संगठन लंदन स्थित ह्यूमनिस्ट इंटरनेशनल के साथ भी जुड़ा हुआ है. यह अंतरराष्ट्रीय स्तर का एक मानवतावादी नैतिक संघ है.

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केरल में तर्कवादी और नास्तिक संगठनों का एक लंबा इतिहास रहा है. 29 मई 1917 को एक सामाजिक आंदोलन शुरु हुआ था, जिसमें अंतरजातीय खान-पान को बढ़ावा देने की बात शुरु की गई थी. धीरे-धीरे इसमें कई सारे ऐसे मुद्दे जोड़े गए, जो कि वैज्ञानिक सोच और तार्किक दृष्टिकोण पर आधारित थे. आगे चलकर इस विषय पर काम करने वाले कई संगठनों का जन्म हुआ, जिनमें से एक केरल युक्तिवादी संगम है. 

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